Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 4:9 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 4:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दाऊद ने बेरोती रिम्मोन के पुत्र रेकाब और उसके भाई बानाह को उत्तर देकर उनसे कहा, “यहोवा जो मेरे प्राण को सब विपत्तियों से छुड़ाता आया है, उसके जीवन की शपथ,
2 शमूएल 4:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 4:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 48:16 (HINIRV) »
और वही दूत मुझे सारी बुराई से छुड़ाता आया है, वही अब इन लड़कों को आशीष दे; और ये मेरे और मेरे बापदादे अब्राहम और इसहाक के कहलाएँ; और पृथ्वी में बहुतायत से बढ़ें।” (इब्रा. 11:21)

भजन संहिता 107:2 (HINIRV) »
यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने शत्रु के हाथ से दाम देकर छुड़ा लिया है,

मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
2 शमूएल 4:9 में दाऊद ने बेरोती रिम्मोन के पुत्र रेकाब और उसके भाई बानाह को उत्तर देते समय यह विश्वासपूर्ण आश्वासन व्यक्त किया कि यह व्यक्ति नहीं, बल्कि यहोवा है जो उसे विपत्तियों से बचाता आया है। उसका शपथ यह बताती है कि दाऊद के दुखी समय में भी परमेश्वर के संरक्षण का विश्वास उनसे बना रहा; जो उनके जीवन की सभी कठिनाईयों के बीच आश्रय रहा है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कंटेक्स्ट)
यह उद्धरण दाऊद की प्रतिक्रिया है जब उसने दो शत्रु भाईयों से खबर सुनी कि वे उनसे गुस्सा हैं और दाऊद के परिवार के विरुद्ध प्रतिशोध की योजना बनाते हैं। दाऊद यहाँ यह स्पष्ट कर रहे हैं कि Yahweh ही वह अनन्य कृपालु है जो उनके प्राणों को विपत्तियों से छुड़ाता आया है; यह एक प्रकार का बयान है कि उसकी सत्ता और सुरक्षा परमेश्वर के भरोसे पर टिकी है।
धार्मिक महत्व (थियोलॉजिकल significance)
- परमेश्वर के संरक्षण पर भरोसा बनाये रखना: दाऊद ने अपने दिल में अनुभव किया कि निर्भय रहने हेतु परमेश्वर की शपथ और उसकी योजना ही निर्णायक है।
- स्वयं की सुरक्षा से आगे, परमेश्वर की पवित्र वचनी व्यवस्था पर टिके रहना: यहोवा की शपथ पर टिके रहना एक विश्वासयोग्य जीवन की निशानी है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (cross-references) और उनके संक्षिप्त अर्थ
इन क्रॉस-रेफरंसेस से पता चलता है कि दाऊद का यह वचन परमेश्वर के निरंतर संरक्षण और विश्वासयोग्यता के कारण है, न कि अपनी शक्ति पर निर्भर होकर।
विचारशल्क प्रश्न (reflection prompts)
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस पद में दाऊद स्पष्ट करते हैं कि उनकी रक्षा का आधार परमेश्वर की कृपा और उसकी शपथ है। चाहे जीवन में कितने भी खतरे क्यों न हों, एक विश्वासी व्यक्ति परमेश्वर के इरादों और उसकी सुरक्षा पर पूर्ण भरोसा रखता है। यह प्रेरणा हमें भी सिखाती है कि विपत्तियों के समय अपनी सुरक्षा के लिए मानव सम्मुख उपायों के साथ-साथ परमेश्वर की वचनशक्ति को प्राथमिकता दें।
ऐतिहासिक-आख्यानिक संदर्भ (public-domain insights)
इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य-ज्ञात प्रकाशन से प्रेरणा मिलती है कि विश्वासपूर्ण जीवन परमेश्वर के साथ सम्बन्ध को गहिराता है और विपत्तियों में भी शांति देता है।
यहाँ के प्रमुख बिंदु के रूप में उनके विचारों का संक्षेप सार: Henry बताते हैं कि परमेश्वर की सुरक्षा पर निर्भरता से ही जीवन-शक्ति मिलती है; Barnes कहते हैं कि विश्वास के शपथ पर टिके रहना जोखिमों के बीच भी धैर्य प्रदान करता है; Clarke ने यह स्पष्ट किया कि परमेश्वर की योजनाओं में हमारी सुरक्षा रहती है, भले ही परिस्थितियाँ विपरीत क्यों न हों।