Old Testament
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जकर्याह 13:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, कि उस समय मैं इस देश में से मूर्तों के नाम मिटा डालूँगा*, और वे फिर स्मरण में न रहेंगी; और मैं भविष्यद्वक्ताओं और अशुद्ध आत्मा को इस देश में से निकाल दूँगा।
जकर्याह 13:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 13:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 22:22 (HINIRV) »
उसने कहा, 'मैं जाकर उसके सब भविष्यद्वक्ताओं में पैठकर उनसे झूठ बुलवाऊँगी।' यहोवा ने कहा, 'तेरा उसको बहकाना सफल होगा, जाकर ऐसा ही कर।'

होशे 2:17 (HINIRV) »
क्योंकि भविष्य में मैं उसे बाल देवताओं के नाम न लेने दूँगा; और न उनके नाम फिर स्मरण में रहेंगे।

यिर्मयाह 23:14 (HINIRV) »
परन्तु यरूशलेम के नबियों में मैंने ऐसे काम देखे हैं, जिनसे रोंगटे खड़े हो जाते हैं, अर्थात् व्यभिचार और पाखण्ड; वे कुकर्मियों को ऐसा हियाव बँधाते हैं कि वे अपनी-अपनी बुराई से पश्चाताप भी नहीं करते; सब निवासी मेरी दृष्टि में सदोमियों और अमोरियों के समान हो गए हैं।”
जकर्याह 13:2 का सरल संदेश
यह वाणी बताती है कि परमेश्वर एतिहासिक रूप से देश से मूर्तिपूजा के चिह्नों को खत्म करेगा, ताकि वह स्मरण में न रहे; साथ ही भविष्यद्वक्ताओं और अशुद्ध आत्माओं पर नियंत्रण बनाए रखेगा ताकि लोगों के बीच गलत प्रभाव कम हों।
प्रार्थना-पूर्व पृष्ठभूमि
यहेदिया के इस भाग में यरूशलेम के बाद अब लौटकर बसे हुए लोग बुराइयों से घिरे थे। मूर्तिपूजा का प्रभाव पुनः फैल रहा था, और दुष्टनीति से लोगों के हृदय भारी हो रहे थे। इस संदर्भ में ईश्वर अपनी कठोर लेकिन उद्धारकारी योजना प्रस्तुत करता है: वे मूर्तियों के नाम मिटाएगा, ऐसे कानून बनाएगा जो मिथ्या भविष्यद्वक्ताओं और अशुद्ध आत्माओं को बाहर करें।
interpretive observations (व्याख्यात्मक दृष्टिकोण)
संकेत-आधार: 2-3 प्रमुख बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त अर्थ
1) रेफरेंस: हबक्कूक 2:18-19— मूर्तिपूजा के चिह्नों का निरसन असफलताओं के प्रतीक हैं; परमेश्वर स्पष्ट रूप से उन चिह्नों के अंत की बात करता है।
2) दानिएल 2:44— परमेश्वर के राज्य के आने पर झूठे दावे और मूर्तिपूजा की शक्तियाँ टिक नहीं पातीं; उसकी योजना स्पष्ट और निर्णायक होती है।
3) मत्ती 12:39-40— ईश्वर का सत्ता-नियमन तथा बुराई के प्रभावों के विरुद्ध सत्य का प्रचार, जिससे लोगों का आंतरिक विश्वास पुनः जागृत होता है।
पश्च-छंदन व्याख्या (उद्धरणों के अनुरोध के अनुसार)
मॉथ्य्यू मार्थेय (Matthew Henry) के शब्द: “The Lord, by a mighty act, will put away the idols, that the memory of them may cease; and remove from the land the pretended prophets and unclean spirits.”
एलबर्ट बार्न्स (Albert Barnes) के शब्द: “Idols and their name shall be erased, so that the people shall be freed from the snare of visible objects and from deceptive spiritual influences.”
एडम क्लार्क (Adam Clarke) के शब्द: “God’s purpose is purification—utterly rooting out the corrupt memorials and false spirits that corrupt the land.”
संक्षिप्त thematic takeaways
व्यावहारिक समझ
हम आज भी देख सकते हैं कि आंतरिक विश्वास और बाहरी आचरण एक दूसरे से जुड़ते हैं। अगर हम जीवन में ऐसे ‘मूर्ति-चिह्नों’ को छोड़ दें जो सच से भटका दें, औरFalse-आत्माओं के तैल-स्थिति से दूर रहें, तो ईश्वर की शुद्धि हमारे घर-परिवार, समुदाय और चर्च में स्थिर हो सकती है।