Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 16:1 न्यायियों 16:2 न्यायियों 16:3 न्यायियों 16:4 न्यायियों 16:5 न्यायियों 16:6 न्यायियों 16:7 न्यायियों 16:8 न्यायियों 16:9 न्यायियों 16:10 न्यायियों 16:11 न्यायियों 16:12 न्यायियों 16:13 न्यायियों 16:14 न्यायियों 16:15 न्यायियों 16:16 न्यायियों 16:17 न्यायियों 16:18 न्यायियों 16:19 न्यायियों 16:20 न्यायियों 16:21 न्यायियों 16:22 न्यायियों 16:23 न्यायियों 16:24 न्यायियों 16:25 न्यायियों 16:26 न्यायियों 16:27 न्यायियों 16:28 न्यायियों 16:29 न्यायियों 16:30 न्यायियों 16:31


न्यायियों 16:14 पर टिप्पणी: शिमशौन का पलिश्ती घात
यह व verse शिमशौन की कथा का वह मोड़ दर्शाता है जहाँ वह अपनी कमजोरी के कारण कैदियों के हाथ में है और पलिश्ती उसे खूँटी से जकड़कर ताने के साथ ले जाते हैं। संदर्भ में यह दिखता है कि शिमशौन की शक्तिशाली निर्भीकता के बीच उसकी नैतिक और आध्यात्मिक कमजोरियाँ भी सामने आती हैं, जो अंततः दाऊदी-ख्याति शत्रुओं के बीच उसके विरुद्ध एक प्रमुख चाल बन जाती हैं।
मुख्य मतलब
पलिश्तियों ने शिमशौन को उसके स्वयं के आगे के तरीकों से पकड़ा, जिसे उसने पहले अपने आशीर्वाद के साथ जीते हुए देखा था। यद्यपि शिमशौन की शक्ति परमेश्वर से मिली थी, उसकी व्यक्तिगत कमजोरियों, विशेषतः घृणित प्रेम-रिश्ते और मित्थ्य-कथा के कारण, वह अब धोखे और बंदी बन चुका है। इस वाक्य में चौंकने के साथ खूँटी से उसकी जकड़न स्पष्ट है—शरीर तो बंधा है, पर उसकी आत्मा और दुष्कर आत्म-विश्वास भी एक तरह से परीक्षण में है।
केंद्रीय विषय
संबद्ध उपदेश (cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में कभी-कभी हम शक्तिशाली प्रतीत होते हैं, पर कठिन परिस्थितियाँ आती हैं जो हमारी कमजोरियों को उजागर कर देती हैं। इस घटना से प्रेरित होकर हर स्थिति में परमेश्वर की कृपा पर निर्भर रहने की सीख मिलती है। स्वयं के प्रयासों की जगह परमेश्वर की योजना में विश्वास बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
संक्षेप
न्यायियों 16:14 में शिमशौन की बंदी और पलिश्ती दुर्जनों की चाल उसे एक नए मोड़ की ओर ले जाती है—जहाँ उसकी शक्ति और उसकी कमजोरियाँ द्वंद्व में आकर परमेश्वर की चिरस्थायी योजना के साथ समन्वय बनाती हैं। यह पाठ reminders देता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की योजना आगे बढ़ती है, और वह हमारे भीतर की कमजोरियाँ भी बड़े उद्देश्य के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध): इक्छित पंक्तियों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के प्रत्यक्ष छोटे उद्धरण यदि उपलब्ध हों, वे नीचे सचित्र उद्धृत किए गए हैं।