Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 16:1 न्यायियों 16:2 न्यायियों 16:3 न्यायियों 16:4 न्यायियों 16:5 न्यायियों 16:6 न्यायियों 16:7 न्यायियों 16:8 न्यायियों 16:9 न्यायियों 16:10 न्यायियों 16:11 न्यायियों 16:12 न्यायियों 16:13 न्यायियों 16:14 न्यायियों 16:15 न्यायियों 16:16 न्यायियों 16:17 न्यायियों 16:18 न्यायियों 16:19 न्यायियों 16:20 न्यायियों 16:21 न्यायियों 16:22 न्यायियों 16:23 न्यायियों 16:24 न्यायियों 16:25 न्यायियों 16:26 न्यायियों 16:27 न्यायियों 16:28 न्यायियों 16:29 न्यायियों 16:30 न्यायियों 16:31



न्यायियों 16:3 का महत्व और संदर्भ
यह पद शिमशोन के साहस और बल का एक चिह्न है, जो उसकी पहचान से जुड़ा एक असाधारण पाठ प्रस्तुत करता है। परन्तु यहाँ भी एक चेतावनी है: परमेश्वर की इच्छा के बिना मानव इच्छाशक्ति कभी-कभी अस्थिर और अहंकारी कदम उठाती है। यह वचन दिखाता है कि किस तरह शिमशोन अपनी शक्ति के नशे में रात भर के लिए सुरक्षित पनाह प्राप्त करते हुए, अंततः भीषण और जोखिम भरे कदम उठाते हैं—फाटकों को उखाड़ना और उनकी चोटी तक ले जाना, ताकि वह लोगों के बीच एक चेतावनी बन सके। यह घटनाक्रम न केवल शिथिलता पर बल देता है, बल्कि यह भी संकेत करता है कि परमेश्वर अपने चयनित कार्यकर्ताओं के लिए कठोर परीक्षण निर्धारित कर सकते हैं।
মূল पाठ का मूल संदर्भ
यह वाकया पवन के सन्निकट एक महानाही के दौरान घटित होता है। शिमशोन शेरोम के फिएसियों से प्राप्त प्रतिशोध के अनुभव से लगभग मुक्त नहीं होते, परन्तु वह अपने बल और डर के साथ मैदान में उतरता है। भूमिका यह है कि वह अपने नगर के गेटों को पूर्ण रूप से हटा कर यह दिखाते हैं कि किस तरह प्रभु के कार्य में साधारण सीमाओं का पालन नहीं रहता।
मुख्य संदेश
पुरातन थॉट्स से सहारा
दैनंदिन आस्था में यह घटना हमें तीन प्रमुख विषयों की याद दिलाती है: आत्म-शासन, परमेश्वर की योजना का अनुभव, और जवाबदेही। इतिहास में अक्सर शिक्षाएं इसी प्रकार की स्पष्टताओं के माध्यम से उभरती हैं: बहादुरी वही है जो परमेश्वर के निर्देशानुसार काम आए, न कि अपनी शक्ति के घमंड से।
कुछ क्रॉस-रेफरेंसेस
नीचे तीन संक्षिप्त cross-references दी जाती हैं, जो इस पाठ के विचारों को मजबूत करती हैं:
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि एक विशिष्ट मिशन में पश्चाताप या ताकत के अभाव में भी परमेश्वर की इच्छा काम करती है, और वह उस शक्तिशाली बल को भी स्वयं का संकेत बनाकर प्रस्तुत करता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक अनुवाद-आधारित टिप्पणी
इस क्लासिक दृश्य से सीखते हैं कि शिमशोन का दृढ़-आत्मविश्वास, बिना परमेश्वर के मार्गदर्शन के, कभी-कभी आत्म-नशे के रूप में आकार ले लेता है। संतुष्टि तब मिलती है जब हम अपने कदमों को प्रभु के हाथों में दे कर चलें। यह घटना हमें चेतावनी देती है कि हमारी सफलता भी परमेश्वर की अनुमति और मार्गदर्शन से ही सुसज्जित होती है।
पारायण-देवदर्शन ( devotional reflection )
सोचिए—क्या हम अपने जीवन के क्षणों में फाटकों को उखाड़ने की कल्पना करते समय प्रभु की आवाज को सुन लेते हैं? शिमशोन की तरह, हो सकता है कि हम भी कुछ महान दिखने वाली चीजें करना चाहें, पर परमेश्वर कौन सा मार्ग चुनते हैं, यह अंततः हमारी आस्था और विनम्रता को परखता है। अपने हर कदम में प्रभु की सहायता और नाम की महिमा को प्राथमिकता दें, ताकि जो कुछ भी आप करें, वह परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप हो।
व्यावहारिक संदर्भों के साथ, यह पद यह स्मरण कराता है कि शक्ति परमेश्वर के आदेश से आती है और उसकी महिमा के लिए प्रयोग होती है — न कि हमारे अपने अभिमान के लिए।
नोट: नीचे उपलब्ध उद्धरण केवल संक्षिप्त संदर्भों के लिए हैं; पूर्ण पाठ के उद्धरण नहीं दिए गए हैं क्योंकि यह साइट सादगी और स्पष्टता पर केंद्रित है।