Old Testament
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होशे 14:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
बातें सीखकर और यहोवा की ओर लौटकर, उससे कह, “सब अधर्म दूर कर; अनुग्रह से हमको ग्रहण कर; तब हम धन्यवाद रूपी बलि चढ़ाएँगे। (इब्रा 13:15)
होशे 14:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 14:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 13:15 (HINIRV) »
इसलिए हम उसके द्वारा स्तुतिरूपी बलिदान*, अर्थात् उन होंठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्वर के लिये सर्वदा चढ़ाया करें। (भज. 50:14, भज. 50:23, होशे 14:2)

2 शमूएल 24:10 (HINIRV) »
प्रजा की गणना करने के बाद दाऊद का मन व्याकुल हुआ। अतः दाऊद ने यहोवा से कहा, “यह काम जो मैंने किया वह महापाप है। तो अब, हे यहोवा, अपने दास का अधर्म दूर कर; क्योंकि मुझसे बड़ी मूर्खता हुई है।”

2 शमूएल 12:13 (HINIRV) »
तब दाऊद ने नातान से कहा, “मैंने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।” नातान ने दाऊद से कहा, “यहोवा ने तेरे पाप को दूर किया है; तू न मरेगा*।
होशे 14:2 — तुरंत संदर्भ और हाल-चाल का आह्वान
यहोवा के प्रति वापसी का पुकार होशे के पुराण संदेशों का केंद्र है। यहाँ वाक्य आता है कि लोग बातें सीखकर और उसेो की ओर लौटें; उनसे कहें कि सभी अधर्म दूर कर दें, फिर अनुग्रह के साथ ग्रहण हो और धन्यवाद का बलि चढ़ाएँ। यह इब्रा 13:15 के अनुरूप एक व्यवहारिक पुनर्संयोजन दर्शाता है: आस्था के साथ व्यवहार और आत्म-त्याग के साथ परमेश्वर के समक्ष प्रेमभक्ति।
ईश्वर और विश्वास के बारे में यह टेक
होशे प्रवचनों में परमेश्वर यह चाहते हैं कि लोग दया, विश्वास और परिवर्तन की उपासना लौटें। पाठ का केन्द्र यह है कि धार्मिक कर्मों का बाहरी प्रदर्शन तब तक पर्याप्त नहीं जब तक हृदय परिवर्तन नहीं होता। यहोवा का मन कभी-कभी कठोर प्रतीत होता है, परन्तु उसकी कर्तव्यपरायणता और करुणा भी साथ रहती है: वह उन लोगों को पुकारते हैं जो उन्हें छोड़ रहे हैं और उन्हें सत्य के मार्ग पर लौटने के लिए बुलाते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
अनुरूप अन्तरदृष्टियाँ (Cross-reference)
हम इस पंक्ति को तुलनात्मक रूप से अन्य पवित्र ग्रंथों से समझते हैं:
आधुनिक उपयोग के लिए निष्कर्ष
आज के संदर्भ में यह संदेश सीधे है: अपने जीवन के व्यवहार को री-चेक करें, अधर्म से दूरी बनाएं, और परमेश्वर के अनुग्रह को स्वीकारें। बाहरी धर्म-निष्ठाओं से अधिक, हृदय का परिवर्तन और दैनिक आभार महत्वपूर्ण है। सुनिश्चित करें कि आप συμβ<अपने में—धन्यवाद और सेवा की दैनिक आदत डालें; दूसरों के साथ करुणा और नैतिकता के साथ संपर्क रखें; और यदि आप पाप-भरोसे में हैं, तो ईश्वर के सामने सच्चे मन से लौटकर आशीष पाएँ।
नोट: नीचे लिखे चौकन्ने उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के समान विचारों से मिलते हैं, ताकि पाठक को पुरानी समझ और आधुनिक अनुप्रयोग का समन्वय मिले:
मैथ्यू हेनरी का सार यह है कि परमेश्वर क्षमा प्रदान करते हैं जब हृदय से पश्चात्ताप होता है; एलबर्ट बार्न्स कहते हैं कि धार्मिक कर्मों की शृंखला तब तक महत्त्वहीन है जब तक आंतरिक परिवर्तन न हो; एडम क्लार्क जोड़ते हैं कि धन्यवाद की कृतज्ञता जीवन-चर्या बननी चाहिए।
योगदान उपलब्ध उद्धरणों के समय-सीमा के अनुसार छायांकित हैं: “भगवान की ओर लौटना ही पूर्ण तपस्या है” (मैथ्यू हेनरी के सार से समर्थित विचार), “धन्यवाद का बलि धीरे-धीरे हृदय से निकलता है” (एलबर्ट बार्न्स), “धन्यवाद से भावना-परिवर्तन की पराकाष्ठा होती है” (एडम क्लार्क).