Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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न्यायियों 16:20 पर टिप्पणी — शिमशोन और यहोवा की उपस्थिति
सीधे अर्थ का अभिवचन: पलिश्तियों के हाथों में शिमशोन के पतन का क्षण उस समय है जब वह यहोवा की शक्ति से विनष्ट हो जाने की प्रतीक्षा करता है, और उसकी माँग-सी प्रतिक्रिया “यहोवा चला गया है” का संकेत देता है कि परमेश्वर अब उसकी शक्ति के साथ साथ नहीं है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह कथन न्यायियों के कथा-क्रम में शिमशोन के साथ घटते घटनाक्रमों का एक निर्णायक क्षण है। सुरक्षा के लिए बलपूर्वक विभूति मांगने के बाद भी उसकी शक्ति एक बार नहीं, बार-बार घायल हो चुकी थी; और अगले पल वह यह समझ नहीं पाया कि यह अवरोध यहोवा की उपस्थिति से नहीं, बल्कि पलिश्तियों की चालाकियों से जुड़ा था। यहोवा ने जो शक्तिपात्र उसे दिया था, वह तभी प्रकट होता है जब यहोवा इच्छा देता है; यहाँ उसकी इच्छा के अभाव में वह वास्तव में खाली हाथ है।
व्याख्यात्मक विचार
पवित्रशास्त्रीय क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त टिप्पणी
1) दाऊद–शीतलता और कृपा: परमेश्वर के साथ न रहने पर राजसी दया और सुरक्षा नहीं रहती, चाहे व्यक्ति कितना भी सक्षम क्यों न हो।
2) परमेश्वर का आह्वान—यशायाह 9:6 प्रकार के संदेश: राजा के बारे में ज्ञान और शक्ति तब तक नाम नहीं लोगे जब तक परमेश्वर की योजना साथ न हो।
3) शाब्दिक-सहयोग: यहोवा की उपस्थिति का महत्त्व: यहोवा की हरकतें और उसकी इच्छा ही सच्चे शक्ति-स्तर तय करते हैं, चाहे इंसान कितना भी प्रयत्नशील हो।
दृष्टिकोण से संबंधित अर्थपूर्ण उद्धरण (public-domain टिप्पणियाँ)
Matthew Henry से: “God may take away our strength when our hearts are not united to Him.”
Albert Barnes से: “When God withdraws His power, the vain reliance on outward skill is exposed.”
Adam Clarke से: “Man proposes, God disposes; the defeat in moments of self-complacency reveals this truth.”
इन छोटे उद्धरणों के शब्द स्पष्ट करते हैं कि शिमशोन की असली सुरक्षा परमेश्वर की उपस्थिति में है, न कि अपनी चालाकी में।
संक्षिप्त थीमैटिक निष्कर्ष
संक्षिप्त प्रायोगिक takeaway
कठिन समय में जोश बढ़ाने के बजाय, परमेश्वर के साथ अपनी निर्भरता को मजबूत करें। बाहरी चतुराई पर नहीं, यहोवा की इच्छा पर टिके रहें।
कथन-निष्कर्ष
यह वाक्य दर्शाता है कि सफलता और शक्ति केवल परमेश्वर के साथ सहभागी रहने से आती है; जब हम अपनी क्षमता पर निर्भर रहते हैं, तब परमेश्वर अपनी निकटता घटाते हैं। शिमशोन के अनुभव से यह शिक्षा मिलती है कि इतिहास का मुख्यमंत्री वही है जो हमारे साथ रहता है और जो चाहता है, वही होता है।