Old Testament
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एज्रा 9:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तब जितने लोग इस्राएल के परमेश्वर के वचन सुनकर बँधुआई से आए हुए लोगों के विश्वासघात के कारण थरथराते थे, सब मेरे पास इकट्ठे हुए, और मैं सांझ की भेंट के समय तक विस्मित होकर बैठा रहा।
एज्रा 9:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
एज्रा 9:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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एज्रा 10:3 (HINIRV) »
अब हम अपने परमेश्वर से यह वाचा बाँधे, कि हम अपने प्रभु की सम्मति और अपने परमेश्वर की आज्ञा सुनकर थरथरानेवालों की सम्मति के अनुसार ऐसी सब स्त्रियों को और उनके बच्चों को दूर करें; और व्यवस्था के अनुसार काम किया जाए।

निर्गमन 29:39 (HINIRV) »
एक भेड़ के बच्चे को तो भोर के समय, और दूसरे भेड़ के बच्चे को सांझ के समय चढ़ाना।

यशायाह 66:2 (HINIRV) »
यहोवा की यह वाणी है, ये सब वस्तुएँ मेरे ही हाथ की बनाई हुई हैं, इसलिए ये सब मेरी ही हैं। परन्तु मैं उसी की ओर दृष्टि करूँगा जो दीन और खेदित मन* का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो। (भज. 34:18, मत्ती5:3)
एज्रा 9:4 — तत्काल संदर्भ और उसका अभिप्राय
इस पद को पाठ के तुरंत दृश्य से पढ़ते हैं: नबूता के बाद इस्राएल के लोग परमेश्वर के वचन सुनकर उनके विश्वासघात के कारण बँधुआई से लौटे थे; तब कुछ लोग उनके साथ एक साथ आए और लेखक के अनुसार “सांझ की भेंट के समय तक विस्मित होकर बैठा रहा।” यह स्थिति एक गहरी तपिश भरी मांग को दर्शाती है—पश्चाताप, पुनर्स्थापना की इच्छा, और परमेश्वर के सामने अपने जोखिमपूर्ण दायित्व का अनुभव।
ईश्वर और आस्था के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
यह उद्धरण दिखाता है कि री-स्थापना का समय केवल भौतिक लौटना नहीं था, बल्कि धार्मिक और नैतिक स्थिति की पुनर्स्थापना भी थी। लोगों ने परमेश्वर के वचनों को सुना और अपने पुराने विश्वासघात की स्मृति से घबराकर संकेतित प्रतिक्रिया दी—यानी भय, ग्लानि और एक प्रकार की चुस्ती। यह संकेत देता है कि आस्था जीवन-चर्या में उतरनी चाहिए, न कि केवल घटनाओं के क्रम में।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य प्रासंगिक बाइबिल संदर्श
• हिब्रियों 12:1-2— धैर्य और धढ़े के साथ चलने की प्रेरणा, विश्वास की दौड़ में निरंतरता की मांग।
• एज्रा 3:11— आराधना के आरंभिक स्वर और परमेश्वर के नाम की महिमा का उद्घोष।
• 2 क्रां 7:14— यदि我的 लोग नम्र होकर प्रार्थना करें, तो परमेश्वर उपचार और पुनर्स्थापना देंगे।
ये सूत्र दिखाते हैं कि repentance और उत्साहपूर्ण आराधना एक साथ चलने पर ही पुनर्स्थापना संभव है, और यह समुदाय के लिए नई दिशा स्थापित करता है।
पूर्वापेक्षित पाठक के लिए आज की प्रेरणा
युवा या वृद्ध—हम सब के लिए यह संदेश है कि परमेश्वर के सामने एक नैतिक-जवाबदेही-भरा जीवन ही वास्तविक पुनर्स्थापना की कुंजी है। पुराने जोखिमों से सीख कर, ज्ञान-वाक्य को अपने व्यवहार में उतारना चाहिए: क्षेत्रीय निष्ठा, समुदाय के साथ सचेत आराधना, और व्यक्तिगत पवित्रता। संकट के समय में भी आशा बनी रहे जब हम विनम्रता से परमेश्वर के मार्ग पर चलें।
अनुरोधित उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सावधानीपूर्वक उल्लेख)
यदि उपलब्ध हों, तो नीचे के शॉर्ट उद्धरण उद्धरण स्वर में हैं—अनुवादित हिंदी टिप्पणी के साथ जो Original Commentary से प्रेरित है:
Matthew Henry: "To hear God's word with seriousness is the part of wisdom in those who fear Him."
Albert Barnes: "The people tremble at the thought of their former faithlessness, and this tremor is a sign of awakening conscience."
Adam Clarke: "The assembly of those who returned with Ezra shows that true repentance seeks the company of the sanctuary."
अर्थपूर्ण निष्कर्ष
वाख्यान यह है कि पुनर्स्थापना केवल लौटना नहीं है, बल्कि परमेश्वर के वचनों को जीवन में उतारना और समुदाय के साथ एक पवित्र आराधनात्मक जीवन बुनना है। इस क्षण का उद्देश्य यह है कि लोग अपनी पूर्व गलतियों से सीखें, आत्म-परख करें और विश्वास की सच्ची अनुग्रह-भरी राह पर चलें।