1 शमूएल 9:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

शाऊल के आने से एक दिन पहले यहोवा ने शमूएल को यह चिता रखा था,

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1 शमूएल 9:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 शमूएल 9:15 (HINIRV) पर संक्षिप्त व्याख्या

इस verse में यह बताता गया है कि शमोएल जब आज किस दिन पहला दिन होता है, उससे एक दिन पहले यहोवा ने शमूएल को एक संकेत दिया था—शाऊल के विषय में—ताकि वह शाऊल को खोजने और उसकी कहानी शुरू होने में मार्गदर्शन करें। यह दृश्य यह दर्शाता है कि परमेश्वर इतिहास के पाठ को पहले से जानता है और वह अपने उद्देश्य के अनुरूप घटनाओं को नियोजित करता है, भले ही मनुष्यों को वह सब कुछ स्पष्ट न हो।

मुख्य अर्थ

यह वचन यह संकेत देता है कि शाऊल के भविष्य के राजकीय आर्कषण की पृष्ठभूमि पहले से स्थापित थी। यह यह भी दर्शाता है कि परमेश्वर शमूएल के धर्मी नेतृत्व और नजात-कार्य के लिए मार्ग प्रशस्त करता है, ताकि शाऊल के चयन के समय परमात्मा के उद्देश्य प्रकट हो सकें।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वर की ली जाने वाली तैयारी: परमेश्वर घटनाओं को पहले से नियोजित करते हैं ताकि उनका उद्देश्य संतुष्ट हो सके।
  • पार्थिव रूप से अनिर्णय दिखाने के बजाय आस्था की मांग: शमूएल उस समय के अदृश्य संकेतों को मानकर आगे बढ़ते हैं।
  • राजकीय चिरस्थायित्व और मिस्र-नहीं: शाऊल के चयन के पीछे एक दिव्य योजना है, जो आगे चलकर इस्राइल के इतिहास को आकार देती है।

लेखक-स्तर के संकेत और क्रॉस-रेफरेंसे

यहाँ शमूएल की भूमिका एक का-एक संकेतक के रूप में उभरती है—ईश्वर के संदेशवाहक के रूप में। कुछ समान ढंग के विचार अन्य स्थानों में मिलते हैं जहाँ प्रभु प्रकट होने से पहले तैयारी दिखाते हैं (उदा. दाऊद के चयन से पहले समान संकेत, या भविष्य में उद्धार के कार्यक्रम की पूर्व-सहयोगी तैयारी)।

क्रॉस-रेफरेंसे

यद्यपि यह पाठ छोटा है, पर निम्नलिखित संदर्भों से सामंजस्य स्पष्ट होता है:

  • शमूएल 9:16 — परमेश्वर यह बताने को कहते हैं कि शाऊल किस प्रकार इस्राइल का पहला राजकुमार बनेंगे।
  • शमूएल 10:1 — शाऊल को नामित कर उसका अभिषेक किया जाना स्पष्ट होता है।
  • शमूएल 12:22-24 — यहूदियों के लिए ईश्वर के निर्देशन और नेतृत्व की महत्ता पर जोर देता है, ताकि विश्वास और समर्पण बना रहे।

व्यावहारिक विचार

हमारे लिए यह कथा एक प्रेरणा है कि परमेश्वर के कार्य समय पर और एक निश्चित योजना के अनुसार पूर्ण होते हैं। कभी-कभी हमें प्रतीक्षा करनी पड़ती है या संकेतों को देखना होता है। विश्वास का मार्ग यह है कि हम ईश्वर के संकेतों पर ध्यान दें, स्पष्ट न हो तो भी उनकी योजना पर भरोसा रखें और अपने भाग्य के लिए तैयार रहें।

संक्षिप्त समापन

इस अंश के अनुसार यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर अपने उद्देश्य के अनुसार घटनाओं को पहले से स्थापित करते हैं। शमूएल और शाऊल की जोड़ी इस प्रेषण की पहली कदमों को निखारती है, ताकि इस्राइल के इतिहास का एक निर्णायक मोड़ शुरू हो सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 शमूएल 9:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 शमूएल 15:1 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 15:1 (HINIRV) »
शमूएल ने शाऊल से कहा, “यहोवा ने अपनी प्रजा इस्राएल पर राज्य करने के लिये तेरा अभिषेक करने को मुझे भेजा था; इसलिए अब यहोवा की बातें सुन ले।

प्रेरितों के काम 13:21 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 13:21 (HINIRV) »
उसके बाद उन्होंने एक राजा माँगा; तब परमेश्‍वर ने चालीस वर्ष के लिये बिन्यामीन के गोत्र में से एक मनुष्य अर्थात् कीश के पुत्र शाऊल को उन पर राजा ठहराया। (1 शमू. 8:5,1 शमू. 8:19,1 शमू. 10:20-21, 1 शमू. 10:24, 1 शमू. 11:15)

1 शमूएल 20:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 शमूएल 20:2 (HINIRV) »
उसने उससे कहा, “ऐसी बात नहीं है; तू मारा न जाएगा। सुन, मेरा पिता मुझ को बिना बताए न तो कोई बड़ा काम करता है और न कोई छोटा; फिर वह ऐसी बात को मुझसे क्यों छिपाएगा? ऐसी कोई बात नहीं है।”

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