न्यायियों 7:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए तू जाकर लोगों में यह प्रचार करके सुना दे, 'जो कोई डर के मारे थरथराता हो, वह गिलाद पहाड़ से लौटकर चला जाए'।” तब बाईस हजार लोग लौट गए, और केवल दस हजार रह गए।

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न्यायियों 7:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

न्यायियों 7:3 पर टिप्पणी

यह पद गिलएद के सैनिकों के चयन के पाठ का भाग है। युद्ध से पहले यह परमेश्वर की योजना को स्पष्ट करने के लिए निर्देश देता है कि किन सैनिकों को युद्ध के लिए चुना जाएगा। जो डर सकते थे, वे बाहर चले जाएं—ताकि शुद्ध, दृढ़ और एकजुट बल मिल सके। परिणामस्वरूप 22,000 लोग लौट गए, और 10,000 टिके रहे।

मुख्य अर्थ

यह वचन भय और विश्वास का परीक्षण है। परमेश्वर ने एक बड़ी सेना के विरुद्ध स्पष्ट योजना बनाई: जो लोग आत्मिक और नैतिक रूप से दृढ़ नहीं हैं, वे हथियारबंद योद्धा बनकर असफलता का कारण बन सकते हैं। डर के कारण बाहर जाने वाले लोग कहते हैं कि वे युद्ध के दायरे में नहीं टिक पाएंगे। इससे यह सिद्ध होता है कि परमेश्वर अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए परम-पवित्र गहराई से संयोजन और आत्म-नियंत्रण चाहता है।

मुख्य विषय

  • डर का परीक्षण: क्या डर के बावजूद भगवद् उद्देश्य बना रहता है, यह दिखाने के लिए यह चयन किया गया।
  • परमेश्वर की योजना में चयन: यह संख्या-निर्धारण नहीं, बल्कि तैयार, एकजुट और समर्पित दल के चयन का नियम है।
  • वचनों की स्पष्टता और निष्कपटता: यह निर्देश אמת के साथ युद्ध की दिशा तय करता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस

– न्यायियों 7:2: परमेश्वर यह दिखाते हैं कि उन्नत विजय के लिए विनम्र और छोटा समूह पर्याप्त हो सकता है, ताकि परमेश्वर की महिमा स्पष्ट रहे।

– भजन 56:3-4: भय के समय परमेश्वर पर भरोसा रखने का संदेश—जो भय का सामना करता है, वह विश्वास से संतुलित हो कर आगे बढ़े।

– 2 कोरिंथियों 12:9-10: कमजोरी में भी शक्ति मिलती है; यदि हम निर्भर रहें, तो कमियों के बीच भी सफलता मिलती है।

उद्धरण-निर्भर दृष्टि (पवित्र-पूर्व-उद्धरण)

यदि संरेखित उद्धरण देखें, तो में हलके रूप में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मुक्त निष्कर्षों से, वे भय से मुक्त होकर परमेश्वर की योजना के प्रति दृढ़ रहने की महत्ता बताते हैं। (इन विद्वानों के स्पष्ट शब्द सीधे उद्धृत नहीं किये गए हैं, पर उनके विश्लेषण इस पाठ के विचार को पुष्ट करते हैं।)

व्यावहारिक व्याख्या

आज के लिए यह पाठ यह सीख देता है: कठिनाई के समय भी एक संयत, निष्ठावान समूह ही आगे बढ़ेगा। आत्म-नियंत्रण, साहस और समुदाय की एकता परमेश्वर की योजनाओं को साकार करने के लिए आवश्यक ठहरती है। डर के कारण बार-बार पीछे हटना नहीं, बल्कि विश्वास को उभारना चाहिए—तब ही बड़ा उद्देश्य पूरा होता है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

न्यायियों 7:3 बताता है कि परमेश्वर किस तरह भय को एक परीक्षण के रूप में उपयोग कर सकते हैं ताकि वे नाप-तौल कर तय करें कि किसे आगे रखा जाना है। छोटे पर मजबूती से भरपूर समूह बनकर ही विजय संभव है, और यहूदियों के संदिग्धरण से भी ऊपर उठकर परमेश्वर की महिमा दिखती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

न्यायियों 7:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इसके अलावा सरदार सिपाहियों से यह भी कहें, 'कौन-कौन मनुष्य है जो डरपोक और कच्चे मन का है, वह भी अपने घर को लौट जाए, ऐसा न हो कि उसको देखकर उसके भाइयों का भी हियाव टूट जाए।'

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प्रकाशितवाक्य 17:14 (HINIRV) »
ये मेम्‍ने से लड़ेंगे, और मेम्‍ना उन पर जय पाएगा; क्योंकि वह प्रभुओं का प्रभु, और राजाओं का राजा है*, और जो बुलाए हुए, चुने हुए और विश्वासयोग्य है, उसके साथ हैं, वे भी जय पाएँगे।”

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मत्ती 20:16 (HINIRV) »
इस प्रकार जो अन्तिम हैं, वे प्रथम हो जाएँगे* और जो प्रथम हैं वे अन्तिम हो जाएँगे।”

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