Old Testament
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मीका 5:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और वे अश्शूर के देश को वरन् प्रवेश के स्थानों तक निम्रोद के देश को तलवार चलाकर मार लेंगे; और जब अश्शूरी लोग हमारे देश में आएँ, और उसकी सीमा के भीतर पाँव रखें, तब वही पुरुष हमको उनसे बचाएगा।
मीका 5:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मीका 5:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 14:25 (HINIRV) »
कि मैं अश्शूर को अपने ही देश में तोड़ दूँगा, और अपने पहाड़ों पर उसे कुचल डालूँगा; तब उसका जूआ उनकी गर्दनों पर से और उसका बोझ उनके कंधों पर से उतर जाएगा।”

2 राजाओं 19:32 (HINIRV) »
“इसलिए यहोवा अश्शूर के राजा के विषय में यह कहता है कि वह इस नगर में प्रवेश करने, वरन् इस पर एक तीर भी मारने न पाएगा, और न वह ढाल लेकर इसके सामने आने, या इसके विरुद्ध दमदमा बनाने पाएगा।

मीका 5:6 — तत्कालीन संदर्भ और व्याख्या
इस पद को मीका की पुस्तक के अंतर्गत नबी-युग की दृष्टि से समझना उपयोगी है। यह उद्धारक-उद्धार की आशा के साथ एक राष्ट्रीय-पौराणिक संघर्ष की पृष्ठभूमि देता है: अश्शूर के आक्रमण के खतरे के समय यह वादा है कि परमेश्वर अपनी कृपा से परमस्त्रोत सुरक्षा प्रदान करेगा और इजराइल के सीमांतों की रक्षा करेगा। पाठ स्वरूप बताता है कि परमेश्वर के हस्तक्षेप से युद्धविहीन शांतिपूर्ण स्थिति संभव हो सकता है, यदि उनका विश्वास और भक्तिपूर्णता बनी रहे।
गद्य में तत्काल सेटिंग
पंक्ति में कहा गया है कि “वे अश्शूर के देश को वरन् प्रवेश के स्थानों तक निम्रोद के देश को तलवार चलाकर मार लेंगे…” इसका मतलब है कि प्रत्यक्ष सैन्य संघर्ष के समय भी ईश्वर अपने लोगों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करेगा, चाहे प्रत्यक्ष आक्रमण कहाँ तक फैला हो। यह एक दैवीय प्रेरणा है कि अश्शूर की शक्तिशाली सेना के विरुद्ध भी प्रभु की सुरक्षा प्रभावी रहेगी, जब उनके देश में पड़ाव बनेंगे।
भगवान और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाले संकेत
- भरोसा और रक्षा: यह पद स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने प्रजा को दुश्मनों के समय भी सुरक्षा देता है। विश्वास उसी पर निर्भर रहता है जो प्रभु के कथन के अनुसार उनकी सहायता पाने की आशा रखता है।
- दैवीय नियंत्रण: शास्त्रार्थ में कहा गया है कि कटु युद्ध के दिनों में भी ईश्वर यह दिखाते हैं कि वे इतिहास के प्रत्येक क्षण के प्रभु हैं और उनकी योजना पूरी होगी।
महत्वपूर्ण शब्द-चित्र और अर्थ
सम्बद्ध पद और उनके संकेत
1) यूहन्ना की पुस्तकों के समान अवसरों पर, परमेश्वर के उद्धार के लिए विश्वास का निरंतर होना दिखता है।
2) अन्य बाइबिल संदर्भों में विश्वास-आश्रय के बारे में विविध उदाहरण मिलते हैं कि परमेश्वर किस प्रकार संकट-काल में सहायता करता है (उद्धार की आशा)।
वर्तमान में जीवन पर अनुप्रयोग
- डर के समय भी परमेश्वर की रक्षा की आशा बनाए रखें। अगर परिस्थिति कितनी भी कठोर हो, विश्वास के साथ प्रार्थना करें और परमेश्वर के प्रस्तावित संरक्षण पर निर्भर रहें।
- समाजिक या सामुदायिक कठिनाइयों में शांति और सुरक्षा की मांग में, हम भी ईश्वर की दिशा-निर्देशों पर टिके रहें; शब्द में निहित आशा हमें मजबूती देती है कि ईश्वर हमारा सच्चा रक्षक है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप वर्णन)
- अन्य स्थानों पर जो विश्वास के रक्षा के सिद्धांत को पुष्ट करते हैं, वे बताते हैं कि संकट के समय परमेश्वर सहायता करता है; (संकेत-उद्धरण में पूर्ण पाठ नहीं दिया गया है)।
- उद्धार और सुरक्षा के विषय में पुराने नियम के अन्य भागों से संकेत मिलते हैं कि परमेश्वर अपने निवासियों को सुरक्षित रखता है।
इस अध्याय के मुख्य संदेश का सार यह है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की सहायता और रक्षा संभव है, बशर्ते उनका विश्वास और प्रार्थना सक्रिय रहे।
नोट: इस टिप्पणी में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संयुक्त उद्धरणों के लिए स्पष्ट शब्द-चिह्न दिए गए हैं यदि उपलब्ध हों; यहाँ संकल्पनात्मक एकीकृत विश्लेषण उनके मौलिक प्रवचन शैली के अनुरूप है।