Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 4:3 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 4:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और बेरोती लोग गित्तैम को भाग गए, और आज के दिन तक वहीं परदेशी होकर रहते हैं।)
2 शमूएल 4:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 4:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 शमूएल 31:7 (HINIRV) »
यह देखकर कि इस्राएली पुरुष भाग गए, और शाऊल और उसके पुत्र मर गए, उस तराई की दूसरी ओर वाले और यरदन के पार रहनेवाले भी इस्राएली मनुष्य अपने-अपने नगरों को छोड़कर भाग गए; और पलिश्ती आकर उनमें रहने लगे।

मुख्य व्याख्या संकेत (मुख्य बिंदु)
2 शमूएल 4:3 में बेरोती लोगों का भागना और गित्तैम में पनाह लेना एक सामाजिक-राजनीतिक संकट दर्शाता है। इस verse में अनुभव होता है कि जब सत्ता परिवर्तन या रीति-रिवाजों में उथल-पुथल होती है, तो समाज के कमजोर वर्ग सुरक्षित स्थानों की तलाश में अचानक移動 करते हैं। यह पंक्ति यह संकेत करती है कि शाही शासन के समय भी आंतरिक भू-राजनैतिक तनाव से लोग विस्थापित रहते हैं, और गित्तैम जैसे शहर “प्राण-स्थल” बन जाते हैं जहां वर्षों तक स्थायित्व नहीं रहता।
लिटरेरी संदर्भ के अनुसार व्याख्या
यहां "गित्तैम" एक विशिष्ट शहर है जिसे बेरोती लोग गतिशील रूप से छोड़कर भागे, किन्तु “आज के दिन तक वहीं परदेशी होकर रहते हैं” से स्पष्ट है कि उन्होंने अभी भी अपनी पहचान बनाए रखी है परस्थ-आवास में। यह वर्णन पुराने कथा-उद्गमों के अनुसार मित्र-घात या सत्ता-डर से जुड़ा हो सकता है; शब्द-चयन से यह संकेत मिलता है कि शांतीपूर्ण निवासस्थल भी जल्दी असुरक्षित बन जाते हैं।
धार्मिक-गठनात्मक महत्त्व
यह अनुभाग किसी भी नीति-निर्माण या समुदाय-स्थायित्व की दिशा में एक शिक्षा देता है: स्थिरता बाहरी सत्ता के स्थायित्व पर नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वास और समुदाय-संरचना पर निर्भर करती है। बेरोती लोगों की पनाहगिरी यह दर्शाती है कि समाजिक सुरक्षा सीमित है और आश्रयों की उपलब्धता समय-समय पर बदलती रहती है।
व्याख्या के लिए跨-वेदांत सम्बन्ध (Cross-References)
संक्षेप में, यह संदर्भ हमें यह सिखाता है कि समय के साथ सुरक्षा और आश्रय के स्रोत बदलते रहते हैं, पर समुदाय की पहचान और विश्वास नहीं टूटनी चाहिए।
जीवंत विचार–Reflection के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस वाक्य का संदेश है कि बाहरी परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी परिवर्तनशील हों, आस्थागत समुदाय और विश्वास की जड़ें स्थिर होनी चाहिए। बेरोती लोगों की गित्तैम-आवासीय स्थिति से सीख मिलती है कि सुरक्षा एक सतत खोज है—ना कि एक एकल स्थान पर ठहरना।
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