Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 19:1 निर्गमन 19:2 निर्गमन 19:3 निर्गमन 19:4 निर्गमन 19:5 निर्गमन 19:6 निर्गमन 19:7 निर्गमन 19:8 निर्गमन 19:9 निर्गमन 19:10 निर्गमन 19:11 निर्गमन 19:12 निर्गमन 19:13 निर्गमन 19:14 निर्गमन 19:15 निर्गमन 19:16 निर्गमन 19:17 निर्गमन 19:18 निर्गमन 19:19 निर्गमन 19:20 निर्गमन 19:21 निर्गमन 19:22 निर्गमन 19:23 निर्गमन 19:24 निर्गमन 19:25

पठनीय संदर्भ और तत्कालीन परिपाटी
निर्गमन 19:14 में मूसा का पर्वत से उतरकर लोगों को पवित्र कराना और उनके वस्त्र धोने का वर्णन मिलता है। यह घटना उस महत्त्वपूर्ण दिवस से पहले होती है जब इस्राइल पर यहोवा का दीदार और प्रतिज्ञाएँ प्रकट होने वाली हैं। उस समय लोगों को शुद्ध होने के संकेत स्वरूप बाह्य क्रियाएँ—धोना और पवित्र वेश धारण करना—करने का आदेश मिला ताकि वे पवित्र पर्वत पर परमेश्वर के समीप आने के योग्य हों।
इस पद से परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या प्रकट होता है
यह वचन बताता है कि परमेश्वर के सम्मुख आने के लिए तैयारी आवश्यक है। शुद्धि का आग्रह न केवल बाह्य शिष्टाचार है, बल्कि वह आंतरिक संकल्प का प्रतीक भी है—लोगों को अपने आप को अलग कर, पाप और अशुद्धि से दूर रहकर दिव्य रहस्य के आगे प्रस्तुत होना था। यह दिखाता है कि ईश्वर पवित्र है और उसके साथ संबंध स्थापित करने के लिए मानव को परिवर्तन व तैयारी की आवश्यकता है।
महत्वपूर्ण शब्द और चिन्ह
पवित्र करना—यह केवल अंग-प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोक-समुदाय की दृढ़ संयम और आज्ञापालन की तैयारी है। वस्त्र धोना—धोए हुए वस्त्र का संकेत ताज़गी, नए आरम्भ और पाप से अलगाव का है। पर्वत पर चढ़ना-उतरना ईश्वर के सम्मुख आए जाने में अग्रसरता और लौटकर सामान्य जीवन में वापसी दोनों का प्रतीक है।
संबंधित पद और उनका संक्षिप्त सम्बन्ध
इतिहासवादी टिप्पणी-रसिद्ध विचार
अल्बर्ट बार्न्स के विचारों के अनुरूप, बाह्य शुद्धि के अनुष्ठान समुदाय को यह स्मरण कराते हैं कि पृथकता और आज्ञा पालन परमेश्वर के समीप आने के साधन हैं। मैथ्यू हेनरी का संक्षेप यह इंगित करता है कि परमेश्वर के दर्शन के लिए मन और जीवन की शुद्धि आवश्यक है; एक उद्धरण संक्षेप में: "परमेश्वर के समीप आने के लिये हमें अपनी आत्मा को पवित्र रखने का जीवित परिहार करना होगा।" (मैथ्यू हेनरी) आदम क्लार्क ने भी इस पाठ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों की बाह्य तैयारी आन्तरिक संकल्प का बाहरी प्रतिबिम्ब है।
आधुनिक जीवन में अनुप्रयोग
आज भी परमेश्वर के साथ सामर्थ्यपूर्ण संबंध के लिये तैयारी आवश्यक है। यह तैयारी किसी अनुष्ठान तक सीमित न होकर हृदय की निर्मलता, पाप से तौबा, और ईश्वर की आज्ञा के प्रति समर्पण में होती है। निम्नलिखित व्यवहार व्यावहारिक रूप से उपयोगी हैं:
संक्षेप
निर्गमन 19:14 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के समीप जाना सचेत तैयारी मांगता है—यह बाह्य अनुष्ठानों के साथ आंतरिक परिवर्तन का भी संकेत है। पुराने नियम की पवित्रता-प्रक्रियाएँ आज भी हमें यह सिखाती हैं कि ईश्वर के सान्निध्य में विवेक, शुद्धि और समर्पण का स्थान अटल है।