Old Testament
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एज्रा 9:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो तूने यह कहकर अपने दास नबियों के द्वारा दीं, 'जिस देश के अधिकारी होने को तुम जाने पर हो, वह तो देश-देश के लोगों की अशुद्धता के कारण और उनके घिनौने कामों के कारण अशुद्ध देश है, उन्होंने उसे एक सीमा से दूसरी सीमा तक अपनी अशुद्धता से भर दिया है।
एज्रा 9:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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एज्रा 9:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लैव्यव्यवस्था 18:24 (HINIRV) »
“ऐसा-ऐसा कोई भी काम करके अशुद्ध न हो जाना, क्योंकि जिन जातियों को मैं तुम्हारे आगे से निकालने पर हूँ वे ऐसे-ऐसे काम करके अशुद्ध हो गई हैं;

एज्रा 6:21 (HINIRV) »
तब बँधुआई से लौटे हुए इस्राएली और जितने और देश की अन्यजातियों की अशुद्धता से इसलिए अलग हो गए थे कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की खोज करें, उन सभी ने भोजन किया।

व्यवस्थाविवरण 12:31 (HINIRV) »
तू अपने परमेश्वर यहोवा से ऐसा व्यवहार न करना; क्योंकि जितने प्रकार के कामों से यहोवा घृणा करता है और बैर-भाव रखता है, उन सभी को उन्होंने अपने देवताओं के लिये किया है, यहाँ तक कि अपने बेटे-बेटियों को भी वे अपने देवताओं के लिये अग्नि में डालकर जला देते हैं।
एज्रा 9:11 – तत्कालीन संदर्भ और उसकी समझ
भगवान ने एज्रा को जो खबर दी, वह यह है कि समुद्र-सीमा के पार रहते हुए लोगों ने पृथ्वी के कानून के विरुद्ध अशुद्धता और घिनौने कर्म जारी रखे। यह संदेश उन लोगों के लिए था जो ईश्वर के प्रिय नगर और मंदिर के इतिहास से जुड़कर भी कर्मशील पथ से भटक चुके थे। एज्रा 9 में दूत के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि अशुद्ध देश वास्तव में मानवीय पाप के कारण नहीं, बल्कि वहाँ रहने वालों के दुष्कर्मों के कारण भी पवित्रता से दूर है; और यह तथ्य यह बताता है कि पवित्रता और पाप के बीच की दूरी परमेश्वर की जागरूक धर्मनिष्ठा से जुड़ी है।
ईश्वर और विश्वास के दृढ़ संकेत
यह पाठ दिखाता है कि ईश्वर पवित्र है, और उसकी इच्छा है कि उसके लोग अपने जीवन को उसकी पवित्रता के अनुसार समर्पित करें। बाइबल में यह बार-बार दिखता है कि पाप एक सामुदायिक समस्या बन सकता है—जब नैतिक मानक टूटते हैं, तब आदर्श समुदाय की पवित्रता क्षीण होती है। इबादत के स्थान और सामाजिक व्यवहार में दोष आना, सीधे-सीधे ईश्वर के राज्य के विरुद्ध है।
मुख्य शब्द और भावों की स्पष्टता
अन्य संदर्भ के संकेत
1) उन कारणों के प्रति सजग करें जो बंधन को तोड़ते हैं—नियमों की उपेक्षा बनाम आस्थाओं की सच्ची प्रतिबद्धता। 2) पाप की सामूहिक प्रकृति—समुदाय के व्यवहार से ईश्वर की स्वीकृति या अस्वीकृति उभरती है। 3) विजयी पुनःस्थिति—आनंदित पुनर्स्थापना के लिए लोक-जीवन में एक नयी पवित्रता का आरंभ आवश्यक है।
अनुक्रमणीय क्रॉस-रेफरेंस
- संदर्भ 1: एक ऐसे समय में जहाँ लोग पवित्रता के मानक से दूर हो जाते हैं, परमेश्वर की इच्छा है कि धर्म-आचरण सत्य और दृढ़ हो। (आमतौर पर ऐसी धारणा “हन”)
- संदर्भ 2: समुदायिक पवित्रता के महत्व पर बल देता है—जो व्यक्तिगत आचरण में भी प्रतिबिंबित होता है।
- संदर्भ 3: पाप की पहचान और उसकी मानवीय परछाईयों से निपटना, ताकि ईश्वर के वचन के अनुरूप जीवन संभव हो।
नोट: उपरोक्त क्रॉस-रेफरेंस केवल संदर्भात्मक संकेत हैं; यदि आप वास्तविक पदों के शब्दों का संक्षेप नहीं, तो पूर्ण वाक्यांश नहीं दिया गया है।
आज के लिए आवेदन
हमारा दायित्व है कि अपने जीवन के हर क्षेत्र में परमेश्वर की पवित्रता की खोज करें—व्यवसाय, परिवार, और समुदाय में। बाइबल कहता है कि पवित्रता केवल धार्मिक क्रियाओं से नहीं, बल्कि नैतिक जीवन के हर पहलू से निकलती है। अगर हम समाज में अशुद्ध आचरण के प्रभाव को चाह-तोड़कर रोक दें, तो ईश्वर का स्वागत-विसर्जन सही रूप से संभव होगा।
संक्षिप्त सार
एज्रा 9 का यह पाठ यह दिखाता है कि पवित्रता बहु-आयामी है: व्यक्तियों से समाज तक, बाहरी (देश-देश) से आंतरिक (दिल की अवस्था) तक। ईश्वर के मानक के अनुरूप sốngने के लिए एक साथ आस्था और आचरण की निरंतर चैतना आवश्यक है।