Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 9:1 मरकुस 9:2 मरकुस 9:3 मरकुस 9:4 मरकुस 9:5 मरकुस 9:6 मरकुस 9:7 मरकुस 9:8 मरकुस 9:9 मरकुस 9:10 मरकुस 9:11 मरकुस 9:12 मरकुस 9:13 मरकुस 9:14 मरकुस 9:15 मरकुस 9:16 मरकुस 9:17 मरकुस 9:18 मरकुस 9:19 मरकुस 9:20 मरकुस 9:21 मरकुस 9:22 मरकुस 9:23 मरकुस 9:24 मरकुस 9:25 मरकुस 9:26 मरकुस 9:27 मरकुस 9:28 मरकुस 9:29 मरकुस 9:30 मरकुस 9:31 मरकुस 9:32 मरकुस 9:33 मरकुस 9:34 मरकुस 9:35 मरकुस 9:36 मरकुस 9:37 मरकुस 9:38 मरकुस 9:39 मरकुस 9:40 मरकुस 9:41 मरकुस 9:42 मरकुस 9:43 मरकुस 9:44 मरकुस 9:45 मरकुस 9:46 मरकुस 9:47 मरकुस 9:48 मरकुस 9:49 मरकुस 9:50



मरकुस 9:17 का व्याख्या: गूंगी पुत्र को लेकर उन्होंने क्या देखा?
मुख्य interpretivePoint: यीशु के साथ भीड़ के बीच अभी-भी मानवीय संकट और विश्वास के तीव्र संघर्ष का दृश्य आता है— एक पिता अपने पुत्र को गूंगी आत्मा से चिट्ठी की तरह पीड़ित होते देख कर पुकारता है कि क्यों उसका रोग हल नहीं होता। इस-verses में घनिष्ठ संदेश यह है कि ईश्वर के राज्य में विश्वास की जरूरत है, और धीरज के साथ अनुरोध करने पर ही ईश्वरीय सहायता मिलती है।
साहित्यिक संदर्भ और पाठ-संदर्भ (Literary Context)
यह घटना मार्क 9:14–29 के भाग में है, जहां यीशु ने पेग्लुम-तपस्या के ठीक बाद चमत्कारिक उपदेश दिया और शिष्यों से पूछा कि उन्होंने क्यों नहींuutit किया। पिता का विवरण— “गूंगी आत्मा” जिसने पुत्र को आघात पहुँचाया— प्रायः शैतानी संकट की तीव्रता को दर्शाता है। कथा में भीड़, पिता, पुत्र और यीशु तीनों के उलझे भाव आते हैं। यह दृश्य न केवल रोग पर विजय की बात है, बल्कि पिता के विश्वास और उससे अधिक गहरे प्रश्नों की ओर संकेत करता है।
धर्मार्थ महत्व (Theological Significance)
धार्मिक पर्याप्तता यहाँ स्पष्ट है: प्रभु के सामने वास्तविक, दुर्बल, मानवीय प्रार्थना— “हे गुरु”— एक निहित आह्वान है। पुत्र की दशा में पिता का दया-भरा आग्रह, और यीशु की प्रतिक्रिया— both compassion and authoritative command — दिखाती है कि ईश्वर का राज्य दया के साथ सत्य की व्यवस्था भी है। यह भी दिखता है कि निरंतर विश्वास और अपनी सीमा को स्वीकारना ही ईश्वरीय शक्ति को पूर्ण रूप से उभरने देता है।
Cross-references (संयुक्त पवित्र शास्त्र के जोड़):
संक्षेप में, इन संदर्भों में एक बार फिर वही पाठ निकलकर आता है कि विश्वास, करुणा और प्रार्थना के साथ ईश्वर की सहायता खुलती है।
Reflection questions (विचार के लिए प्रश्न)
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस verse में एक पिता की क्षीणता और असहायता के बीच प्रभु यीशु का स्वागत, उसकी क्षमा और शक्ति— सब मिलकर एक ही संदेश देते हैं: प्रभु के पास आकर अनुग्रह प्राप्त करें, और विश्वास के साथ मदद मांगें। यह कथा हमें विश्वास के साथ, आंतरिक पीड़ा के समय भी भगवान की कृपा की उम्मीद दिलाने की प्रेरणा देती है।
मूल स्रोत उद्धरणों के लिए नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों से समाधान के भीतर उपयोगी विचारों को समेटा गया है; इनमें से निम्नाति उद्धरण सीधे नहीं लिए गए बल्कि उनकी व्याख्या से समाहित धार निकलती है।