1 शमूएल 27:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

पलिश्तियों के देश में रहते-रहते दाऊद को एक वर्ष चार महीने बीत गए।

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1 शमूएल 27:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

पलिश्तियों के देश में दाऊद का प्रवास: 1 शमूएल 27:7 का संदर्भ

immediate setting: इस आयत में यह दर्शाया गया है कि दाऊद काफी समय तक पलिश्तियों के क्षेत्र में रहा, लगभग एक वर्ष चार महीने बिताकर लौटे नहीं। यह घटनाक्रम आश्चर्यजनक है क्योंकि दाऊद पूर्व में इस जातीय समूह के विरुद्ध युद्ध के लिए जाना-आना माना गया था; अब वह उनके देश में शरण लेने को विवश है। यह बताती है कि परमेश्वर के वचन में भी कभी-कभी विश्वासियों को असुरक्षित पलों में मार्ग दिखाने के लिए स्थितियाँ बदलनी पड़ती हैं।

यही पाठ ईश्वर और आस्था के बारे में क्या बताता है

यह पंक्ति विश्वास के अभ्यास की कभी-कभी असलियत को खोलती है: दाऊद ने पलिश्तियों के देश में रहने के दौरान ईश्वर की सुरक्षा और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाए रखा। भगवान ने उसकी रक्षा की और उसे खतरे में डाले बिना एक चालाक योजना के तहत जीवनयापन दिया। यह याद दिलाती है कि विश्वासी के लिए भरोसा केवल जोखिम-रहित स्थितियाँ नहीं होतीं, बल्कि संकट के समय भी ईश्वर की योजना के अनुरूप चलना होता है।

शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

– पलिश्तियों के देश: एक बाहरी संदर्भ जिसमें दाऊद का समय था। यह स्थान उसे प्रत्यक्ष खतरे में भी नहीं बल्कि सुरक्षित शरण के रूप में मिला, ताकि वह भविष्य की योजना बना सके।

क्रॉस-रेफरेंसेस (Cross-references)

  • श्रेष्ठ वचन के समय: विश्वास के कठिन क्षणों में परमेश्वर की देखरेख से सहारा मिलना—यहेह का मार्गदर्शन (उद्धृत नहीं किया गया पाठ)।
  • भरोसे के परीक्षण: क्यों परमेश्वर कभी-कभी ऐसी परिस्थितियाँ देता है जो हमारी सुरक्षा और उद्देश्य के बीच संतुलन बनाए? यह दाऊद के समय के समान एक प्रकार है।
  • यहोवा के साथ वफादारी: शरण लेने के बावजूद, विश्वासी को अपने दायित्व और ईश्वर की प्रेरणा के अनुसार अग्रसर होना चाहिए।

इसी पाठ के साथ सम्बन्धित विचारधारा

1 शमूएल 27 के संदर्भ में एडम क्लार्क, अ‍ॅल्बर्ट बार्न्स और मैथ्यू हेन्री के(public-domain) विचारों से समाहित संकल्पनाएँ इस प्रकार हैं: दाऊद ने एक असुरक्षित पड़ाव के बावजूद परमेश्वर की योजनाओं पर भरोसा रखा। वर्गीकृत उद्धरण दिए जाते हैं जहाँ उपलब्ध हों:

“पलिश्तियों के देश में रहने तक दाऊद को सुरक्षा मिली”—(उद्धृत: मैथ्यू हेन्री) नीचे दी गई सामान्य धारणा के अनुसार, विश्वासी के लिए खतरे के समय भी ईश्वर के साथ निकटता बनी रहती है।

“ईश्वर की योजना में विश्वास ही सुरक्षा है”—(उद्धृत: Ալբերտ Բարնս) यह विचार इस बात पर बल देता है कि कठिन परिस्थितियाँ भी ईश्वर की ओर संकेत करती हैं कि वह हमें सही दिशा में ले जा रहा है।

पाठ-से-जीवन अनुवर्तन (Present-day application)

  • जीवन के संकट-काल में विश्वास का टिकाऊपन: चाहे परिस्थितियाँ भयावह ही क्यों न हों, परमेश्वर की योजना में स्थिर रहने की प्रेरणा दें।
  • विश्वास के साथ विवेक: दाऊद ने चालाकी और भरोसे के बीच संतुलन बनाकर जीवनयापन किया; आज भी हमें विवेकपूर्ण निर्णय लेने चाहिए जब अस्थिरता से गुजरना हो।
  • विश्वास की सुरक्षा में प्रार्थना: संकट के दौरान प्रार्थना और परमेश्वर की दिशा-निर्देश प्राप्त करना पथ-प्रदर्शक हो सकता है।

समाप्ति में, यह आयत यह बताती है कि परमेश्वर के विश्वासी के साथ उसकी योजना में कभी-कभी जोखिम भरे रास्ते भी आते हैं, पर इन राहों में भी ईश्वर की रक्षा और मार्गदर्शन बना रहता है। इसके पाठ से प्रेरणा मिलती है कि धैर्य और भरोसे के साथ कठिन समय में भी प्रभु के साथ निष्ठा बनाए रखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 27:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब पलिश्ती हाकिमों ने पूछा, “इन इब्रियों का यहाँ क्या काम है?” आकीश ने पलिश्ती सरदारों से कहा, “क्या वह इस्राएल के राजा शाऊल का कर्मचारी दाऊद नहीं है, जो क्या जाने कितने दिनों से वरन् वर्षों से मेरे साथ रहता है, और जब से वह भाग आया, तब से आज तक मैंने उसमें कोई दोष नहीं पाया।”

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