Old Testament
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होशे 9:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वे यहोवा के लिये दाखमधु का अर्घ न देंगे, और न उनके बलिदान उसको भाएँगे। उनकी रोटी शोक करनेवालों का सा भोजन ठहरेगी; जितने उसे खाएँगे सब अशुद्ध हो जाएँगे; क्योंकि उनकी भोजनवस्तु उनकी भूख बुझाने ही के लिये होगी; वह यहोवा के भवन में न आ सकेगी।।
होशे 9:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 9:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 8:13 (HINIRV) »
वे मेरे लिये बलिदान तो करते हैं, और पशु बलि भी करते हैं, परन्तु उसका फल माँस ही है; वे आप ही उसे खाते हैं; परन्तु यहोवा उनसे प्रसन्न नहीं होता। अब वह उनके अधर्म की सुधि लेकर उनके पाप का दण्ड देगा; वे मिस्र में लौट जाएँगे।

यिर्मयाह 6:20 (HINIRV) »
मेरे लिये जो लोबान शेबा से, और सुगन्धित नरकट जो दूर देश से आता है, इसका क्या प्रयोजन है? तुम्हारे होमबलियों से मैं प्रसन्न नहीं हूँ*, और न तुम्हारे मेलबलि मुझे मीठे लगते हैं।

व्यवस्थाविवरण 26:14 (HINIRV) »
उन वस्तुओं में से मैंने शोक के समय नहीं खाया, और न उनमें से कोई वस्तु अशुद्धता की दशा में घर से निकाली, और न कुछ शोक करनेवालों को दिया*; मैंने अपने परमेश्वर यहोवा की सुन ली, मैंने तेरी सब आज्ञाओं के अनुसार किया है।
होशे 9:4 पर टीका (HINIRV)
इस आयत में होशे नबियों की दृष्टि से उन लोगों के धार्मिक कर्मों की अस्थिरता और ईश्वर के घर से उनका दूरीना बताई गई है। यहूदियों के लिए आहार, उत्सव और पूजन—तीनों का अर्थ ईश्वर के साथ जुड़ाव माना गया था। परन्तु यहाँ निष्कर्ष है कि परमेश्वर उन्हें आशीर्वाद नहीं देंगे जब उनका रुझान केवल रस्मी क्रियार.Forms बनकर रह जाएँगे, वास्तव में उनकी भोजन-वस्तु केवल भूख मिटाने के लिए होगी और वे शुद्ध-आचरण नहीं करेंगे।
कथा अनुसार पंक्ति के भीतर पढ़ना
पंक्ति कहती है कि वेे “यहोवा के लिये दाखमधु का अर्घ न देंगे”, “बलिदान उसको भाएँगे”, “उनकी रोटी शोक करनेवालों का सा भोजन ठहरेगी”—यानी उनका आहार और बलिदान परमेश्वर के साथ उनके वास्तविक संबंध को नहीं दर्शाते। उनके भोजन का उद्देश्य मात्र भूख मिटाना है, और इस वजह से वे अशुद्ध समझे जाएँगे; “यही कारण है कि उनकी भोजनवस्तु उनकी भूख बुझाने ही के लिये होगी; वह यहोवा के भवन में न आ सकेगी”। यह संदेश बताता है कि परिशुद्धता और उत्साहपूर्ण भक्ति के अभाव में धार्मिक कर्म सिर्फ दिखावा बन जाते हैं और ईश्वर के पवित्र स्थल में वास्तविक सहभागिता नहीं मिलती।
अध्याय के भीतर मुख्य पाठक-संदेश
होशे इस किताब में इस्राएल के पाप-चक्र पर चोट करते हैं—उन्हें परमेश्वर से प्यार नहीं, बल्कि दिखावे और सामाजिक दबाव के कारण भक्ति दिखती है। 9:4 में यह बताता है कि भक्ति के दिखावे को ईश्वर तब तक स्वीकार नहीं करते जब उसका उद्देश्य अपने आप को धर्मी दिखाना हो, और आत्म-निष्ठा, पवित्रता और सामुदायिक कल्याण से विकृत हो।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यहाँ एक सीधे-सीधे संदेश है: भक्ति के कर्म भी जीवन के वास्तविक मूल्य—पवित्रता, न्याय और दया—के साथ जुदा नहीं हो सकते। अगर धार्मिक क्रियाकलापों का उद्देश्य केवल स्व-स्वार्थ या सामाजिक सम्मान प्राप्त करना हो, तो वे ईश्वर के न्याय के सामने अपर्याप्त रहते हैं। पवित्रता, समर्पण, और सामुदायिक कल्याण को केंद्र में रखकर भक्ति बनती है, अन्यथा बाहरी दिखावा टूट जाता है।
कभी-भी-संदर्भ तुलना
- संदर्भ एक साथ देखने पर: मिस्र से बाहर निकलना (यहोशू/यिर्मयाह) में भी दिखता है कि यहोवा से गहरे संबंध के लिए आचार-विचार की शुद्धता आवश्यक है; ceremonial कर्म तभी अर्थपूर्ण माने जाते हैं जब भीतर का परिवर्तन भी हो।
- अन्य संदेस: भक्ति का आचरण और आहार के साथ उनका संबंध बताता है कि आस्था का असली स्वाद तब आएगा जब लोग दिल से परमेश्वर के सामने अपने जीवन के हर हिस्से को समर्पित करें।
लघु अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
- होशे 4:6: ज्ञान की कमी से अवग hinge; यह भी जागरूक करता है कि भक्ति के लिए ज्ञान और आचरण अविभाज्य हैं।
- इस्राएल के पाप के क्रम में न्याय और दया की मांग: ओशिया 6:6 जैसी कथनों से मेल खाता है कि कानूनी रीतियाँ बिना दयालुता के निरर्थक हैं।
- मिस्सा के भीतर भी यह संदेश कि वास्तविक भक्ति दिल से हो, न कि बाह्य रीतियों से।
संक्षेप
होशे 9:4 यह स्मरण कराता है कि धार्मिक कर्म तभी प्रभावशाली होते हैं जब उनका उद्देश्य परमेश्वर के साथ सच्चे रिश्ते को प्रकट करना हो, न कि केवल दिखावे को बनाए रखना। आहार, भजन और बलिदान सब तब पूर्ण होते हैं जब वे नैतिक और आध्यात्मिक परिवर्तन को उत्पन्न करें।
उद्धृत एक छोटा नोट: अलबर्ट बार्न्स, अडाम क्लार्क और मैथ्यू हेन्री के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी से मिलने वाले विचार इस पाठ के भीतर एक साथ उपयोग होते हैं; यदि चाहिए तो मैं संक्षिप्त उद्धरण दे सकता हूँ, किन्तु यहाँ मैंने उन्हें मूलभाव में प्राकृतिक हिन्दी प्रस्तुति के साथ समाहित किया है।