Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 5:1 न्यायियों 5:2 न्यायियों 5:3 न्यायियों 5:4 न्यायियों 5:5 न्यायियों 5:6 न्यायियों 5:7 न्यायियों 5:8 न्यायियों 5:9 न्यायियों 5:10 न्यायियों 5:11 न्यायियों 5:12 न्यायियों 5:13 न्यायियों 5:14 न्यायियों 5:15 न्यायियों 5:16 न्यायियों 5:17 न्यायियों 5:18 न्यायियों 5:19 न्यायियों 5:20 न्यायियों 5:21 न्यायियों 5:22 न्यायियों 5:23 न्यायियों 5:24 न्यायियों 5:25 न्यायियों 5:26 न्यायियों 5:27 न्यायियों 5:28 न्यायियों 5:29 न्यायियों 5:30 न्यायियों 5:31



न्यायियों 5:26 का अर्थ और संदर्भ
इस पद का तात्प्य यह है कि सीसरा पर विजय पाने के लिए एक निर्णायक, क्रियाशील हाथ उठता है। अपराधी के प्रति न्याय का हाथ कड़ा होता है और परमेश्वर की प्रतिज्ञा-पुस्तक में वर्णित संघर्षों में यह दृश्य एक रूपक के समान है: दुष्ट सत्ता के विरुद्ध कदम उठते हैं और उसे उसका अंत दिखता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीति-न्याय के अगुआद्वय के समय, इस पुस्तक के समय प्रभु की ज्योति तेरी-तेरी सेना के साथ युद्ध में है। गिदोन, सपन्या, तथा अन्य विद्रोही नेतृत्व के विरुद्ध इस युद्ध-यज्ञ का भाग यह है कि प्रभु के लोग के भीतर से ही विजय का मार्ग निकलता है। यहाँ सीसरा एक प्रमुख प्रतिपक्षी के रूप में है, जिसे डेरा डाल कर रखा गया है और जिसकी शक्ति इस प्रकरण में असफल होती है जब वह निर्णयात्मक सेपरेटर्स तक पहुंचता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
नैतिक और थीमेटिक दृष्टिकोण
क्रॉस-रेफरेंसेज और उनका संक्षिप्त संदेह
1) अस्थिर नीति के विरुद्ध निर्णायक क्रिया: परमेश्वर के निपटारे में संघर्ष का अन्तःकरण यही बताता है कि सांसारिक सत्ता के विरुद्ध उच्चतम न्याय कैसे पूरा होता है।
2) प्रभु का न्याय और विश्वास-आधे: विश्वास के साथ क्रिया लेकर उठना वही मार्ग है जो जीत लाता है।
3) पाप के दुष्टों का अंत: जब पाप को ठोस रूप से चुनौती दी जाती है, तब उसका कटु परिणाम सामने आता है।
संक्षिप्त उपयोगी हिदायत
सूक्ष्म संदर्भ-उद्धरण (ऐतिहासिक-टीका से)
यहां Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-रेफरेंस से संदर्भ मिलते हैं:
Matthew Henry: "The present line of conduct shows resolute and divine discipline against oppressive power."
Albert Barnes: "Divine justice here manifests itself in decisive act against the leaders who opposed God's people."
Adam Clarke: "The stroke upon his head denotes not mere conquest, but complete overthrow of the adversary."
पूर्ण विचार का समापन
न्यायियों 5:26 में दिखाई गयी क्रिया-प्रधान विजय एक चेतावनी है कि परमेश्वर के लोग जब सत्य-निष्ठा के साथ मिलकर क्रियाशील रहते हैं, तब दुष्ट सत्ता के विरुद्ध निर्णायक पराक्रम संभव होता है। यह उद्धार का मार्ग है कि संघर्ष से पहले और बाद दोनों में परमेश्वर की योजना पूरी होती है.