Old Testament
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होशे 8:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं तो उनके लिये अपनी व्यवस्था की लाखों बातें लिखता आया हूँ, परन्तु वे उन्हें पराया समझते हैं।
होशे 8:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 8:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 4:6 (HINIRV) »
इसलिए तुम उनको धारण करना और मानना; क्योंकि और देशों के लोगों के सामने तुम्हारी बुद्धि और समझ इसी से प्रगट होगी, अर्थात् वे इन सब विधियों को सुनकर कहेंगे, कि निश्चय यह बड़ी जाति बुद्धिमान और समझदार है।

होशे 4:6 (HINIRV) »
मेरे ज्ञान के न होने से मेरी प्रजा नाश हो गई; तूने मेरे ज्ञान को तुच्छ जाना है, इसलिए मैं तुझे अपना याजक रहने के अयोग्य ठहराऊँगा। इसलिए कि तूने अपने परमेश्वर की व्यवस्था को त्याग दिया है, मैं भी तेरे बाल बच्चों को छोड़ दूँगा।

2 राजाओं 17:15 (HINIRV) »
वे उसकी विधियों और अपने पुरखाओं के साथ उसकी वाचा, और जो चितौनियाँ उसने उन्हें दी थीं, उनको तुच्छ जानकर, निकम्मी बातों के पीछे हो लिए; जिससे वे आप निकम्मे हो गए, और अपने चारों ओर की उन जातियों के पीछे भी हो लिए जिनके विषय यहोवा ने उन्हें आज्ञा दी थी कि उनके से काम न करना।
होशे 8:12 — संदर्भ और तत्काल सेटिंग
यहोवा के द्वारा होशे नहेमी के समय उत्तरदायित्व को याद दिलाते हैं कि वे अपने नियमों की लाखों बातें लिखते हैं, परन्तु इस्राइल उसे पराया समझते हैं। यह पंक्ति उस समाज की स्थिति को उद्घाटित करती है जहाँ धार्मिक outward रीतियाँ तो निभाते हैं, परन्तु अंतरमन में परमेश्वर की आज्ञाओं की गहराई नहीं समाती। पवित्र इतिहास में यह ईश्वरीय तिरस्कार और निष्ठा के प्रति चूक के भाव को उजागर करता है।
ईश्वर के बारे में जो पाठ बताता है
इस आयत में ईश्वर अपने लोगों के साथ अपने निश्चय और व्यवस्था की गहराई को साझा करते हैं, किन्तु वे उन्हें “पराया” समझते हैं। इसका संकेत है कि धार्मिक कर्म उन्हें उद्धार नहीं देते जब हृदय में वफ़ादारी नहीं होती। ईश्वर यह दिखाते हैं कि कानूनों के शब्द नहीं, बल्कि उनसे उत्पन्न आस्था और प्रेम परमेश्वर के स्वागत का वास्तविक आधार हैं।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
अन्य सम्मिलित संसर्ग (Cross-references) और समझ
इन विचारों के साथ तीन संबंधित द्रोह-उद्धरण देखें:
इन संदर्भों से उठते हुए संकेत मिलता है कि वचन के शाब्दिक पालन से अधिक महत्वपूर्ण है उसका जीवन्त प्रभाव और हृदय की निष्ठा।
अनुमानित व्याख्या (Summary in one view)
होशे का यह पाठ ऐसी स्थिति को दर्शाता है जहाँ परमेश्वर अपने नियमों को विस्तार सहित रहने के बावजुद भी लोगों के हृदय में उनका महत्व घटता है। ईश्वर की योजना और व्यवस्था जीवन-यात्रा को दिशा देती है, परन्तु यदि लोग उनके साथ एक सच्ची निष्ठा नहीं रखते, तो यह व्यवस्था खोखली बन जाती है। यह चेतावनी यही कहती है कि भक्ति केवल शब्दों या परंपराओं में नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास, समर्पण और obedience में निहित है।
आज के जीवन के लिए अनुप्रयोग
सार निष्कर्ष
यह आयत提醒 देती है कि परमेश्वर की व्यवस्था गहन है और उसकी लेखनी में लाखों बातें संभव हैं, परन्तु उनके शब्दों का वास्तविक प्रभाव तभी है जब हृदय में निष्ठा और प्रेम हो। केवल बाहरी दिखावे से उद्धार नहीं मिलता; जीवन की नीयत और आचरण से परमेश्वर की सच्ची सेवा प्रकट होती है।
उद्धृत मॉडल वक्तव्य: “मैं तो उनके लिये अपनी व्यवस्था की लाखों बातें लिखता आया हूँ, परन्तु वे उन्हें पराया समझते हैं।” यह भाव होशे के स्पष्ट संदेश का केंद्र है: परमेश्वर की आज्ञाओं के साथ तादात्म्य चाहिए—न कि उन्हें केवल किताबों में रखना।