Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 9:1 मरकुस 9:2 मरकुस 9:3 मरकुस 9:4 मरकुस 9:5 मरकुस 9:6 मरकुस 9:7 मरकुस 9:8 मरकुस 9:9 मरकुस 9:10 मरकुस 9:11 मरकुस 9:12 मरकुस 9:13 मरकुस 9:14 मरकुस 9:15 मरकुस 9:16 मरकुस 9:17 मरकुस 9:18 मरकुस 9:19 मरकुस 9:20 मरकुस 9:21 मरकुस 9:22 मरकुस 9:23 मरकुस 9:24 मरकुस 9:25 मरकुस 9:26 मरकुस 9:27 मरकुस 9:28 मरकुस 9:29 मरकुस 9:30 मरकुस 9:31 मरकुस 9:32 मरकुस 9:33 मरकुस 9:34 मरकुस 9:35 मरकुस 9:36 मरकुस 9:37 मरकुस 9:38 मरकुस 9:39 मरकुस 9:40 मरकुस 9:41 मरकुस 9:42 मरकुस 9:43 मरकुस 9:44 मरकुस 9:45 मरकुस 9:46 मरकुस 9:47 मरकुस 9:48 मरकुस 9:49 मरकुस 9:50



कथन का सीधा अर्थ
मरकुस 9:13 का यह वचन बतलाता है कि यीशु ने यह आश्वासन दिया है कि एलिय्याह आ चुका है और उनके जैसा व्यवहार उन लोगों ने किया जैसा लिखा है। यहाँ “एलिय्याह” प्रतीक है उस prophetic भूमिका का जो ईश्वर के संदेश और विश्वास के उन्नयन हेतु था। परन्तु यह भी स्पष्ट है कि वे लोग जो एलियाह के आ जाने की प्रतीक्षा में थे, उन्हीं के साथ असामान्य और कठिन व्यवहार कर बैठे—यानी उन लोगों की प्रतिक्रिया विरोधाभासी थी जो परमेश्वर की योजना को ग्रहण करना चाहते थे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ मार्क 9 में शिष्य यीशु के साथ चमत्कारिक घटनाओं के क्रम के बीच आता है। पहले एलियाह की वापसी और मोशे के साथ उनके उद्धरणों का संबंध समझाता है कि पुरानी भविष्यवाणी अब पूर्णता की ओर बढ़ रही है। यीशु ने एलियाह-सम्बंधी पूर्व-आवेदनों को इतिहास के साथ जोड़ा ताकि शिष्यों को यह स्पष्ट हो कि वे संकट के समय विश्वास के साथ खड़े रहें।
व्याख्यात्मक निष्कर्ष
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनका छोटा संक्षेप
- मत्ती 17:12-13: एलिय्याह का संदर्भ यहाँ चिह्नित करता है कि यीशु के उपस्थित होने का प्रमाण कैसे पुरानी भविष्यवाणी के सत्यापन से जुड़ा है।
- म laga 2 कुरिन्थियों 1:19-20: भविष्यवाणी की पूर्णता और ईश्वर के वचन की विश्वसनीयता के बारे में संकेत देता है।
- मदह 1 पवित्रपुराण: पुरानी व्यवस्था से नयी व्यवस्था की दिशा और परिवर्तन का संकेत देता है कि परमेश्वर के उद्देश्य समयानुसार पूरा होते हैं।
संरचना: एक नजर में
- उद्देश्य स्पष्ट: एलिय्याह की वापसी के संकेत के साथ यीशु का संदेश।
- विश्वास बनाम प्रतिक्रिया: भरोसे के साथ उपेक्षा या विरोध कैसे न हो, यह विचारणा।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम कभी-कभी ईश्वर की योजनाओं को समझ नहीं पाते, पर हमें श्रद्धा के साथ आगे बढ़ना चाहिए। कठिनाईयों के बीच भी विश्वास बनाए रखें, क्योंकि परमेश्वर की भविष्यवाणी और उनके उद्धार के काम समय के साथ साथ पूरा होते हैं।
संदर्भित उद्धरण (संछेप)
नोट: नीचे दिया गया कोई भी उद्धरण केवल उसी पंक्ति तक सीमित है जो सीधे वक्तव्य से जुड़ा हो; पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है।
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के संयुक्त सार से प्रेरित है। संक्षेप में: एलिय्याह का आना एक ऐसे क्षण का संकेत है जब परमेश्वर का उद्धार-कार्य स्पष्ट और निर्णायक रूप से दिखेगा; परन्तु मानव प्रतिक्रियाएँ कभी-कभी विरोधी हो सकती हैं और यह विश्वास-योग्य अनुभव का भाग है।