Old Testament
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होशे 14:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं उनकी भटक जाने की आदत को दूर करूँगा*; मैं सेंत-मेंत उनसे प्रेम करूँगा, क्योंकि मेरा क्रोध उन पर से उतर गया है।
होशे 14:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
होशे 14:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 12:1 (HINIRV) »
उस दिन* तू कहेगा, “हे यहोवा, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ, क्योंकि यद्यपि तू मुझ पर क्रोधित हुआ था, परन्तु अब तेरा क्रोध शान्त हुआ, और तूने मुझे शान्ति दी है।

यिर्मयाह 3:22 (HINIRV) »
“हे भटकनेवाले लड़को, लौट आओ, मैं तुम्हारा भटकना सुधार दूँगा। देख, हम तेरे पास आए हैं; क्योंकि तू ही हमारा परमेश्वर यहोवा है।

यशायाह 57:18 (HINIRV) »
मैं उसकी चाल देखता आया हूँ, तो भी अब उसको चंगा करूँगा; मैं उसे ले चलूँगा और विशेष करके उसके शोक करनेवालों को शान्ति दूँगा।
होशे 14:4—भटकने से मुक्ति और प्रेम का पुनःस्थापन
इस पद्य में होशे प्रेषित एक आश्वासनात्मक संदेश देते हैं: परमेश्वर अपने लोगों की भटकने की आदत को दूर करेंगे, उनके बीच गहराई से प्रेम का पुनर्बोध करेंगे, और उनका क्रोध उतर जाएगा। यह उद्धार का मार्गध्वनि है जो पाप में पड़े लोगों के लिए भी सक्षम बनती है—पुनःस्थापना, सहानुभूति, और नये जीवन का आरम्भ।
पद् का पाठयंत्र (पाठ के साथ संकल्पना)
“मैं उनकी भटक जाने की आदत को दूर करूँगा; मैं सेंत-मेंत उनसे प्रेम करूँगा, क्योंकि मेरा क्रोध उन पर से उतर गया है।”
यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की करुणा और व्यवस्था दोनो साथ चलते हैं: उनका उद्धारक क्रोध-उद्धार को बदलता है और “भटकना” की आदत पर अंकुश लगाता है, जिससे कुल मिलाकर भक्ति-जीवन की दिशा सुधरती है।
चैप्टर के भीतर का संदर्भगत स्वर
होशे की किताब में यह संदेश विशेष रूप से इस बात की पुष्टि करता है कि परमेश्वर अपने पापी बन्धुओं के लिए स्वभाविक दया दिखाते हैं—भटकी हुई प्रजा को उनके मूल स्थान पर लौटाने की इच्छा और उनकी आत्मा को नया स्वरूप देने का वादा। यह verse उस समय की दृश्य-भावना को नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता और उसकी गवाही देता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुशंसित तुलनात्मक पठन
- रोम. 11:30–32 में दृष्टांत मिलता है कि ईश्वर ने कैसे असभ्य पापियों के लिए अनुग्रह का मार्ग खोल दिया।
- यूहन्ना 3:16 के प्रेम-व्यक्तित्व के साथ यह verse जोड़ता है कि परमेश्वर का प्रेम उद्धार के लिए कैसे प्रेरक है।
- होशे 6:1–2 में दोबारा उठना और पुन:जीवन का संकेत मिलता है, जो इस verse के “भटकने से मुक्ति” के साथ संगत है।
व्यवहारिक अनुप्रयोग
- व्यक्तिगत परिवर्तन के लिए आह्वान: जान लें कि गलती होने पर भी परमेश्वर का प्रेम आश्वस्त करता है।
- समुदाय में पुनर्स्थापना: रिश्तों में दोष के बावजूद क्षमा और स्थिरता के लिए प्रयास करें; यह प्रेम के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया है।
- प्रार्थना में उद्धार की मांग: अपने जीवन में भटकाव की आदतों से छुटकारे के लिए परमेश्वर से सहायता मांगें।
Cross-references (संक्षेप में, और उनके महत्व)
1) रोमियों 11:30–32 — ईश्वर के अतीत के अविश्वास के बावजूद उद्धार की उपलब्धि का स्मरणप्रदर्शन।
2) यूहन्ना 3:16 — प्रेम का मूल कारण और उद्धार का मार्ग बताता है।
3) होशे 6:1–2 — उद्धार के बाद पुनःजीवन की दिशा में आये परिवर्तन का संकेत देता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (अर्थात् public-domain टिप्पणीकारों से सम्बद्ध सन्निवेश)
यह commentary Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के अनुरूप है, ताकि पाठक को क्लासिकल समझ मिले। नीचे कूटीय संदर्भों का संक्षेपिक उपयोग किया गया है:
- “भटकने की आदत” के संदर्भ में Henry के अनुसार परमेश्वर की करुणा पुनःस्थापना की दिशा खोलती है।
- Barnes के अनुसार प्रेम और क्रोध के संतुलन से उद्धार की प्रक्रिया स्पष्ट होती है।
- Clarke के अनुसार यह वादा नये जीवन की दिशा में अग्रसर करता है, जहाँ परमेश्वर अपने बच्चों के साथ निकटता बनाते हैं।
नोट: जहां उपयुक्त हो वहां 2–3 छोटे उद्धरणों के रूप में उल्लेखित exact phrases केवल इन टिप्पणीकारों की स्वीकृत पंक्तियों से लिया गया है; पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है ताकि पाठ्य में प्रवाह बना रहे.
संक्षेप
होशे 14:4 में एक स्पष्ट वादा है: भटकने की आदत दूर होगी, प्रेम पुनःप्रस्थापित होगा और परमेश्वर का क्रोध घटेगा। यह संदेश व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर परिवर्तन की आशा देता है—जीवन में नये परिवर्तन की शुरुआत के लिए एक आह्वान।