Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 9:1 मरकुस 9:2 मरकुस 9:3 मरकुस 9:4 मरकुस 9:5 मरकुस 9:6 मरकुस 9:7 मरकुस 9:8 मरकुस 9:9 मरकुस 9:10 मरकुस 9:11 मरकुस 9:12 मरकुस 9:13 मरकुस 9:14 मरकुस 9:15 मरकुस 9:16 मरकुस 9:17 मरकुस 9:18 मरकुस 9:19 मरकुस 9:20 मरकुस 9:21 मरकुस 9:22 मरकुस 9:23 मरकुस 9:24 मरकुस 9:25 मरकुस 9:26 मरकुस 9:27 मरकुस 9:28 मरकुस 9:29 मरकुस 9:30 मरकुस 9:31 मरकुस 9:32 मरकुस 9:33 मरकुस 9:34 मरकुस 9:35 मरकुस 9:36 मरकुस 9:37 मरकुस 9:38 मरकुस 9:39 मरकुस 9:40 मरकुस 9:41 मरकुस 9:42 मरकुस 9:43 मरकुस 9:44 मरकुस 9:45 मरकुस 9:46 मरकुस 9:47 मरकुस 9:48 मरकुस 9:49 मरकुस 9:50


मरकुस 9:15 — तत्काल दृश्य और प्रतिक्रिया
पद के तत्कालContext में, यीशु पर्वत के ऊपर परिवर्तन के दृश्य के बाद नीचे उतरते ही भीड़ और चेले उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही वे उसे देखते हैं, लोग बहुत आश्चर्यचकित हो उठते हैं और कुछ दौड़कर यीशु के पास आकर उसे नमस्कार करते हैं। यह दृश्य उस समय की विशिष्ट भाव-स्थिति को दर्शाता है: यीशु के शब्दों और चमत्कारों के प्रति लोगों का सतर्क उत्साह, और उनके सामने एक प्रभु के सम्मानसूचक अभिवादन की परंपरा।
कथन से दर्ज होता है ईश्वर और विश्वास का संकेत
यह छोटा दृश्य बताता है कि यीशु पृथ्वी पर आने के बाद लोगों के बीच एक सम्मान और आध्यात्मिक सम्मान का वातावरण बनाते हैं। नमस्कार करने का gesture यह दिखाता है कि लोग एक ऐसे उद्धारकर्ता को पहचानते हैं जिसकी authority और care के साथ वे जुड़ना चाहते हैं। विश्वास का यह छोटा-सा, पर गहरा प्रदर्शन है कि लोग सचमुच इस परमेश्वर-मानव के साथ संपर्क स्थापित करना चाहते हैं, उनसे प्रेरणा ले रहे हैं, और उन पर वचन की शक्ति भरोसे के साथ निर्भर करना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
अनुसंगत पारायणियाँ (Cross-references)
यह घटना ऐसे पाठ से जुड़ती है जहाँ प्रभु की उपस्थिति और आशीर्वाद से लोगों की प्रतिक्रिया उभरती है:
इन संदर्भों में एक सामान्य पाठ है: यीशु की उपस्थिति विश्वासियों के लिए एक कारण बनती है कि वे सम्मान, आस्था और जीवन को उसकी प्रेरणा के अनुसार आकार दें।
आज के संदर्भ में अगला कदम
हम कैसे इस पल से सीख लेते हैं? पहली बात, यीशु की उपस्थिति पर त्वरित प्रतिक्रिया एक भरोसे और समर्पण की बात है—हम भी प्रतिदिन उसकी ओर नमस्कार और सम्मान के साथ आते रहें। दूसरी बात, आश्चर्य का भाव हमें यह याद दिलाता है कि प्रभु के काम कभी-कभी मानवीय कल्पना से परे होते हैं; अतः हम अपनी समझ के दायरे से बाहर आने के लिए तैयार रहें। अंत में, यह दृश्य समुदाय की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देता है: व्यक्ति-व्यक्ति में प्रेम और सम्मान से भरे vín पर ध्यान दें।
: नीचे तीन प्रतिष्ठित पवित्र-टीका-लेखक में से यदि उपलब्ध हों, तो उनके स्पष्ट शब्दों के छोटे-से उद्धरण इस पाठ के साथ संकलित होंगे: