मत्ती 20:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इस प्रकार जो अन्तिम हैं, वे प्रथम हो जाएँगे* और जो प्रथम हैं वे अन्तिम हो जाएँगे।”

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मत्ती 20:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 20:16 पर अभिवचन: आखिर में पहले, और पहले आखिर

यह वचन एक ऐसी अवस्था को उजागर करता है जिसमें परमेश्वर की कृपा और सृष्टि का मूल्यांकन मानवीय मापदंडों से परे हो जाता है। अक्सर लोग शक्ति, प्रतिष्ठा और समय-प्राप्ति के आधार पर इनाम-नियतियाँ बनाते हैं; पर यीशु का this उलटा सिद्धांत हमें याद दिलाता है कि ईश्वर का अग्रग्रहण और पुरस्कार उनके राज्य में आकार-प्रकार से नहीं, बल्कि उनकी दया और मृत्यु तक सेवकाई करने के उत्तरदायित्व से निर्धारित होता है।

पुष्टि-परिप्रेक्ष्य: मूल संदर्भ

यह उद्धरण उन दासीय वाक्यों के समूह का निष्कर्ष है, जिनमें खेत में काम करने वाले मजदूरों के दानिशमंदता-नियम पर बहस हो रही थी। एक ही दिन में काम शुरू करने वाले हर समूह को अलग-अलग समय पर वेतन मिलते दिखे; शाम को लोगों को बुलाकर बराबर वेतन दिया गया। यीशु यहाँ स्पष्ट करते हैं कि राज्य-स्वरुप योजना एक नैतिक-आकाशीय व्यवस्था है जिसमें देय पुरस्कार की प्रकृति उनके काम के समय या सामाजिक स्थिति पर नहीं, बल्कि ईश्वर की उदार दया पर निर्भर रहती है।

मुख्य संदेश

1) ईश्वर की कृपा सार्वभौमिक और देय नहीं है।

2) Kingdom‑of‑God के भीतर पुरस्कार से पहले सेवकाई की भूमिका है; जो अन्त में आता है, वही परमधाम में उच्च पद पर हो सकता है।

3) मानव दृष्टिकोण से स्थापित बराबरी भी कभी-कभी ईश्वर की योजना के अनुरूप नहीं होती; ईश्वर का न्याय और दयालुता उसकी स्वतंत्रता और संहिता के अनुसार है।

बाइबल थीम से सम्बद्ध संकेत

  • कृतज्ञता और दया: विभिन्न समय पर बुलाये गये मजदूर एक समान वेतन पाकर भी संतुष्ट रहते हैं, यह दर्शाता है कि परमेश्वर की दया निर्बाध है और उसे मानवीय तुलनाओं से नहीं मापा जा सकता।
  • न्याय बनाम कृपा: यह पाठ हमें बताता है कि राज्य में पुरस्कार का मूल्य मनुष्यों की तुलना से नहीं, बल्कि परमेश्वर की उदारता और शासन-मानदंड से तय होता है।
  • आत्म-उद्धार का तत्त्व: जो आख़िर में आकर भी सेवकाई करता है, उसे अंतिम समय में भी सम्मान मिल सकता है; यह प्रेरित करता है कि जीते-जी का परिणाम जीवनभर के लिए नहीं, बल्कि ईश्वर के योजना-क्रम के अनुसार होता है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में, बिना पूर्ण पद के उद्धरण)

1) लूका 15:11-32 (परोपकार की दया और पिता के प्रेम का चित्र): दया और समान-भाव से भरे रिश्ते का महत्व बताता है।

2) रोमियों 9:14-16 (चयन और दया): परमेश्वर की दयालुता उसकी स्वतंत्रता में निहित है, मानव कल्पनाओं से बढ़कर।

3) इब्रांयी 13:8 (युग-युग में स्थिर): प्रभु यीशु ईश्वर के समान और एक समान दया-उपकार के प्रतीक हैं; परिवर्तनशीलता से परे स्थिरता दिखाते हैं।

पूर्वदृष्टि-व्याख्या: एडवर्ड, तथा अन्य उद्धरण

यहाँ पर एड्वर्ड और पारंपरिक पवित्र-वचन विश्वदृष्टि के अनुसार, दया की गहराई का तात्पर्य यह है कि परमेश्वर न्याय-प्रणेता होकर भी दयालु है, और उसकी योजना मानव-यथार्थ से परे है। उनके विचार से इस पाठ का उद्देश्य यह है कि ईश्वर की भूमिका में हमारी तुलना-परख निष्क्रिय होनी चाहिए; हमें अपनी सेवकाई और आस्था के अनुसार आत्म-समर्पण रखना चाहिए।

एक संक्षिप्त प्रार्थना-आत्म-चिन्तन

प्रभु, तू अपनी दया से मुझे शिक्षा दे कि मैं अपने जीवन की कीमत तुच्छ मोल-टोल में न लगाऊँ। तू जिस पश्चात्ताप-पूर्वक दया दिखाए, उसे स्वीकार करूँ और अपने समय के अनुसार दूसरों के प्रति नम्रता रखूँ। तू मुझे सचेत रख कि राज्य में मेरा स्थान तेरे प्रेम और सेवा के अनुसार निर्धारित हो।

संक्षिप्त उपयोगी संदर्भ सूची

• राज्य-योजना में दया की भूमिका समझना

• ईश्वर के न्याय और कृपा के बीच संतुलन

• सेवकाई में समान मूल्य और भिन्न समय

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 20:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु बहुत सारे जो पहले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, पहले होंगे।

मरकुस 10:31 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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पर बहुत सारे जो पहले हैं, पिछले होंगे; और जो पिछले हैं, वे पहले होंगे।”

मत्ती 22:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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क्योंकि बुलाए हुए तो बहुत है परन्तु चुने हुए थोड़े हैं।”

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