Old Testament
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होशे 8:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस्राएल निगला गया; अब वे अन्यजातियों में ऐसे निकम्मे ठहरे जैसे तुच्छ बर्तन ठहरता है।
होशे 8:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 8:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 22:28 (HINIRV) »
क्या, यह पुरुष कोन्याह तुच्छ और टूटा हुआ बर्तन है? क्या यह निकम्मा बर्तन है? फिर वह वंश समेत अनजाने देश में क्यों निकालकर फेंक दिया जाएगा?

यिर्मयाह 51:34 (HINIRV) »
“बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने मुझको खा लिया, मुझको पीस डाला; उसने मुझे खाली बर्तन के समान कर दिया, उसने मगरमच्छ के समान मुझको निगल लिया है; और मुझको स्वादिष्ट भोजन जानकर अपना पेट मुझसे भर लिया है, उसने मुझको जबरन निकाल दिया है।”

रोमियों 9:22 (HINIRV) »
कि परमेश्वर ने अपना क्रोध दिखाने और अपनी सामर्थ्य प्रगट करने की इच्छा से क्रोध के बरतनों की, जो विनाश के लिये तैयार किए गए थे बड़े धीरज से सही। (नीति. 16:4)
होशे 8:8 का immédiate सेटिंग और संदेश
यहुशा-युग के अपने समय में होशे नबू ने इस्राएल के अति पतन को दर्शाया है: वे निगला गया है, अर्थात् वह राष्ट्र अब दुष्ट रास्तों के कारण विद्रोही हो गया है और अब दूसरीजातियों के बीच वह तुच्छ ठहरा है, जैसे किसी खचित, बेकार बर्तन का मान हो। यह दृश्य एक चिंताजनक परिदृश्य है जहाँ परमेश्वर के चुने हुए लोगों की आत्मरक्षा और पहचान टूट रही है और वे अपने उद्देश्य से दूर हो गए हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से प्राप्त प्रमुख बातें
शब्दों/छवियों की Clarification
निगला गया से आशय है—तोड़-फोड़, आलस्य और आध्यात्मिक असफलताओं द्वारा समाज की निशानी खो जाना; तुच्छ बर्तन एक ऐसी वस्तु दर्शाता है जिसे लोग सम्मान नहीं देते, जो अनुपयोगी मानी जाती है—यह दर्शाता है कि इस्राएल की प्रतिष्ठा लुप्त हो चुकी है।
संबंधित आयतें
1) होशे 6:6 — मैं भक्ति नहीं, बलि चाहता हूँ; परन्तु धर्म का सार प्रेम और न्याय में है। अगर आत्माओं में स्थिर प्रेम न हो, तो भक्ति खाली है।
2) मत्ती 7:21-23 — केवल वाचक धर्म नहीं, बल्कि यह दिखना भी आवश्यक है कि प्रभु के अनुसार जीवन जीना है; अन्यथा वह व्यक्ति निष्क्रिय आदर्श बनकर रह जाता है।
3) योशुआ 23:12-13 — उहाँ के लोगों का स्थायित्व जीत के साथ जुड़ा हुआ है; अगर वे ईश्वर के नियमों से विचलित होते हैं, तो उनका सामर्थ्य समाप्त हो सकता है।
आज का व्यवहारिक प्रभाव
हम अपने समय में भी आंतरिक समर्पण और नैतिक व्यवहार के मेल को जाँचें। क्या हमारी आस्था केवल बाहरी आधी-आडंबर तक सीमित है, या हम अपने दैनिक जीवन में प्रेम, ईमानदारी, और सामाजिक दायित्वों को निभाते हैं? यदि हम धार्मिक कर्मों के साथ व्यक्तिगत परिवर्तन और समाज के लिए सेवा को प्राथमिकता नहीं देते, तो possiamo “निगला गया” की स्थिति के समान खतरे में आ सकते हैं।
संक्षिप्त Unified Insight
होशे 8:8 एक चेतावनी है कि परमेश्वर की पहचान और उनके योग्य जीवन इस्राएल के लोक-जीवन से कितनी गहराई से जुड़ी है। यह बताता है कि आध्यात्मिक ख्याति तब तक सुरक्षित रहती है जब तक प्राथमिकी में ईश्वर की योजना अनुरूप आचरण, न्याय और प्रेम बने रहते हैं। बर्ताव की खोखलाहट से विशुद्धता और एकत्व मिटता है; अतः विश्वास सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि कर्मों के साथ जुड़ा जीवन होना चाहिए।
पूर्व-धार्मिक उद्धरण (संदर्भित)
उन प्रवचनों से प्रेरणाएँ जो कभी-प्रचलित टिप्पणीकारों के मर्म को धारण करती हैं, जैसे कि मार्था हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से, संकेत देती हैं कि आस्था में आत्म-नियमन और नैतिक जीवन का महत्व है।
उद्धृत संक्षेप टिप्पणियाँ (यदि उपलब्ध):
Cross-reference note: ऊपर के संदर्भ अलग-अलग नयों के अनुसार राहत देते हैं, परन्तु मूल संदेश में एक संपूर्ण परिवर्तन की जरूरत है—परमेश्वर के साथ स्थायी संबंध बनाकर ही वास्तविक जीवन परिवर्तन संभव है।