Old Testament
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होशे 9:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
एप्रैम मारा हुआ है, उनकी जड़ सूख गई, उनमें फल न लगेगा। चाहे उनकी स्त्रियाँ बच्चे भी जनें तो भी मैं उनके जन्मे हुए दुलारों को मार डालूँगा।
होशे 9:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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होशे 9:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 9:11 (HINIRV) »
एप्रैम का वैभव पक्षी के समान उड़ जाएगा; न तो किसी का जन्म होगा, न किसी को गर्भ रहेगा, और न कोई स्त्री गर्भवती होगी!

यशायाह 5:24 (HINIRV) »
इस कारण जैसे अग्नि की लौ से खूँटी भस्म होती है और सूखी घास जलकर बैठ जाती है, वैसे ही उनकी जड़ सड़ जाएगी और उनके फूल धूल होकर उड़ जाएँगे; क्योंकि उन्होंने सेनाओं के यहोवा की व्यवस्था को निकम्मी जाना, और इस्राएल के पवित्र के वचन को तुच्छ जाना है।

यहेजकेल 24:21 (HINIRV) »
'तू इस्राएल के घराने से कह, प्रभु यहोवा यह कहता है : देखो, मैं अपने पवित्रस्थान को जिसके गढ़ होने पर तुम फूलते हो, और जो तुम्हारी आँखों का चाहा हुआ है, और जिसको तुम्हारा मन चाहता है, उसे मैं अपवित्र करने पर हूँ; और अपने जिन बेटे-बेटियों को तुम वहाँ छोड़ आए हो, वे तलवार से मारे जाएँगे।
होशे 9:16 पर विचार
यह पद इस संदेश की गहराई दिखाता है कि परमेश्वर के किस के साथ पाश्चात्य दया-भरा रिश्ता टूटने पर उसका क्रोध किन तरह से उद्भवित होता है। इस वचन में ऐप्रैम के प्रति परमेश्वर की कठोरता और उनके हृदय की कठोरता का उल्लेख है—ऐसा लोग जब तक आत्म-निरीक्षण नहीं करते तब तक अनुभव करते रहते हैं। साथ ही यह स्मरण कराता है कि दया और न्याय एक साथ नहीं छूटते; जहाँ एक ओर परमेश्वर अपने बच्चों को दण्डित करके पथ पर लाने का प्रयत्न करते हैं, वहीं दूसरी ओर उद्धार के अवसर भी वेछोड़ते नहीं हैं।
पार्श्वभूमि और मूल संदर्भ
होशे की पुस्तक एक_PROPhetic कथा है जो उत्तर-राजा इतिहास के संदर्भ में इस्रेल के असंयमित विश्वास, बंधनों और पवित्रताओं की कमी को उजागर करती है।होशे ने इस्राइल के उत्तर-राजाओं के समय में ईश्वर के नाते-नाते और उस समय की समृद्धि के बावजूद धार्मिक पतन को दिखाया। ऐप्रैम (इस्राइल की एक संस्था) के रूप में चिह्नित इस fragmentary साम्राज्य के लिए यह चेतावनी है कि वे अपने प्रचुर फल-फूल और जन्मों-जनों पर भी निर्भर न रहें; यदि उनका आन्तरिक धर्म परिवर्तन नहीं होता, तो रचना-पर्यन्ता में उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी।
प्रमुख संदेश
यह वाक्य दो प्रमुख बातों को संक्षेप में कहता है: a) आस्था के बाहरी चिह्नों के बावजूद ईश्वर के साथ सम्बन्ध में उल्लेखनीय कमी हो सकती है—जड़ें सूख जाती हैं, फल नहीं उगते। b) सामान्य-जानकारी के भीतर भी दया नहीं बढ़ती; यहाँ तक कि जन्म लेने वाले प्यारे दुलारे भी प्रभु के निर्णय से प्रभावित होते हैं। यह निश्चय हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर का दंड उन लोगों के लिए है जो तर्क-युक्त आचरण छोड़कर पाखंडी धर्म अपनाते हैं और ईश्वर की चेतावनियों को अनसुना करते हैं।
टिप्पणियाँ और संबंधित विचार
- पवित्र आत्मा से भरे रहने की कमी के कारण आशीष के पीछे-पीछे नतीजे आते हैं; प्रार्थना और विश्वास में गहराई लाने पर ही जीवनधारा वापस उभरती है।
- यह संदेश यह भी याद दिलाता है कि दया और न्याय एक साथ चलते हैं; परमेश्वर अपने बच्चों के लिए कठोर दण्ड भी देते हैं ताकि वे योग्य आशीर्वादों को पुनः प्राप्त करें।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त संदर्भ) और प्रवेश
इन संदर्भों में दिखता है कि परमेश्वर दयालु भी हैं और न्यायी भी—ह्रदय के परिवर्तन के बिना बाहरी उन्नति मूल्यहीन है, जबकि आंतरिक परिवर्तन से ही जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन आ सकता है।
निराकरणीय आयाम: एक मिनट का ध्यान
होशे 9:16 हमें एक स्पष्ट दर्पण दिखाता है कि धार्मिकता के आडंबर से आगे बढ़कर दिल की स्थिति मायने रखती है। यदि हमारा भरोसा बाहरी उपाधियों पर है और आंतरिक प्रेम-विश्वास नहीं है, तो परमेश्वर की नज़र से वास्तविक फल नहीं उगते। इस Váקים पर विचार करते हुए हमें आत्म-परीक्षा करनी चाहिए: क्या हमारे जीवन में परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार आचरण बन रहा है? क्या हम प्रेम, करुणा और नम्रता से भरपूर जीवन जी रहे हैं?
व्यावहारिक ध्यान-निर्देश
संक्षिप्त संपादन निष्कर्ष
यह वचन बताता है कि अन्दर से बंधे हृदय के बिना बाहरी प्रभाव अचल रहते हैं। परमेश्वर के साथ सच्चे सम्बन्ध का मार्ग हृदय-परिवर्तन है—तब ही फलित जीवन संभव होता है। यह संदेश हमारे लिए एक स्थिर चेतावनी और एक प्रेरणा दोनों है: बाहर की जड़ें मजबूत हों या न हों, परमेश्वर की सच्ची कृपा संवर्धित जीवन के लिए ही चाहिए।
उद्धृत ग्रंथ-योग: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से अगर कोई संक्षिप्त शब्द मिलते हैं, तो वह नीचे उद्धृत किए जा सकते हैं। (ध्यान दें: नीचे दिए गए अभेद-उद्धरण केवल शॉर्ट-फ्रेज हैं और पूरी किताबों के पाठ नहीं हैं।)
noble quotes: "The people were in a covenant relation with God, yet lived as if they had no such relation" (अनुमानित सार) — Matthew Henry; "Judgment is the way to bring back the backslider" — Albert Barnes; "God will break their pride and scatter them" — Adam Clarke. इन उद्धरणों की तात्कालिकता संदर्भ-व्याख्या के साथ जुड़ी है और पवित्र शास्त्र के सामान्य सिद्धांतों पर टिकती है।