Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 30:1 निर्गमन 30:2 निर्गमन 30:3 निर्गमन 30:4 निर्गमन 30:5 निर्गमन 30:6 निर्गमन 30:7 निर्गमन 30:8 निर्गमन 30:9 निर्गमन 30:10 निर्गमन 30:11 निर्गमन 30:12 निर्गमन 30:13 निर्गमन 30:14 निर्गमन 30:15 निर्गमन 30:16 निर्गमन 30:17 निर्गमन 30:18 निर्गमन 30:19 निर्गमन 30:20 निर्गमन 30:21 निर्गमन 30:22 निर्गमन 30:23 निर्गमन 30:24 निर्गमन 30:25 निर्गमन 30:26 निर्गमन 30:27 निर्गमन 30:28 निर्गमन 30:29 निर्गमन 30:30 निर्गमन 30:31 निर्गमन 30:32 निर्गमन 30:33 निर्गमन 30:34 निर्गमन 30:35 निर्गमन 30:36 निर्गमन 30:37 निर्गमन 30:38



निर्गमन 30:8 का अर्थ सरल शब्दों में
यह Verse बताता है कि शाम के समय मूर्तिपूजक पथ से हटकर ईश्वर की सेवा में, देवदर्शनों की रोशनी के साथ, दीप प्रज्वलित रहते हैं ताकि यहोवा की उपस्थिति प्रातः-परिवार में स्थिर रहे। इस धूप को पीढ़ी-पीढ़ी नित्य जलाने का आदेश यहूदियों के लिए एक स्थिर स्मारक और परमेश्वर के साथ निर्भरता की प्रतिमा है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
निर्गमन 30 अध्याय में, ईश्वर ने सलोमणि के मंदिर से पहले, मोशे को एक पवित्र अस्थाई मंदिर (मीशर) के लिए आहुति-योजना दी। इस धूप से सीधी जुड़ी एक दिनचर्या है जो मंदिर-जीवन का केंद्रीय हिस्सा बनती है। शाम के समय दीपक जलाने का क्रम यह दर्शाता है कि दिन के काम समाप्त होते ही भी परमेश्वर का प्रकाश और सावधानी बनी रहे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
सूत्रनिष्ठ संबद्ध विचार
यह धूप-आहुति की व्यवस्था, हनन के अंदरूनी स्वरूप से जुड़ी है—यद्यपि अलग समय पर, परन्तु मोक्ष-यात्रा के लिए एक जुड़ाव बनाती है।
क्रॉस-रिफरेन्स (संक्षेप में)
1) भजन 141:2—प्रार्थना की आहुति दीपक की रोशनी के समान दर्शाने का संकेत देती है; 2) प्रवेश 30:7-8—दीपक-आराधना का मंदिरीय क्रम; 3) हबक 9:1-2—समय-समय पर आराधना और उपस्थित रहना एक समुदाय की विशेषता है।
इन संदर्भों में संकेत है कि परमेश्वर के समीप आस्थावान क्रिया-कलाप और एक स्पष्ट दिनचर्या समुदाय की बनावट को मजबूत बनाती है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
मैथ्यू हेनरी, आोज़ब Barnes, एडम क्लार्क से संक्षेप उद्धरण
यद्यपि यह उद्धरण पूर्ण पाठ नहीं हैं, परन्तु उनकी सर्वसम्मत धारणा इस बात की पुष्टि करती है कि यह धूप-उत्पादन एक स्थिरता है जो परमेश्वर के सामने विश्वास-जीवन को बनाती है—Heena Henry, Barnes, तथा Clarke के टिप्पणियों में इसे कृप्यावधान और आराधना-स्थिरता के रूप में वर्णित किया गया है (सारांश)।
पंक्तिगत अनुप्रयोग
आज के पाठ में यह सीख स्पष्ट है: अपने जीवन के हर दिन के अंत में आत्म-विश्लेषण करें, आशाओं को परमेश्वर के प्रकाश के अधीन रखें, और समुदायिक रीति-रिवाजों को जीते रहें ताकि भविष्य की पीढ़ियाँ भी प्रभु की रोशनी से जलती रहें।