Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 19:13 पर मुख्य अर्थ
इस सन्दर्भ में कहा गया आदेश स्पष्ट करता है कि पर्वत पर परमेश्वर के उपस्थिति के समय, सांसारिक प्रभुवर्गियों के बीच पवित्रता और सम्मान का उच्च मानक है। जो भी उसे अछूएं से छुए या नुकसान पहुँचाने का प्रयास करेगा, वह गंभीर परिणाम के अधीन होगा।
संदर्भ पृष्ठभूमि
यह भाग तब है जबiate (महाशब्द) का स्वर सुनकर इस्राएल के लोग पर्वत के पास आते हैं और परमेश्वर के दिव्य प्रकाश और धमक से वे घबराते हैं। यह घटना कुल मिलाकर परमेश्वर के स्वर्गीय अधिकार, पवित्रता और मनुष्य के लिए आचार-संहिता की गहरी चेतावनी का प्रतीक है—कि परमेश्वर के साथ स्पर्श, सम्मान, और भक्तिपूर्ण दूरी के नियम बनते हैं।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
2-3 उपयोगी क्रॉस-रेफरंसेज और उनका संक्षेप
शास्त्रीय मत-भूमिका (संक्षेप)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलनों में बारम्बार यह विचार मिलता है कि परमेश्वर के पवित्र अस्तित्व के सामने मानव को विनम्रता और भय से प्रस्तुत होना चाहिए। किसी भी प्रकार की अनुग्रह-घुसपैठ से बचना, निष्ठा के साथ आभ्यंतरित रहने का संकेत है।
संक्षिप्त निष्कर्ष/प्रयोग
परमेश्वर के साथ संपर्क के समय हमारी आस्था, भक्ति और शुद्ध विवेक आवश्यक हैं। दूरी बनाए रखना, अन्यथा न हो सके, तो भी मन में श्रद्धा बनाए रखना, हमारा धर्मिक जीवन मजबूत बनाता है।
सम्बन्धित संदर्भ