Old Testament
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2 शमूएल 4:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर जब दुष्ट मनुष्यों ने एक निर्दोष मनुष्य को उसी के घर में, वरन् उसकी चारपाई ही पर घात किया, तो मैं अब अवश्य ही उसके खून का बदला तुम से लूँगा, और तुम्हें धरती पर से नष्ट कर डालूँगा।”
2 शमूएल 4:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 4:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 9:12 (HINIRV) »
क्योंकि खून का पलटा लेनेवाला उनको स्मरण करता है; वह पिसे हुओं की दुहाई को नहीं भूलता।

उत्पत्ति 9:5 (HINIRV) »
और निश्चय मैं तुम्हारा लहू अर्थात् प्राण का बदला लूँगा: सब पशुओं, और मनुष्यों, दोनों से मैं उसे लूँगा; मनुष्य के प्राण का बदला मैं एक-एक के भाई बन्धु से लूँगा।

उत्पत्ति 7:23 (HINIRV) »
और क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगनेवाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, जो-जो भूमि पर थे, सब पृथ्वी पर से मिट गए; केवल नूह, और जितने उसके संग जहाज में थे, वे ही बच गए।
शामयिक अर्थ: निर्दोष खून का बदला लेना
यह पद अब्यक्षद रूप से कहता है कि दुष्ट मनुष्य किसी निर्दोष पर दबदबा नहीं चलाते; उसका खून जो कानून के बाहर किया गया हो, परमेश्वर के अनुसार अंकित रहता है और समय आने पर न्याय होगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
2 शमूएल की किताब में सभ्यता के सत्ता-संधि-विवाद के दौरान का यह सन्निकट क्षण है, जब इश्वरीय न्याय के प्रतिमान और सामाजिक-नैतिकता पर प्रश्न उठते हैं। यह उद्धरण दुष्टों के अविश्वास और निर्दोष के प्रति क्रूर आचरण के विरुद्ध संकेत करता है कि परमेश्वर खून के बदले लेने में बिलकुल नहीं चूकते। इस प्रसंग में राजा दाऊद के परिवार और उनके विरोधी समूहों के राजनीतिज्ञ मुद्दों को भी जोड़ा गया है, पर मूल संदेश सभी जगह एक ही रहता है: निर्दोष का खून व्यर्थ नहीं जाता।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- निर्दोष व्यक्ति = वह व्यक्ति जो किसी अपराध या दोष के कारण नहीं पहचाना गया है, बल्कि यहाँ दुष्टों के आचरण के विरुद्ध एक साधारण, निष्पक्ष जीवन जी रहा है।
- घर में घात = वह साहसिक, पराक्रमी और कुरुप घातक कार्य जो अपमान और अन्याय को आमंत्रित करता है; यह समाज के भीतर असुरक्षा और न्याय की कमी को दिखाता है।
- “मैं अब अवश्य ही उसके खून का बदला तुम से लूँगा” = परमेश्वर की न्याय-चेतना; यह बताता है कि भलाई पर पलटवार नहीं देखा जाएगा और दोषी कर्मों के परिणाम अवश्य होंगे, चाहे समय कितना ही लग जाए।
चर्चित विचार
अनुदेशात्मक क्रॉस-रेफरेंसेस
1) उद्धार के लिए क्रूरता के विरुद्ध परमेश्वर की धारणा स्पष्ट है; यह संदेश अन्य दावों में भी उभरता है जब निर्दोष का मामला सामने आता है।
2) न्याय के सिद्धांत के संदर्भ में, किसी भी समाज का टिके रहना तभी संभव है जब अपराधी को समय पर दंड मिले और निर्दोष सुरक्षित रहे।
3) परिवार और घर के सामाजिक सुरक्षा के बारे में पवित्र लेखन एक समान संदेश देता है कि सुरक्षा और सचेतना के साथ कानून-संरचना आवश्यक है।
संक्षेपित उपदेश
यह पद हमें याद दिलाता है कि निर्दोष का खून संरक्षित नहीं होता, क्योंकि परमेश्वर न्याय के दर्पण में हर क्रिया स्पष्ट रूप से उद्घाटित हो जाती है। दुष्टता चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो, परमेश्वर के दरबार में उसका समय अवश्य आता है।
टॉपिक-लघु सूची
संबद्ध संदर्भ
2 शमूएल 3–4 के घटनाक्रमों में सत्ता और प्रतिशोध की कहानी चलती है; अन्य उद्धरण जहां निर्दोष का संरक्षण और अपराधियों के दंड का विचार आता है, वे पुराने नियम के न्याय-सार को प्रतिध्वनित करते हैं, जैसे कि न्याय की समय-सारिणी पर निर्भरता।
निष्कर्ष में, इस पाठ से सीख मिलता है कि सामाजिक न्याय और सुरक्षा के लिए निष्पक्ष नियमों की आवश्यकता है, ताकि निर्दोष को सुरक्षा मिले और दुष्ट को उनके कर्मों के परिणाम भुगतने पड़े।
उद्धृत टिप्पणियाँ: यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke की प्रत्यक्ष उद्धरणों के संदर्भ देखते हैं, तो वे सामान्य तौर पर न्याय, निर्दोषता और परमेश्वर के निर्णयों के बारे में समान भाव रखते हैं, परन्तु यहाँ किसी भी पूर्ण उद्धरण का पाठ नहीं दिया गया है।