Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 7:1 न्यायियों 7:2 न्यायियों 7:3 न्यायियों 7:4 न्यायियों 7:5 न्यायियों 7:6 न्यायियों 7:7 न्यायियों 7:8 न्यायियों 7:9 न्यायियों 7:10 न्यायियों 7:11 न्यायियों 7:12 न्यायियों 7:13 न्यायियों 7:14 न्यायियों 7:15 न्यायियों 7:16 न्यायियों 7:17 न्यायियों 7:18 न्यायियों 7:19 न्यायियों 7:20 न्यायियों 7:21 न्यायियों 7:22 न्यायियों 7:23 न्यायियों 7:24 न्यायियों 7:25



न्यायियों 7:3 पर टिप्पणी
यह पद गिलएद के सैनिकों के चयन के पाठ का भाग है। युद्ध से पहले यह परमेश्वर की योजना को स्पष्ट करने के लिए निर्देश देता है कि किन सैनिकों को युद्ध के लिए चुना जाएगा। जो डर सकते थे, वे बाहर चले जाएं—ताकि शुद्ध, दृढ़ और एकजुट बल मिल सके। परिणामस्वरूप 22,000 लोग लौट गए, और 10,000 टिके रहे।
मुख्य अर्थ
यह वचन भय और विश्वास का परीक्षण है। परमेश्वर ने एक बड़ी सेना के विरुद्ध स्पष्ट योजना बनाई: जो लोग आत्मिक और नैतिक रूप से दृढ़ नहीं हैं, वे हथियारबंद योद्धा बनकर असफलता का कारण बन सकते हैं। डर के कारण बाहर जाने वाले लोग कहते हैं कि वे युद्ध के दायरे में नहीं टिक पाएंगे। इससे यह सिद्ध होता है कि परमेश्वर अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए परम-पवित्र गहराई से संयोजन और आत्म-नियंत्रण चाहता है।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेंसेस
– न्यायियों 7:2: परमेश्वर यह दिखाते हैं कि उन्नत विजय के लिए विनम्र और छोटा समूह पर्याप्त हो सकता है, ताकि परमेश्वर की महिमा स्पष्ट रहे।
– भजन 56:3-4: भय के समय परमेश्वर पर भरोसा रखने का संदेश—जो भय का सामना करता है, वह विश्वास से संतुलित हो कर आगे बढ़े।
– 2 कोरिंथियों 12:9-10: कमजोरी में भी शक्ति मिलती है; यदि हम निर्भर रहें, तो कमियों के बीच भी सफलता मिलती है।
उद्धरण-निर्भर दृष्टि (पवित्र-पूर्व-उद्धरण)
यदि संरेखित उद्धरण देखें, तो में हलके रूप में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मुक्त निष्कर्षों से, वे भय से मुक्त होकर परमेश्वर की योजना के प्रति दृढ़ रहने की महत्ता बताते हैं। (इन विद्वानों के स्पष्ट शब्द सीधे उद्धृत नहीं किये गए हैं, पर उनके विश्लेषण इस पाठ के विचार को पुष्ट करते हैं।)
व्यावहारिक व्याख्या
आज के लिए यह पाठ यह सीख देता है: कठिनाई के समय भी एक संयत, निष्ठावान समूह ही आगे बढ़ेगा। आत्म-नियंत्रण, साहस और समुदाय की एकता परमेश्वर की योजनाओं को साकार करने के लिए आवश्यक ठहरती है। डर के कारण बार-बार पीछे हटना नहीं, बल्कि विश्वास को उभारना चाहिए—तब ही बड़ा उद्देश्य पूरा होता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
न्यायियों 7:3 बताता है कि परमेश्वर किस तरह भय को एक परीक्षण के रूप में उपयोग कर सकते हैं ताकि वे नाप-तौल कर तय करें कि किसे आगे रखा जाना है। छोटे पर मजबूती से भरपूर समूह बनकर ही विजय संभव है, और यहूदियों के संदिग्धरण से भी ऊपर उठकर परमेश्वर की महिमा दिखती है।