Old Testament
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जकर्याह 5:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, मैं उसको ऐसा चलाऊँगा कि वह चोर के घर में और मेरे नाम की झूठी शपथ खानेवाले के घर में घुसकर ठहरेगा, और उसको लकड़ी और पत्थरों समेत नष्ट कर देगा।”
जकर्याह 5:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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जकर्याह 5:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 14:34 (HINIRV) »
“जब तुम लोग कनान देश में पहुँचो, जिसे मैं तुम्हारी निज भूमि होने के लिये तुम्हें देता हूँ, उस समय यदि मैं कोढ़ की व्याधि तुम्हारे अधिकार के किसी घर में दिखाऊँ,

हबक्कूक 2:9 (HINIRV) »
हाय उस पर, जो अपने घर के लिये अन्याय के लाभ का लोभी है ताकि वह अपना घोंसला ऊँचे स्थान में बनाकर विपत्ति से बचे।

जकरयाह 5:4 — सेटिंग और संदर्भ
यह वचन सैनिक-युग के दायरे में है, जहाँ यहोवा अपने सिंहासन के पास से संदेश भेजता है और ईश्वर-न्याय के कार्यों को क्रियान्वित करने का संकल्प व्यक्त करता है। यह वाक्य एक विशिष्ट दुष्कर्म-निष्पत्ति की चेतावनी देता है: चोरी और झूठी शपथ के घरों को चिह्नित कर करकट किया जाएगा ताकि ध्वंस द्वारा पाप का परिणाम स्पष्ट हो सके।
ईश्वर के चरित्र और विश्वास का प्रकाश
वचन में एक कठोर, पर सत्यापित न्यायात्मा ईश्वर को प्रकट करता है जो पाप के परिणाम को नियंत्रित और खुला करता है। वह चोरी और झूठ की शपथ को गंभीर मानता है और उन घरों को नष्ट करने की चेतावनी देता है जहाँ ऐसी अवैध गतिविधियाँ पनपती हैं। वहीं एक बहुपयोगी संदेश भी रहता है: पाप की निष्ठा और पूर्वजन्म के कर्मों का उत्तरदायित्व ईश्वर के सामने उजागर होता है और वे उचित दंड के साथ सुधार की राह दिखाते हैं।
संयुक्त शब्दावलियाँ और चित्र
यह वचन दो प्रमुख चित्र प्रस्तुत करता है: चोर के घर और झूठी शपथ खाने वाले का घर। चोर का घर दर्शाता है पाप का प्रवेश और चोरी की गतिविधियाँ—परन्तु यह स्पष्ट कर देता है कि भगवान पाप की हर गुंजाइश को पकड़ लेते हैं। झूठी शपथ खाने वाला घर ईमानदारी के विरोधी आचरण पर कठोर दंड का संकेत है। लकड़ी और पत्थर जैसी सामग्री के साथ नष्ट होना पथ-भ्रष्ट के समस्त बनावट को संकेतित करता है कि पाप की संरचना कितनी गहरी है और उसका समूल विनाश आवश्यक है।
संदर्भ से निकलने वाले प्रमुख शब्द
अन्य प्रचलित टिप्पणियाँ: प्रकाशन-योग्य विचार
यह संदेश यह दर्शाता है कि परमेश्वर का न्याय पाप की गहरी जड़ को पहचानता है और उसके विरुद्ध निर्णायक कदम उठाता है। पाप के परिणाम स्वयं में एक क्लेश है, और ईश्वर चाहते हैं कि लोगों में सत्य और प्रामाणिकता लौटे।
क्रॉस-रेफरेंसेस (पूर्वक उल्लेखित सन्दर्भ)
1) युद्ध और न्याय के संदर्भों में यहोवा की क्रिया का स्मरण: कुछ पाठों में पाप के विरुद्ध कठोर कदम का वर्णन मिलता है, जिसे समाज के लिए चेतावनी के रूप में देखा गया है।
2) सत्य और ईमानदारी की महत्ता पर बल देने वाले आयत: झूठ और गलतबयानी से दूर रहने की शिक्षा कई अन्य स्थानों पर भी मिलती है; असत्य की स्थितियाँ समाज में भ्रष्टाचार को बढ़ाती हैं और ईश्वर के पास जवाबदेही बनती है।
3) दंड बनाम सुधार का मॉडल: पाप के विरुद्ध दंड के साथ सुधार भी प्रभु की इच्छा का भाग है ताकि अवसर मिले पुनः सच्चे विश्वास और नैतिक जीवन की ओर बढ़ने के लिए।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
हम अपने दैनिक जीवन में देख सकते हैं कि चोरी और झूठी शपथ जैसी प्रवृत्तियाँ समाज और विश्वास-समुदाय में नाश लाती हैं। यह वचन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर प्रामाणिकता और सत्यनिष्ठा का सम्मान करते हैं और पाप के स्रोतों को पहचान कर उन्हें दूर करना चाहिए। व्यक्तिगत जीवन में सत्य की प्रतिबद्धता, वादों का पालन और दूसरों के साथ निष्छल व्यवहार बनाए रखना प्रेरक हो सकता है।
संक्षिप्त समेकन
हमें परमेश्वर के न्याय की गहराई को समझना चाहिए और अपने घरों, व्यवहारों, वचनों में सत्य और नैतिकता के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए। पाप के विनाश में उसके करुणा के साथ सुधार के रास्ते भी खुलते हैं, ताकि जीवन में ईश्वर के नाम की महिमा बनी रहे।