Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31

क्यों यह verse महत्वपूर्ण है
1 शमूएल 27:4 में घटना दर्शाती है कि दाऊद ने शाऊल से बचने के लिये एक ऐसी चाल चली, जो उसके भविष्य के विश्वास और नेतृत्व के मार्ग पर गहरी असर डालती है। यह verse यह दिखाता है कि किस प्रकार भय, धक्का और परिस्थितियाँ व्यक्ति के निर्णयों को प्रभावित करती हैं, और कैसे एक राजा के खतरे की स्थिति में दाऊद अस्थिर रास्ते चुनता है ताकि उसने अपने जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह पाठ हमें प्रस्तुत करता है कि परमेश्वर की योजना के अनुसार सही समय और साधनों की आवश्यकता होती है, पर पाप या स्वार्थ से प्रेरित तात्कालिक बचाव कैसे दीर्घकालीन परिणाम दे सकता है।
पारम्परिक संदर्भ और मूल संदेश
यह आयात दर्शाता है कि दाऊद, शाऊल के प्रलोभन और पीछा से बचने के लिए फिलिस्तीनी नगरों की ओर भाग गया और वहाँ उसने आशयपूर्वक सुरक्षा के लिये गलतबयानी नहीं की, बल्कि निवृत्त होकर वहाँ शासन से दूर रहा। मूल सन्देश यहाँ यह है कि भय की परिस्थितियों में भी ईमानदारी और परमेश्वर की योजना के प्रति विश्वासी रहना कठिन पर अनिवार्य है। शाऊल को यह समाचार मिलने पर दाऊद ढूँढ़ने से रोक दिया गया, पर यह भी संकेत है कि शाऊल का न्यायिक पीछा अब उसे खुद नुकसान पहुँचा सकता है—भगवान का कार्य उसे सीधे प्रभाव डाल सकता है।
मुख्य विचार
पवित्रशास्त्रीय thèmes और संगति
इस verse में भय, पालना और परमेश्वर की योजना के साथ मानव प्रकृति की मिश्रित प्रतिक्रिया मिलती है। यह कथा दाऊद के चरित्र के विकास को भी प्रकट करती है—यद्यपि वह अक्सर आकाश की योजना के अनुरूप जुड़ा दिखता है, फिर भी कभी-कभी तीव्र दबाव में विवेक के साथ निर्णय के बजाय तत्काल सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। इससे हमें याद दिलाया जाता है कि परमेश्वर की प्रेरित योजनाओं के अनुरूप चलना ही जीवन की सही दिशा है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
इन संदर्भों में दिखता है कि भय के बीच विश्वासी का दृढ़ विश्वास और परमेश्वर की योजना के अनुरूप चलना—यही सत्य मार्ग है, भले ही तत्काल सुरक्षा कदम अधिक आकर्षक लगें।
देवotional reflection
हम में से प्रत्येक कभी-कभी भय से प्रेरित होकर तात्कालिक समाधान खोजते हैं। पर जैसा कि दाऊद ने किया, हमें अपने निर्णयों की जाँच परमेश्वर की प्रेरणा से करनी चाहिए। वास्तविक शांति तभी मिलती है जब हम अपनी सुरक्षा के साधनों को परमेश्वर की योजना के अधीन कर दें। याद रखें: भय के समय भी ईमानदारी, विवेक और प्रार्थना के साथ क़दम उठाने से परमेश्वर की सुरक्षा और मार्गदर्शक उपस्थिती बनी रहती है।
कथन संक्षेप: यह verse यह दिखाता है कि भय के बावजूद भावी योजनाओं के लिए परमेश्वर की इच्छा सर्वोपरि है; हमें अपनी सुरक्षा के लिए लिये गए निर्णयों पर आत्म-निरीक्षण करना चाहिए और सत्य पर टिकना चाहिए।