Old Testament
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मीका 5:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण वह उनको उस समय तक त्यागे रहेगा, जब तक जच्चा उत्पन्न न करे; तब इस्राएलियों के पास उसके बचे हुए भाई लौटकर उनसे मिल जाएँगे।
मीका 5:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 5:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रकाशितवाक्य 12:1 (HINIRV) »
फिर स्वर्ग पर एक बड़ा चिन्ह* दिखाई दिया, अर्थात् एक स्त्री जो सूर्य ओढ़े हुए थी, और चाँद उसके पाँवों तले था, और उसके सिर पर बारह तारों का मुकुट था;

मीका 4:7 (HINIRV) »
और लँगड़ों को मैं बचा रखूँगा, और दूर किए हुओं को एक सामर्थी जाति कर दूँगा; और यहोवा उन पर सिय्योन पर्वत के ऊपर से सदा राज्य करता रहेगा।

होशे 11:8 (HINIRV) »
हे एप्रैम, मैं तुझे क्यों छोड़ दूँ? हे इस्राएल, मैं कैसे तुझे शत्रु के वश में कर दूँ? मैं कैसे तुझे अदमा के समान छोड़ दूँ, और सबोयीम के समान कर दूँ? मेरा हृदय तो उलट पुलट हो गया, मेरा मन स्नेह के मारे पिघल गया है।
मीका 5:3 का सरल अर्थ
इस पद का सार यह है: परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक लोक-नेतृत्व की प्रतीक्षा को शुरू करते हैं, जब तक कि प्रभुसार्ती पुत्र का जन्म नहीं हो जाता; तब यह्राइल के बचे हुए भाइयों के साथ मिलकर भगवान की उद्धार-योजना पूरी होगी।
पृष्ठभूमि संक्षेप
मीका भविष्य-वाणी के समय इजराईल और वहू के बीच संघर्ष, अन्य देशों की दखल और धर्म-परिवर्तन का उल्लेख करती है। मीका 5 के शुरुआती भाग में बैतलेहम-यीशु से जुड़ी आशा दी गई है—घरेलू नीतियों में चक्रव्यूह-सा एक उद्धारक-व्यक्ति आने वाला है। इसverse में उस उद्धार के क्रमबद्ध रूप को देखते हैं: जब तक जन्म का समय नहीं आता, तब तक यहूदा के विपक्षी ढांचे में कमजोरियाँ बनी रहेंगी, परन्तु अंततः लौटकर बचे हुए समूह एक साथ आएंगे।
व्याख्यात्मक बिंदु
मुख्य थीम
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त व्याख्या)
यावकाश 1: मिसाल के तौर पर सन्निकटन-उद्धार की-promises आम तौर पर परमेश्वर के समय पर पूरी होती हैं; यह संकेत देता है कि कठिन समय के बीच भी विश्वास रखना चाहिए।
यावकाश 2: अन्य भविष्यवाणियाँ जो एकजुट होने और उद्धार की आशा के बारे में कहती हैं; इसका आशय यह है कि आन्तरिक परिवर्तन के साथ समुदाय का पुनर्निर्माण होता है।
यावकाश 3: नर-भ्रमण के समय में भी निष्ठा बनाए रखने वाले लोग अन्ततः देश-उद्धार के हिस्सेदार बनते हैं।
संक्षेपित व्यावहारिक शिक्षा
िस वचन से हमें यह निर्देश मिलता है कि कठिन समय में धैर्य रखें, भरोसा रखें कि परमेश्वर का समय सही है, और समुदाय के पुनर्संयोजन के लिए पहल करें। हमें नित्य-जीवन में एक-दूसरे के साथ जुड़कर एकता बनाए रखनी चाहिए, भले ही स्थितियाँ विपरीत क्यों न हों।
सूत्र-नोट्स
यह टिप्पणी अन्य प्रसिद्ध पवित्र-ग्रंथ-हस्तलिपियों के विचारों के साथ समन्वयित है जिन्हें सार्वजनिक डोमेन में माना गया है, ताकि पाठक को इतिहास और भक्ति-प्रवाह दोनों की दृष्टि मिल सके।