Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 9:13 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 9:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उस सब के बाद जो हमारे बुरे कामों और बड़े दोष के कारण हम पर बिता है, जब कि हे हमारे परमेश्वर तूने हमारे अधर्म के बराबर हमें दण्ड नहीं दिया, वरन् हम में से कितनों को बचा रखा है,
एज्रा 9:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एज्रा 9:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

भजन संहिता 103:10 (HINIRV) »
उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हमको बदला दिया है।

विलापगीत 3:39 (HINIRV) »
इसलिए जीवित मनुष्य क्यों कुड़कुड़ाए*? और पुरुष अपने पाप के दण्ड को क्यों बुरा माने?

अय्यूब 11:6 (HINIRV) »
और तुझ पर बुद्धि की गुप्त बातें प्रगट करे, कि उनका मर्म तेरी बुद्धि से बढ़कर है। इसलिए जान ले, कि परमेश्वर तेरे अधर्म में से बहुत कुछ भूल जाता है।
एज्रा 9:13—इस Verse की अहमियत और संदर्भ
यह आयत इस भाग में सीधे-सीधे एक आत्म-परिष्कारपूर्ण आत्म-चेतना को उजागर करती है। इतिहास में यहूदी नागरिकों के एक समूह द्वारा परमेश्वर के सामने अभिमुख होकर अपनी खामियों का ज़िक्र है, जब वे यह मानते हैं कि दण्ड के अत्यंत कठोर स्वरूप से चली आ रही आपदा के बीच वे अपने ही दोषों के कारण दंडित हुए हैं। लेखक ने खुलेमन से कहा है कि परमेश्वर ने सद्गुणपूर्ण दयालुता के कारण अभी भी कुछ बचा लिया है—जो हमारे अधर्मों के बराबर नहीं काटा गया, वरन् कुछ को बचाए रखा गया। यह पाठ गहरी आत्म-परिक्षा और बहुत-से विश्वासियों के लिए प्रत्यक्ष प्रेरणा देता है कि परमेश्वर की उदारता से न तो वह हमसे पीछा छोड़ते हैं और न ही हमारे दोषों के साथ उसी प्रकार व्यवहार करते हैं।
अनुवादित संदर्भ का मूल भाव
यह आयत एक भारी पाप-चेतना के बीच है: लोगों ने अपने ही बुरे कामों और बड़े दोषों के कारण उपाय खोजे, परन्तु परमेश्वर ने दायित्व के संतुलन में उन्हें दंड से बचाए रखा। यह संकेत देता है कि परमेश्वर की करुणा और इन शिकायतों के बीच संतुलन रहता है: हमारे पापों के कारण कुछ दंड अवश्य आता है, परन्तु परमेश्वर की कृपा से कुछ को बचा लिया गया है। यह भी संकेत है कि वे अपने परमेश्वर के संदेह से बाहर नहीं गए, बल्कि उन्होंने अपनी राह में सुधार करने के अवसर पाए।
मुख्य संदेश
प्रेरक थीम्स और क्रॉस-रेफरंसेस
यह आयत निम्न प्रमुख विषयों से जुड़ती है:
क्रॉस-रेफरेंसे (संक्षिप्त explicación)
1) नीतिवचन 28:13–जो गुप्त पाप छिपाने वाला डरावना परिणाम दिखाता है, पर जो प्रता-उद्धार के साथ जाता है उसे मोक्ष मिलता है।
2) रोमियो 3:24–25—कथन कि उद्धार अनुग्रह से आता है, प्रताप से नहीं; हमारे अधर्मों के कारण दंड के बजाय कृपा दी जाती है।
3) यूहन् 1:9—यदि हम अपने पापों को स्वीकार करें, वह विश्वासी और न्याय्य है ताकि वह हमारे पापों को माफ करे और हमें शुद्ध करे।
छोटी-सी devotional चेतना
जीवन के कठिन समय में भी परमेश्वर की कृपा दिखाई देती है। हमारा व्यवहार यह दर्शाता है कि हम अपने दोषों से परे बढ़ना चाहते हैं—और यह विश्वास में एक नई दिशा बनाता है। अगर दण्ड की अनुभूति होती है, तो यह याद दिलाती है कि परमेश्वर की दया और उन्नति का रास्ता एक ही है: नम्रता, पश्चाताप और परिवर्तन।
Historical-Commentary तात्पर्य (संक्षेप समाकलन)
प्रसंगिक टिप्पणियाँ—मैथ्यू हेन्मे, अल्बर्ट बार्न्स, एडक Clarke आदि के सहारा से—यह दर्शाती हैं कि परमेश्वर की करुणा कठोर न्याय के साथ संतुलित है। वेधक विचार यह कि दोषों के बावजूद भी परमेश्वर कुछ लोगों को बचाए रखते हैं, ताकि उनकी कहानी में उद्धार की किरण बनी रहे।
ध्यान दें: यदि लेखकों के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध हों, तो उनका केवल छोटा-जुलाई उद्धरण यहाँ उल्लेखित किया जाएगा ताकि पाठक मूलभाव को पहचान सके।
संक्षिप्त निष्कर्ष
एज्रा 9:13 हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की दूरी नहीं है—वह हमें दया और मार्गदर्शन देता है, ताकि हम अपने अधर्म पर विजय पाकर जीवन-मार्ग पर चलें।