Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 4:2 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 4:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
शाऊल के पुत्र के दो जन थे जो दलों के प्रधान थे; एक का नाम बानाह, और दूसरे का नाम रेकाब था, ये दोनों बेरोतवासी बिन्यामीनी रिम्मोन के पुत्र थे, (क्योंकि बेरोत भी बिन्यामीन के भाग में गिना जाता है;
2 शमूएल 4:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 4:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यहोशू 9:17 (HINIRV) »
तब इस्राएली कूच करके तीसरे दिन उनके नगरों को जिनके नाम गिबोन, कपीरा, बेरोत, और किर्यत्यारीम है पहुँच गए,

2 शमूएल 3:22 (HINIRV) »
तब दाऊद के कई जन और योआब समेत कहीं चढ़ाई करके बहुत सी लूट लिये हुए आ गए। अब्नेर दाऊद के पास हेब्रोन में न था, क्योंकि उसने उसको विदा कर दिया था, और वह कुशल से चला गया था।

स्पष्ट अर्थ का उद्घोष
2 शमूएल 4:2 में कहा गया है कि शाऊल के पुत्र के दो जन थे—बानाह और रेकाब—जो दलों के प्रधान थे और बेरोतवासी विन्यामीनी रिम्मोन के पुत्र थे। इसका मतलब है कि ये दोनों लड़ाके और प्रशासनिक पद पर रहे रहते थे, तथा बेरोत शहर भी विन्यामीन के हिस्से में गिना जाता था।
संघर्ष-परिप्रेक्ष्य और पृष्ठभूमि
यह पद 1 और 2 शमूएल kitab के कथा-समय के हालात को दर्शाता है, जब इजराइल के सातवाहन और राजनैतिक ढांचे में बदलाव चल रहा था। बेरोत-फिलेस्ती के क्षेत्र का उल्लेख यह संकेत करता है कि दक्षिणी क्षेत्रीय समूहों के आंतरिक कनेक्शन और हिस्सेदारी कैसी थी। शाऊल के पुत्र होने के नाते बानाह और रेकाब को एक विशिष्ट सामाजिक-राजनैतिक भूमिका मिली, जो उनके परिवारिक बंधन के साथ-साथ सैन्य-नेतृत्व के दायित्वों को भी दर्शाती है।
विश्लेषणात्मक बिंदु
संदर्भवान विचार
यह वाक्यांश यह संकेत देता है कि शाऊल के शासनकाल के उत्तरार्ध में इजराइल की सैन्य-सरकारें स्थानीय प्रमुखों की भूमिका से संचालित थीं। यह भी साफ नहीं कि वे केवल बेरोत में रहते थे या उनके क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे, परन्तु उनका परिचय चारित्रिक-राजनीतिक स्थिति को उभारता है।
प्रत्यक्ष उद्धरण (केवल उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से)
Matthew Henry और Adam Clarke जैसे कॉपी-रेखा-युक्त टिप्पणियों में इस प्रकार की भूमिकाओं के बारे में संक्षिप्त टिप्पणी मिलती है कि राजसी परिवार के सदस्य होने के कारण वे जनता के बीच विशेष सम्मान पाते थे और युद्ध-नियन्त्रण में प्रभावी थे। (नोट: नीचे दी गई लाइनें सीधे पाठ से उद्धृत नहीं हैं, बल्कि इन टिप्पणीकारों के विचारों के संकेत हैं।)
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) 1 शमूएल 14:1-3 — सैनिक-नेतृत्व के लिए रानियों/पुत्रों के उभरते नामों का संकेत; यह बताता है कि सैनिक-नेतृत्व कभी-कभी राजकीय परिवार से जुड़ते हैं।
2) 2 शमूएल 3:12-16 — उत्तराधिकार और परिवार-आधारित गठबंधन का राजनीतिक परिदृश्य; मेल-जोल और संघर्ष के बीच सत्ता-संरचना का चित्रण।
3) 4 शमूएल 2:22-23 — युद्ध-नैतिकता और नेतृत्व के दायित्व पर विचार; सत्ता के दुरुपयोग के जोखिम।
संक्षिप्त निष्कर्ष एवं अनुपम takeaway
इस verse का संकेत राजसी-वेदना के साथ-साथ क्षेत्रीय-जनपद की संरचना पर प्रकाश डालता है। बानाह और रेकाब जैसे नेता यह दर्शाते हैं कि युद्ध-निर्देशन और प्रशासनिक भूमिका रिश्तों से जुड़ी होती है, और क्षेत्रीय पहचान भी सामाजिक-आर्थिक नेटवर्क को प्रभावित करती है। विश्वास के संदर्भ में, प्रभु के लोग अक्सर किसी भी राजनीतिक-शक्ति के प्रयोग में नैतिकता और धर्म-सम्माँचन को प्राथमिकता दें, ताकि समुदाय में न्याय और सुरक्षा बनी रहे।