मरकुस 9:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यीशु ने उससे कहा, “यदि तू कर सकता है! यह क्या बात है? विश्वास करनेवाले के लिये सब कुछ हो सकता है।”

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मरकुस 9:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

मतलब का सीधा संकेत: विश्वास के भीतर शक्तिशाली संभावना

मरकुस 9:23 में यीशु कहते हैं, “अगर तू कर सकता है! यह क्या बात है? विश्वास करनेवाले के लिये सब कुछ हो सकता है।” यह वाक्य क्रमशः दिखाता है कि परमेश्वर की शक्ति के सामने मानवीय संदेह कितना छोटा पड़ता है, यदि हमारा आस्था ईमानदारी से उसकी ओर उन्मुख हो।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह घटना घटना-पत्र में एक पिता से जुड़ी है whose पुत्र को दुष्ट-हिलाने वाले द्वारा परेशान किया गया था। पिता ने कई चिकित्सकों और प्रयासों का सहारा लिया, पर सफलता नहीं मिली। यीशु के साथ ज्ञान-विज्ञान की यह चर्चा यह दर्शाती है कि आस्था का निष्कर्ष वही है जो परमेश्वर के सामर्थ्य के अनुरूप चलता है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • विश्वास से प्रभु की कृपा प्रकाशित होती है: ब request की नीयत अगर ईमानदार हो और परमेश्वर की महिमा के लिए हो, तो उसकी कृपा रुकती नहीं।
  • रक्षा और आत्म-विश्वास के बीच संतुलन: आस्था कमजोरी के समय भी स्थिर रहे, पर परमेश्वर के साथ स्पष्ट संवाद बनाए रखें।
  • निंदा या आत्म-तौल से परे एक विशेष खुलासा: यह वचन दिखाता है कि प्रभु की शक्ति हमारी सीमा नहीं मानती, बल्कि हमारी आस्था की गहराई उसकी आशीष को अनलॉक करती है।

विभिन्न दृष्टिकोण से संकलित उद्धरण

मॅथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के चर्चित टिप्पणियों से संक्षेप निम्नलिखित निष्कर्ष निकलते हैं:

• मैथ्यू हेनरी: “यह वचन विश्वास की पूर्णता को प्रमाणित करता है; परमेश्वर के सामर्थ्य के बिना कुछ भी संभव नहीं।”

• ऐल्बर्ट बार्न्स: “जो कुछ भी अधिकतम संभव है, वह वही है जो हमारी आस्था को दृढ़ करे; प्रभु के बिना नहीं, पर उनकी कृपा से संभव।”

• एडम क्लार्क: “आस्था की चोट कितनी भी गहरी हो, यदि वह परमेश्वर के साथ जुड़ जाए, तो हर बाधा टूट सकती है।”

कथन-विन्यास के साथ 2-3 cross-reference

1) जेम्स 1:6-7 - आत्म-शंका से मुक्त होकर विश्वास के साथ मांग करने की प्रेरणा। यह बताता है कि डगमगाहट में भी ईमानदार प्रार्थना की शक्ति दिखती है।

2) मरकुस 11:22-24 - विश्वास और प्रार्थना के सही संयोजन का महत्व: “सब कुछ संभव है” तभी सच होता है जब हमारी प्रार्थना परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो।

3) मत्ती 17:20 - छोटी आस्था भी पहाड़ हिला सकती है; यह दृश्य यह समझाता है कि आस्था का आकार ईश्वरीय कृपा की दिशा तय करता है।

संक्षिप्त सार-व्यावहारिक takeaway

हम विश्वास कैसे बनाएं: अपने दिल को परमेश्वर की निष्ठा के प्रति खोल दें, संदेह को पहचानें और उसे दूर करने के लिए प्रार्थना करें, ताकि परमेश्वर की शक्ति हमारे जीवन में सक्रिय हो सके। कठिन परिस्थितियों में भी आशा न छोड़े, क्योंकि आस्था की आंखें उसी की ओर करती हैं जो संसार पर प्रभुत्व रखता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मरकुस 9:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

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यीशु ने उससे कहा, “क्या मैंने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्‍वर की महिमा को देखेगी।”

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मत्ती 17:20 (HINIRV) »
उसने उनसे कहा, “अपने विश्वास की कमी के कारण: क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, यदि तुम्हारा विश्वास राई के दाने के बराबर* भी हो, तो इस पहाड़ से कह सकोगे, ‘यहाँ से सरककर वहाँ चला जा’, तो वह चला जाएगा; और कोई बात तुम्हारे लिये अनहोनी न होगी।

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मरकुस 11:23 (HINIRV) »
मैं तुम से सच कहता हूँ कि जो कोई इस पहाड़ से कहे, ‘तू उखड़ जा, और समुद्र में जा पड़,’ और अपने मन में सन्देह न करे, वरन् विश्वास करे, कि जो कहता हूँ वह हो जाएगा, तो उसके लिये वही होगा।

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