Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 शमूएल 4:6 बाइबल पद की व्याख्या
2 शमूएल 4:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और गेहूँ ले जाने के बहाने घर में घुस गए; और उसके पेट में मारा; तब रेकाब और उसका भाई बानाह भाग निकले।
2 शमूएल 4:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 शमूएल 4:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 शमूएल 2:23 (HINIRV) »
तो भी उसने हट जाने को मना किया; तब अब्नेर ने अपने भाले की पिछाड़ी उसके पेट में ऐसे मारी, कि भाला आर-पार होकर पीछे निकला; और वह वहीं गिरके मर गया। जितने लोग उस स्थान पर आए जहाँ असाहेल गिरके मर गया, वहाँ वे सब खड़े रहे।

2 शमूएल 3:27 (HINIRV) »
जब अब्नेर हेब्रोन को लौट आया, तब योआब उससे एकान्त में बातें करने के लिये उसको फाटक के भीतर अलग ले गया, और वहाँ अपने भाई असाहेल के खून के बदले में उसके पेट में ऐसा मारा कि वह मर गया।

2 शमूएल 20:10 (HINIRV) »
परन्तु अमासा ने उस तलवार की कुछ चिन्ता न की जो योआब के हाथ में थी; और उसने उसे अमासा के पेट में भोंक दी, जिससे उसकी अन्तड़ियाँ निकलकर धरती पर गिर पड़ीं, और उसने उसको दूसरी बार न मारा; और वह मर गया। तब योआब और उसका भाई अबीशै बिक्री के पुत्र शेबा का पीछा करने को चले।
2 शमूएल 4:6 — संदर्भ का तात्पर्य और समझ
तत्काल चित्रण इस पद में गैबियन की हत्या के क्षण के ठीक पहले का दृश्य उभरता है। डेविड के विभाजन के समय सत्ता-युद्ध के बीच, शमन की हत्या के घोर पाप की घटना घटती है। रेकाब और बानाह, जो अब भीके तौर पर अंधेरे के साथ चलते हैं, ने अवसर का लाभ उठाकर एक सामान्य घर में प्रवेश किया, ताकि गेहूं छीना जा सके; परन्तु उनके कदम से जीवन का एक नया मोड़ आ गया और एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या हो गई।
ईश्वर पर विश्वासी दृष्टिकोण और विश्वास की शिक्षा
यह पाठ यह बताता है कि ईश्वर की योजना के सामने शत्रु-यत्नों के बावजूद भी क्रम-विकास और न्याय की व्यवस्था प्रबल रहती है। ईश्वर के संदर्भ में, यह घटना हमें स्मरण कराती है कि दुष्कर परिस्थितियों में भी ईश्वर न्याय करता है और अविश्वासी कृत्यों के परिणाम व्यवस्था में आते हैं। साथ ही, यह संकेत देता है कि शक्ति-योजना में धैर्य और नैतिकता बनाए रखना परमेश्वर के साथ विश्वास रखने का भाग है, न कि सत्ता-लोलुपता या अन्यायपूर्ण कर्मों के लिए रास्ता ढूंढ़ना।
महत्वपूर्ण शब्द और छवि का स्पष्टीकरण
अन्य पाठ के साथ संबंध
यह कथा राजा और उनके कर्मचारियों के भीतर की नीति-निष्ठा तथा कानून-व्यवस्था के उल्लंघन की ओर इशारा करती है। अन्य उद्धरण जो इस विषय से जुड़ते हैं:
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
1) नैतिक परीक्षणों के बीच भी ईमानदारी बनाए रखें। यह घटना दिखाती है कि गलत उपायों से सफलता मिलने की संतुष्टि दीर्घकालिक शांति नहीं देती।
2) शक्ति और सत्ता के अवसरों पर सावधानी रखें। दबाव और अवसर दोनों बुरे कामों को जन्म दे सकते हैं; सत्य और न्याय के मार्ग पर चलना ही सही राह है।
3) दोष-सिद्धांत को समझें: अपराध के बाद भागना या माफी मांगना पर्याप्त नहीं होता; परिणाम भुगतना ही पड़ता है, ताकि समाज में न्याय बना रहे।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनसे जुड़ी लघु व्याख्या
1) 2 शमूएल 3:1-3 — न्याय और राज्य-व्यवस्था की संवर्धना में ईश्वर की दिशा; पिता-राजाओं के अधिकारी पूर्ति के लिए किस प्रकार आशीष और चेतावनी देता है।
2) 2 शमूएल 3:9-10 — ईश्वर की क़ानून-प्रणाली में सत्ता-व्यवस्था के मार्गदर्शन की पुष्टि; अन्याय के विरुद्ध व्यक्तियों का दमन नहीं, बल्कि सत्य की प्रतिष्ठा।
3) नीति-साहित्यों से जुड़ा उदाहरण: न्याय की प्रक्रिया के संदर्भ में यह दिखाता है कि अपराध कैसे समाज की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है और नैतिक जिम्मेदारी किस प्रकार निभानी चाहिए।
सार-सारांश
इस पवित्र कथा में दिखता है कि अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष में ईश्वर की व्यवस्था और न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखना आवश्यक है। रेकाब और बानाह के भागने के बजाय सत्य के साथ जवाबदेही लेने की नीति ही समाज में शांति और सुरक्षा को बढ़ाती है। इस दृश्य से आज भी यह सीख मिलती है कि नैतिक सीमाओं का उल्लंघन किसी भी हालत में उचित नहीं होता, और हर कर्म के परिणाम पर विचार करना चाहिए।
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