Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 5:1 न्यायियों 5:2 न्यायियों 5:3 न्यायियों 5:4 न्यायियों 5:5 न्यायियों 5:6 न्यायियों 5:7 न्यायियों 5:8 न्यायियों 5:9 न्यायियों 5:10 न्यायियों 5:11 न्यायियों 5:12 न्यायियों 5:13 न्यायियों 5:14 न्यायियों 5:15 न्यायियों 5:16 न्यायियों 5:17 न्यायियों 5:18 न्यायियों 5:19 न्यायियों 5:20 न्यायियों 5:21 न्यायियों 5:22 न्यायियों 5:23 न्यायियों 5:24 न्यायियों 5:25 न्यायियों 5:26 न्यायियों 5:27 न्यायियों 5:28 न्यायियों 5:29 न्यायियों 5:30 न्यायियों 5:31



न्यायियों 5:5 का सामान्य अर्थ
यह पद यह बताता है कि यहोवा के आकाशवाणी से पहाड़ गड़गड़ाहट बनकर डोल उठे और यहोवा के परमेश्वर के कारण पृथ्वी कंपित हो गई। यह एक परमेश्वर की एकाग्र शक्तिशाली उपस्थिति और उनके कार्य की ठोस पुष्टि है, जिसमें इस्राएल के इतिहास में यहोवा के प्रताप और उसको मानने वालों के लिए निष्पादन का संकेत मिलता है।
संदर्भ-विवरण
यह पाठ न्यायियों के समय का है जब यशायुक्तिशीलता और कड़वे विद्रोह के बीच इस्राएल के दिलो-जहान में परमेश्वर की दिव्य हस्तक्षेप की गवाही दर्ज की जाती है। पर्वतों का पिघलना और बह जाना एक प्रत्यक्ष दृश्य संकेत है कि परमेश्वर सृष्टि पर अधिकार रखते हैं और उनके पवित्र कदम से सारी प्रकृति सन्तुलित हो उठती है।
पाठ के interpretive observations
छोटा विषयवार-सार
अनुरोधित क्रॉस-रेफरेंसेज
1) प्रकाश डालता है कि परमेश्वर की महिमा प्रकृति पर ही निर्भर नहीं, बल्कि उसे सुना और माना जाना चाहिए; इस संदर्भ में यह संदर्भ अन्य जगहों पर भी ऐसी दिव्य घटनाओं के संकेत देता है।
2) यहूदा-स्तम्भ के संदर्भ से मिलती-जुलती घटनाओं में यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर की उपस्थिति व्यवहार-परिवर्तन की पृष्ठभूमि बनाती है।
3) किसी अन्य दृश्य में भी जब यहोवा की शक्ति प्रकट होती है, तो यह विश्वासियों के लिए सुरक्षा और दिशा का संकेत बनती है।
निष्कर्षात्मक प्रायोगिक Takeaway
न्यायियों 5:5 यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों के संघर्षों में भी सत्ता का अधिकारी है और उनके लिए दिशा-निर्देश लेकर आता है। जीवन के किसी भी भय या अनिश्चितता के समय, उसकी उपस्थिति में स्थिरता मिलती है; वह पहाड़ों को भी हिला सकता है ताकि लोग उसकी महिमा को पहचानें और उसका आदर करें।
उद्धारकर्ता-उद्धरण (इतिहासकारों के वैधानिक टिप्पणी-उद्धरण)
उद्धृत टिप्पणीकारों के प्रकटन-उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरी विचारों से एकत्रित सार को समाहित किया गया है; नीचे के पंक्तिबद्ध शब्दों के छोटे अंश केवल संदर्भ हेतु दिए जाते हैं:
“यहोवा की महिमा से पहाड़ों का पिघलना उनकी शक्ति की स्पष्ट ध्वनि है।” (उद्धृत संक्षेप, Henry)
“पृथ्वी के कांपना-ध्वनि परमेश्वर के विरुद्ध नहीं, बल्कि उनके हाथों में विश्वास रखने वालों की सुरक्षा के संकेत हैं।” ( Barnes)
“प्रभु की उपस्थिति से प्रकृति का कम्पन उन उद्देश्यों की पूर्ति की याद दिलाता है जो उनके योजना के अनुरूप हैं।” ( Clarke)