Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मरकुस 9:1 मरकुस 9:2 मरकुस 9:3 मरकुस 9:4 मरकुस 9:5 मरकुस 9:6 मरकुस 9:7 मरकुस 9:8 मरकुस 9:9 मरकुस 9:10 मरकुस 9:11 मरकुस 9:12 मरकुस 9:13 मरकुस 9:14 मरकुस 9:15 मरकुस 9:16 मरकुस 9:17 मरकुस 9:18 मरकुस 9:19 मरकुस 9:20 मरकुस 9:21 मरकुस 9:22 मरकुस 9:23 मरकुस 9:24 मरकुस 9:25 मरकुस 9:26 मरकुस 9:27 मरकुस 9:28 मरकुस 9:29 मरकुस 9:30 मरकुस 9:31 मरकुस 9:32 मरकुस 9:33 मरकुस 9:34 मरकुस 9:35 मरकुस 9:36 मरकुस 9:37 मरकुस 9:38 मरकुस 9:39 मरकुस 9:40 मरकुस 9:41 मरकुस 9:42 मरकुस 9:43 मरकुस 9:44 मरकुस 9:45 मरकुस 9:46 मरकुस 9:47 मरकुस 9:48 मरकुस 9:49 मरकुस 9:50



मरकुस 9:26 – तुरंत पाठ का संदर्भ और अर्थ
इस पद में यीशु के यहाँ एक मरे हुए बालक को जीवन बंदन से पुनर्जीवित करने का चमत्कार描ित है। गुरुता के क्षण में युवक की शारीरिक अवस्था अत्यंत अस्थिर थी; चिल्लाहट, मरोड़, और अंत में पूर्ण शांत अवस्था—सब कुछ एक साथ घटित होते दिखता है। शास्त्री इसे भी मानते हैं कि ईश्वरीय शक्तियों के सामने शैतानी या बीमारी का असर क्षणभर में समाप्त हो जाता है; फिर भी शिष्यत्व और आस्था की परीक्षा भी उभरकर सामने आती है।
क्या दिखाता है पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में
यह वाक्य परमेश्वर की सत्ता की स्पष्ट घोषणा है: जीवन और मृत्यु दोनों ऊपर वाले के हाथ हैं। बालक के जीवित न होने की स्थिति में भी यीशु की आवाज़ और स्पर्श से जीवन फूट पड़ता है, जो विश्वास की शक्ति को उजागर करता है—विशेषकर तब जब प्रार्थना के साथ समुदाय उसकी मदद के लिए एकता में खड़ा होता है। साथ ही यह सच्चे विश्वास की कसौटी भी बनता है—क्योंकि पिता ने विश्वास और सहायता दोनों की मांग की: “मेरे असली विश्वास को बढ़ा दे; मेरी कमी को दूर कर दे।”
महत्त्वपूर्ण शब्दों और चित्रों का स्पष्टीकरण
संबद्ध मार्गदर्शक छंद
यह घटना पश्चात कई अन्य क्रियाओं के अनुरूप है जहाँ यीशु ने आत्मिक-शारीरिक रोगों को दूर किया। उदाहरण के लिए:
पाठ के साथ यथार्थता से जुड़ी cross-references इस प्रकार समझी जा सकती हैं: प्रेरितों के कर्म 3 में चमत्कार का उद्घोष, मरकुस के उपदेशों में विश्वास की आवश्यकता, और लूका 8 के दुष्टात्माओं के विरुद्ध प्रभु की सत्ता। इन संदर्भों में एक बात सामान्य है—धर्म की शक्तियों पर विश्वास और प्रार्थना की सामुदायिक शक्ति।
आज के भक्त के लिए अप्लीकेशन
मृत्यु और जीवन की सीमा पर एक संयुक्त पाठ
यह घटना Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रकाश में एक साथ समझी जा सकती है: विश्वास के सक्रिय हाथ में प्रभु की अगुवाई के साथ सीमाओं का टूटना संभव है। स्पष्ट उद्धरण सूत्र:
“तय हो गया”—यानी प्रभु की सत्ता की घोषणा साफ है; “ईश्वर की कृपा से ही जीवन लौट सकता है।” (उद्धरण संकेत केवल संकेत के रूप में; पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।)
—उत्पत्ति से लेकर प्रेरितों के समय तक विश्वास की यही धारा जीवित रहती है: संकट के समय भी ईश्वर के पास जीवन है, और हमारी प्रार्थना उसे प्रकट करती है।