Old Testament
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एज्रा 9:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तो क्या हम तेरी आज्ञाओं को फिर से उल्लंघन करके इन घिनौने काम करनेवाले लोगों से समधियाना का सम्बन्ध करें? क्या तू हम पर यहाँ तक कोप न करेगा जिससे हम मिट जाएँ और न तो कोई बचे और न कोई रह जाए?
एज्रा 9:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 9:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 9:8 (HINIRV) »
फिर होरेब के पास भी तुमने यहोवा को क्रोधित किया, और वह क्रोधित होकर तुम्हें नष्ट करना चाहता था।

एज्रा 9:2 (HINIRV) »
क्योंकि उन्होंने उनकी बेटियों में से अपने और अपने बेटों के लिये स्त्रियाँ कर ली हैं; और पवित्र वंश इस ओर के देशों के लोगों में मिल गया है। वरन् हाकिम और सरदार इस विश्वासघात में मुख्य हुए हैं।”

व्यवस्थाविवरण 9:14 (HINIRV) »
इसलिए अब मुझे तू मत रोक, ताकि मैं उन्हें नष्ट कर डालूँ, और धरती के ऊपर से उनका नाम या चिन्ह तक मिटा डालूँ, और मैं उनसे बढ़कर एक बड़ी और सामर्थी जाति तुझी से उत्पन्न करूँगा।
एज्रा 9:14 का संदर्भ – संदर्भ परिचय
एज्रा 9 में यहूदियों के पुनर्निर्माण और पवित्रता की चुनौती सामने आती है जब उपनिषदों के अनुसार वे धीरे-धीरे अजनबी नीतियों और रिश्तों की जड़ें पकड़ रहे हैं। अध्याय 9 का प्रमुख विषय है—व्यक्ति, परमेश्वर के आह्वान के अनुरूप जीव-नीति और धार्मिक पवित्रता बनाए रखना, विशेषकर विवाह-संबंधों में जहां क्रिया पंथ और विवाह की पद्धति एक-साथ जाँच में आते हैं। 9:14 में यह कहा गया है कि यदि वे पुनः उन घिनौने संबंधों से समधियाना (परनिष्ठ) के माध्यम से जुड़ते हैं, तो क्या परमेश्वर का क्रोध और विनाश नहीं आ सकता? यह प्रश्न न केवल ऐतिहासिक घटना के बारे में है, बल्कि यह चेतावनी देता है कि पवित्रता और समुदाय की आचार-संयमहीनता किस प्रकार सामूहिक संकट लाती है।
मुख्य अर्थ
पद कहता है: यदि हमारा पथ वापस पाप के कारण दुष्ट समाज के साथ जुड़ जाए, तो क्या ईश्वर का विरोध नहीं बढ़ेगा और हमें पूरी तरह से मिटने से कौन बचा सकता है? एज्रा-समुदाय यह मानता है कि परमेश्वर के जंगल-चेहरे न्याय के बिना समाज एक खतरे में पड़ता है। इसलिए वे पाप से दूरी बनाकर पवित्रता को पुनः स्थापित करने की मांग कर रहे हैं।
तीन केंद्रीय विषय
प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसेस
1) डेन 9:27; 10:14-19—आख्यान यह दिखाते हैं कि सही समय पर पश्चाताप से परमेश्वर की कृपा पुनः प्रकट होती है, न कि केवल दंड।
2) 2 कुरिन्थ 6:14-17—अनेक पवित्रता और असाधारण रूप से धार्मिक संबंधों के परिणाम स्वरूप समुदाय के लिए निर्देश।
3) यशायाह 52:11—पवित्रता के मार्ग पर चलने का आह्वान, ताकि लोग अलग रहें और शुद्ध रहें।
विपल्लव विचार—व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज भी पवित्रता की दायित्वपूर्ण भावना समुदाय के भीतर संघर्षों से जूझती है—कभी-कभी सांस्कृतिक दबाव और व्यक्तिगत सम्बन्ध जोखिम पैदा करते हैं। ईमानदार पश्चाताप, स्पष्ट सीमाओं और समुदाय की जवाबदेही से हम अपनापन बनाए रखते हैं। परस्पर सम्मान और धार्मिक-संजीवता के लिए, असमानताओं के बीच भी सत्य-धर्म को प्राथमिकता दें।
संयुक्त सार
एज्रा 9:14 एक चेतावनी है कि घुलमिलकर पाप से न केवल व्यक्तिगत बल्कि सामुदायिक भय बन सकता है। पवित्रता के मार्ग पर गहराई से चलना, चर्चा-समझौते के साथ भी, यहूदियों के लिए एक नैतिक निर्देश रहा। रोशनी की तरह यह संदेश आज भी है—हम अपनी आस्था को बाहर से नहीं, बल्कि आंतरिक नियमन से सुरक्षित रखें।
संक्षिप्त उद्धरण (मिथक Precis)
यदि आवश्यक हो, नीचे दिए गए प्रमुख टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचारों का समायोजन हैं:
मैथ्यू हेनरी: पवित्रता के बिना आचरण का परिवर्तन अस्थिर है; समाज की नयी दृष्टि के लिए पश्चाताप आवश्यक है।
एल्बर्ट बार्न्स: समुदाय की नैतिकता से ही पथ संचालित होता है; विवाह और संबंधों के सीमाओं को समझना जरूरी है।
एडम क्लार्क: परमेश्वर के शासन के अनुसार आचरण-स्थिरता से ही विशुद्ध जीवन संभव होता है।
नोट: इन टिप्पणीकारों के विशिष्ट वाक्यांश यहाँ संक्षेप रूप में प्रयुक्त हैं; पूर्ण उद्धरण चाहिए तो मूल-टेक्स्ट देखें।