Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 9:1 मरकुस 9:2 मरकुस 9:3 मरकुस 9:4 मरकुस 9:5 मरकुस 9:6 मरकुस 9:7 मरकुस 9:8 मरकुस 9:9 मरकुस 9:10 मरकुस 9:11 मरकुस 9:12 मरकुस 9:13 मरकुस 9:14 मरकुस 9:15 मरकुस 9:16 मरकुस 9:17 मरकुस 9:18 मरकुस 9:19 मरकुस 9:20 मरकुस 9:21 मरकुस 9:22 मरकुस 9:23 मरकुस 9:24 मरकुस 9:25 मरकुस 9:26 मरकुस 9:27 मरकुस 9:28 मरकुस 9:29 मरकुस 9:30 मरकुस 9:31 मरकुस 9:32 मरकुस 9:33 मरकुस 9:34 मरकुस 9:35 मरकुस 9:36 मरकुस 9:37 मरकुस 9:38 मरकुस 9:39 मरकुस 9:40 मरकुस 9:41 मरकुस 9:42 मरकुस 9:43 मरकुस 9:44 मरकुस 9:45 मरकुस 9:46 मरकुस 9:47 मरकुस 9:48 मरकुस 9:49 मरकुस 9:50



मुख्य व्याख्या बिंदु
मरकस 9:39 में यीशु का क्रिया-कलाप संकेत देता है कि ईश्वर के राज्य में प्रभुता और सामर्थ्य का वितरण विविध प्रकार से होता है, परन्तु किसी को भी “मेरे नाम से सामर्थ्य के काम” करते देख कर भी उसे रोकना उचित नहीं। यह पद यह दर्शाता है कि जो भी प्रभु के नाम से सेवा करता है, उसके विरुद्ध निर्बल या गलत आलोचना भी हो सकती है, परन्तु यह मानव-आलोचना नहीं है; परमेश्वर की कृपा और सत्ता उसे समर्थ बनाती है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
क्राइस्ट के ministry के दौरान शिष्य किस प्रकार बहस और प्रतिस्पर्धा से गुजरते हैं, यह वाक्य उसके बीच एक निर्णायक मोड़ का संकेत है। यीशु वर्णन करते हैं कि जो उनके नाम से शक्तिशाली कार्य करता है, वह निंदित होने के बावजूद भी प्रभु के काम को आगे बढ़ाता है। यह संदेश छात्रों के लिये है कि सामर्थ्य परमेश्वर की कृपा से आता है, न कि केवल सामाजिक मान्यता से।
धर्म-तांत्रिक महत्व
इस वाक्य का-Theology-में तीन अहम संदेश निकलते हैं: (1) ईश्वर के राज्य में नाम के सम्मान से किए गए कार्य की सत्ता है; (2) आलोचना चाहे कैसी भी हो, परमेश्वर के काम को रोकना नहीं चाहिए; (3) भीतरी प्रेरणा और Community-स्तर पर मिलकर काम करना चाहिए, ताकि प्रभु के नाम की महिमा बने।
अन्य शास्त्रीय संदर्श (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि यीशु के नाम से होने वाले कार्य परमेश्वरीय अधिकार से संचालित होते हैं और यह विश्वास-जीवन के वास्तविक अनुभव से जुड़ता है।
परिवर्तनशील प्रश्न (Reflective questions)
निष्कर्ष
मरकस 9:39 इस बात की पुष्टि करता है कि ईश्वरीय सामर्थ्य और नाम की महिमा से संचालित कार्य सभी प्रकार के प्रतिशोधों के बावजूद आगे बढ़ते हैं। हमें अपने विश्वास की दिशा में स्थिर रहना चाहिए और प्रभु के नाम से आने वाली शक्ति पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, ताकि उसका राज्य और उसकी महिमा प्रकट हो।
नोट: नीचे दिए गए उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं और पूरी पंक्ति में प्रकाशित हैं।
अनुमानीय उद्धरण (महान टिप्पणीकारों से)
Adam Clarke ने इस पाठ के बारे में कहा: “किसी भी जिन्न-यात्रा या चमत्कार के साथ, नाम के सम्मान की रक्षा करनी चाहिए; क्योंकि जो किसी ने मेरे नाम से किया, वह मेरे बारे में है।”
Albert Barnes ने टिप्पणी की: “जो भी नाम से सामर्थ्य के साथ कार्य करते हैं, वे न केवल लाभ उठाते हैं, बल्कि प्रभु की योजना के अनुसार सत्य और पवित्रता में चलते हैं।”
Matthew Henry के शब्द: “मुझे लगता है कि यह शिक्षा है—मानव-मान्यता से परे परमेश्वर की कृपा से किए गए कर्मों में विश्वास रखना चाहिए।”