Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीएज्रा 9:9 बाइबल पद की व्याख्या
एज्रा 9:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हम दास तो हैं ही, परन्तु हमारे दासत्व में हमारे परमेश्वर ने हमको नहीं छोड़ दिया, वरन् फारस के राजाओं को हम पर ऐसे कृपालु किया, कि हम नया जीवन पाकर अपने परमेश्वर के भवन को उठाने, और इसके खण्डहरों को सुधारने पाए, और हमें यहूदा और यरूशलेम में आड़ मिली।
एज्रा 9:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 9:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 7:6 (HINIRV) »
यही एज्रा मूसा की व्यवस्था के विषय जिसे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने दी थी, निपुण शास्त्री था। उसके परमेश्वर यहोवा की कृपादृष्टि जो उस पर रही, इसके कारण राजा ने उसका मुँह माँगा वर दे दिया।

जकर्याह 2:5 (HINIRV) »
और यहोवा की यह वाणी है, कि मैं आप उसके चारों ओर आग के समान शहरपनाह ठहरूँगा, और उसके बीच में तेजोमय होकर दिखाई दूँगा'।”

एज्रा 9:9 का अर्थ और महत्व
यह पद हमारे लिए एक आशा-भरी और विनम्र स्मरण Scientist है: परमेश्वर ने बंदन में भी अपनी करुणा दिखाई, दासत्व के समय में भी उनकी सहायता स्वीकार की, ताकि वे फिर से पूजा-स्थल बना सकें। यह दावा करता है कि हर कठिन दौर के बीच परमेश्वर अपनी दया के सीमाहीन मार्ग खोलता है और स्वर्णिम अवसर देता है ताकि समुदाय अपना दायित्व निभा सके।
पुष्ट संदर्भ और मूल संदर्भवस्तु
यह पंक्ति Ezra के किताब के दौरान कहा गया है, जब यहूदा और यरूशलेम बंधन लौटने के बाद अपने मंदिर के पुनर्निर्माण की तैयारी कर रहे थे। फारस की साम्राज्य सत्ता के अधीन रहते हुए भी ईश्वर ने उनके दिलों को ऐसा धरम-उद्धार दिया कि वे पूजा-स्थल बनाने और पुरानी दिवंगत दीवारों को सुधारने के लिए प्रेरित हुए। यह एक दासत्व के समय की कड़वी अनुभूति के बाद की नई शुरुआत है, जिसमें यहूदी लोग परमेश्वर के भवन को पुनः स्थापित करने की दिशा में अग्रसर होते हैं।
मुख्य संदेश
गहराई से समझने योग्य बाइबिल थीम
1) परमेश्वर की विश्वासयोग्यता: यहोवा ने अपने वादों को भंग नहीं किया; भले ही परिस्थिति विपरीत हो, वह मार्ग दिखाता है।
2) पुनर्निर्माण और पुनःस्थापना: हर गिरावट के बाद भी पुनर्निर्माण की आशा रहती है; आध्यात्मिक पुनर्जीवन सामाजिक-धार्मिक अंतराल को पाटता है।
3) दायित्व की भावना: मंदिर—यानी परमेश्वर की उपस्थिति–के निर्माण से समुदाय का संघर्ष शांति और एकता की दिशा में बढ़ता है।
संदर्भ-समर्थन के cross-references (संक्षेप में)
- दानिएल 9:19-23: ईश्वर की दया और निबंधन के समय में यह दर्शाता है कि पराक्रम से अधिक प्रार्थना और आस्था का महत्व है।
- हबक्कूक 3:19: प्रभु ही हमारी शक्ति है; वह हमें चढ़ाई पर खड़ा रखता है और हमारे लिये विराम-स्थल बनाता है।
- नहेम्या 2:18: नया निर्माण प्रारम्भ हो, ईश्वर की इच्छा के अनुसार समुदाय एक होकर आगे बढ़े।
पुराने टिप्पणीकारों के संयोग (संक्षेप)
Matthew Henry ने कहा कि दासत्व के समय भी परमेश्वर की कृपा से नई आशा उत्पन्न होती है, और यह ibeere दायित्व-सम्बन्ध है। Albert Barnes ने इसे दया-युक्त स्वभाव के साथ जोड़ा, जो कठिन स्थितियों में भी परमेश्वर की सहायता व्यक्त करता है। Adam Clarke ने यह दर्शाया कि यह आत्म-उन्नयन का अवसर है, जहाँ पत्र-पत्रिकाओं का नहीं बल्कि आंतरिक परिवर्तन की मांग उठती है।
निष्कर्षित devotional reflection
हम सभी ऐसे समय से गुजरते हैं जब हम दासत्व-सी स्थिति में हों—परिवारिक, व्यक्तिगत या सामाजिक रूप में। यह पद यह बताता है कि परमेश्वर उन मुश्किल क्षणों के बीच भी हमारा हाथ थाम लेता है और हमें फिर से अपने उद्देश्य की ओर बुलाता है—खण्डहरों को फिर से जोड़ना, नये जीवन को भरपूर बनाना। यदि हम अपनी कमजोरियों को स्वीकार कर उन्हें परमेश्वर के हाथों में दे दें, तो वह आशा-रोशनी दिखाकर हमारे भीतर नया भवन बनाता है—प्रार्थना, पूजा और सेवा के लिए एक नया केन्द्र।