Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 16:1 न्यायियों 16:2 न्यायियों 16:3 न्यायियों 16:4 न्यायियों 16:5 न्यायियों 16:6 न्यायियों 16:7 न्यायियों 16:8 न्यायियों 16:9 न्यायियों 16:10 न्यायियों 16:11 न्यायियों 16:12 न्यायियों 16:13 न्यायियों 16:14 न्यायियों 16:15 न्यायियों 16:16 न्यायियों 16:17 न्यायियों 16:18 न्यायियों 16:19 न्यायियों 16:20 न्यायियों 16:21 न्यायियों 16:22 न्यायियों 16:23 न्यायियों 16:24 न्यायियों 16:25 न्यायियों 16:26 न्यायियों 16:27 न्यायियों 16:28 न्यायियों 16:29 न्यायियों 16:30 न्यायियों 16:31



यातायात संदर्भ में न्यायियों 16:25 का संक्षेप अर्थ
मतलब स्पष्ट है: जब भी उनके मनोरंजन और मनोरथों की लालसा बढ़ गई, तब उन्होंने शिमशोन को चित्ताकर्षक तमाशे के लिए बुलाया, ताकि वह उनकी आँखों के सामने नाच-गाकर मनोरथ पूर्ण करे। अंततः शिमशोन को खम्भों के बीच खड़ा कर तमाशा करने के लिए मजबूर किया गया, यह दिखाता है कि शक्ति और सत्ता के भूखे लोग मानव दिव्यता को भी अपनी मनोरंजक चाहतों के अनुसार तितर-बितर कर देते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
न्यायियों की किताब में शिमशोन एक चरित्र के रूप में उभरते हैं जिनकी शारीरिक शक्तियाँ उसे वीर बनाती हैं, परन्तु उनकी नैतिक योग्यता और आत्म-निजता के प्रश्न भी सामने आते हैं। इस व verse में वह समय है जब पिलस्तियों के मनोभाव अत्यधिक दुरुपयोग और दमन के प्रतीक बनते हैं। वे अपने नगर के विरुद्ध अपेक्षित रोक-थाम के बिना तथाकथित मनोरंजन के लिए शिमशोन को बुलाते हैं, और फिर अपनी शर्तों पर उसे गड़बड़ तमाशा के लिए खड़ा कर देते हैं। यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि शक्तिशाली लोग किस प्रकार सत्ता, अदालती व्यवस्था और धार्मिक-आडंबर के जरिए कमजोरों के साथ अन्याय करते हैं।
व्याख्यात्मक विश्लेषण
संक्रमणीय क्रॉस-रेफरेंसेस
1) न्यायियों 16:21 — शिमशोन को पिलस्तियों द्वारा अंधकार में फेंके जाने का प्रारम्भिक चरण और उसकी शारीरिक शक्ति के बावजूद कमजोर पड़ना। इसका संकेत है कि पुण्य और शक्ति का संतुलन टूट सकता है जब नैतिकता हार जाती है।
2) न्यायियों 16:28 — शिमशोन की आत्मिक प्रार्थना और परमेश्वर से उद्धार की चाह, तब उसकी शक्तियाँ पुनः प्रकट होती हैं; यह एक आश्चर्यजनक पुनर्जागरण जैसा मोड़ है जो दया और उद्धार की उम्मीद बनाता है।
3) एक अन्य संदर्भ: प्रेरितों के काम 12:23 में राजा हरडेस के द्वारा शक्तिशाली प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव के कारण एक व्यक्ति का नाश दिखता है; यह सत्ता-जनित तमाशे के खतरों को एक समान प्रकाश में प्रस्तुत करता है।
प्रमुख निष्कर्ष और ईमानदार उपयोग
संकेतित शाब्दिक उद्धरण से मतभेद नहीं
इस पवित्र पाठ में प्रयुक्त विचार: शक्तिशाली समाज की तमाशा-उन्मुख मानसिकता और दमन की प्रवृत्ति के विरुद्ध एक नैतिक चेतावनी है—जिसमें कमजोरों के प्रति अन्याय बढ़ता है जब लोग अपनी इच्छाओं के मद में अंधे हो जाते हैं।
अनुवादक-नोट: नीचे दिए गये तीन प्रख्यात पवित्र-टीकाकारों के संकलन से पाठ की अनुभूति में सहायता मिली है, और जहाँ संभव, उनके संक्षिप्त विचार उपयोग में लिए गए हैं—जिनमें मैथ्यू हेन्सी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के उपयुक्त उद्धरण किसी भी पूर्ण पाठ से उद्धृत नहीं होते, बल्कि उनके दृष्टिकोण से पाठ के अर्थ स्पष्ट करने के लिए संक्षेप में शामिल किए गए हैं:
मैथ्यू हेन्सी के विचार का संक्षेप मार्गदर्शन: “शक्तिशाली समाज का तमाशा-आधार शाश्वत सत्य से विमुख होकर चलता है।” (संकेतित सार)
एल्बर्ट बार्न्स की टिप्पणी: “लगातार बल का प्रदर्शन तब भी आकर्षित रहता है जब उसे नैतिकता की कसौटी पर खरा नहीं पाया जा सकता।”
एडम क्लार्क की दृष्टि: “शिमशोन का अनुभव दिखाता है कि परमेश्वर की असाधारण शक्ति मानव अवसाद के समय भी उपलब्ध रहती है।”