Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 5:1 न्यायियों 5:2 न्यायियों 5:3 न्यायियों 5:4 न्यायियों 5:5 न्यायियों 5:6 न्यायियों 5:7 न्यायियों 5:8 न्यायियों 5:9 न्यायियों 5:10 न्यायियों 5:11 न्यायियों 5:12 न्यायियों 5:13 न्यायियों 5:14 न्यायियों 5:15 न्यायियों 5:16 न्यायियों 5:17 न्यायियों 5:18 न्यायियों 5:19 न्यायियों 5:20 न्यायियों 5:21 न्यायियों 5:22 न्यायियों 5:23 न्यायियों 5:24 न्यायियों 5:25 न्यायियों 5:26 न्यायियों 5:27 न्यायियों 5:28 न्यायियों 5:29 न्यायियों 5:30 न्यायियों 5:31



न्यायियों 5:20 — आकाश और सितारे भी लड़ते रहे
सूक्ति की पंक्ति युद्ध के समय की चमत्कारी घटनाओं को दर्शाती है: “आकाश की ओर से भी लड़ाई हुई; वरन् तारों ने अपने-अपने मण्डल से सीसरा से लड़ाई की।” यह कविता गीतों में बाईबल के देखा गया है कि परमेश्वर की सेना और प्रकृति एक साथ घटित हो कर यहाँ की लड़ाई को प्रभावित करती है। यह पंक्ति ऐतिहासिक कथा में यह दर्शाती है कि योद्धाओं के साथ- साथ परमेश्वर का समृद्ध आशीर्वाद और आकाशीय शक्तियाँ भी सिकन्दर के विरुद्ध सचेत रहती हैं।
ईश्वरीय रक्षा का सेटिंग: परमेश्वर के साथ से युद्ध की गार्द
यह संदर्भ दर्शाता है कि प्रभु अपनी खोज-युद्ध में पृथ्वी से परे एक व्यापक सहायता प्रदान करते हैं। आकाशयुद्ध का दृश्य यह संकेत देता है कि लड़ाई केवल मानव औजारों की नहीं, बल्कि परमेश्वर के नियंत्रण में है। छाया और प्रकाश दोनों एक साथ काम करके सीसरा के विरुद्ध विजय सुनिश्चित करते हैं। यह विश्वासक्षम पाठ यह सिखाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की शक्ति और आशीष सक्रिय रहती है, और वह प्रकृति की रचना को भी अपने उद्देश्य के अनुसार चलाते हैं।
पवित्र शब्दों की सरल व्याख्या
अन्य धर्मग्रंथों से सम्बद्ध पन्नी
- हवेली के गीतों में भी प्राकृतिक साक्ष्यों को उद्धृत किया गया है कि परमेश्वर अवसर-समये अपनी शक्ति दिखाते हैं।
- यह विचार रोम 8:28 के सार के समान है जिसमें कहा गया है कि परमेश्वर की सब बातें मिलकर भलाई के लिए चलती हैं; यद्यपि यहाँ युद्ध-स्थिति है, पर प्रभु की नियंत्रण-योजना स्पष्ट है।
मूल संदर्भों से निकाले गए निष्कर्ष
1) परमेश्वर की सहायता पृथ्वी-स्वल्प नहीं, पर आकाशीय शक्तियाँ भी समृद्ध भूमिका निभाती हैं।
2) संकट के समय में विश्वास तब मजबूत होता है जब हम प्रभु की राजधानी और उसकी सामर्थ्य पर आश्रय लेते हैं।
आज के लिए लागू निष्कर्ष
- कठिन परिस्थिति में भय से नहीं, परमेश्वर की सत्ता और प्रेम पर भरोसा रखें।
- परिस्थितियाँ हाँ या नाकामयाब हो सकती हैं, पर ईश्वर का मार्ग स्पष्ट रहता है; उसे मानना और उसकी योजना में समरत होना चाहिए।
कथा-उद्धृत मार्गदर्शन (सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संदर्भ से)
लेखक ऐतिहासिक और धार्मिक चिंतन के अनुसार, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसी रचनाओं से मिलते-जुलते विचार मिलते हैं: उन सभी ने युद्ध-स्थिति में परमेश्वर की सहायता, सांसारिक संघर्षों के पीछे ईश्वरीय उद्देश्य, और प्रकृति-का-युद्ध के संकेतों पर बल दिया है।
उद्धरण रेखा: “युद्ध-स्थिति में परमेश्वर की शक्ति को मानना चाहिए; पृथ्वी पर जो भी हो, आकाशीय सत्ता भी प्रभु के अधीन है।”
Cross-references (संक्षेपित और जहां योग्य)
1) (उद्धृत पल्लव) परंतु रोम 8:28 की भावना से मिलता-जुलता विचार कि परिस्थितियाँ भी परमेश्वर के उद्धार के लिए काम करती हैं।
2) (अन्य संदर्भ) पुर्नोद्घाटन 12:12-फरिश्ते और पृथ्वी के संघर्षों के बीच प्रभु की सहायता का संकेत देते हैं।
3) (संदर्भ) भजन 46:2-3 जहाँ परमेश्वर की सुरक्षित बैठकी के साथ प्रकृति की ऐसी घटनाओं का वर्णन है जो भय न उत्पन्न करें।