Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या — मत्ती 20:8
यह पद दीन-रात के मजदूरों की दृष्टान्त कथा का हिस्सा है। येशू एक दाख बारी के मालिक की भाँति स्वर्ग और वहां के न्याय की बात कर रहे हैं। मालिक ने शाम को अपने भण्डारी से आदेश दिया कि मजदूरों को, जो आज अलग-अलग समय पर आये थे, “पिछले से लेकर पहले तक” समान रूप से मजदूरी दी जाए। यह वाक्य प्रभु की रहम और राजा के न्याय के अद्वितीय स्वरूप को उजागर करता है।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि स्वर्गीय न्याय समानता के मानक से अधिक, दया और कृपा पर आधारित है। “पिछले से लेकर पहले तक” कहने का मतलब क्रम में नहीं बल्कि निष्पक्ष वितरण है: जो देर से आये उन्हें भी वही समान पारिश्रमिक मिलता है जो पहले आये थे। यह परमेश्वर की स्वतंत्र इच्छा और कृपा की स्वतंत्रता का संकेत है कि वह अपने अनुग्रह का नाप आदमी के कर्म के अनुसार नहीं बाँटता।
मुख्य विषय
संबंधित शास्त्रीय उद्धरण
Matthew Henry का संक्षेप्य विचार कहता है कि यह कथा "परमेश्वर की स्वतंत्रता और दया" पर जोर देती है। Albert Barnes संकेत करते हैं कि पाठकों को ईश्वर के न्याय और दया में तुलना करने से बचना चाहिए। Adam Clarke ने उल्लेख किया है कि मालिक का व्यवहार मानव अपेक्षाओं के विरुद्ध है और इससे हम ईश्वरीय रहिम की गहराई समझते हैं। (इन उद्धरणों के लिए लेखक का संक्षेपित सार प्रस्तुत किया गया है; सटीक शब्दों के लिए मूल लेखों की जाँच करें।)
संबंधी पद एवं कनेक्शन
यह विचार निम्न स्थानों से जुड़ता है: लूका 13 में आख़िरी सेवक पहले होंगें विचार, जहाँ येशू बतलाते हैं कि कई बार अंतिमों को पहला बनाया जाएगा; रोमियों 9 में परमेश्वर की चुने जाने की स्वतंत्रता पर बहस मिलती है। दोनों संदर्भ दिखाते हैं कि ईश्वर के मार्ग और निर्णय मनुष्यों के मानकों से भिन्न हो सकते हैं।
व्यावहारिक प्रतिबिंब
यह पद हमारे व्यवहार पर चुनौती डालता है। क्या हम दूसरों के साथ किसी “नाप-तौल” की भावना रखते हैं—किसी की सेवा की अवधि, योगदान का मानक या समय देखकर मूल्य निर्धारण करते हैं? प्रभु की तरह दया दिखाने का अर्थ है क्षमा, सहानुभूति और उन लोगों के प्रति उदारता जिनकी परिस्थिति भिन्न हो। व्यक्तिगत धार्मिक जीवन में यह याद रखें कि परमेश्वर के साथ हमारा आँक-जोख नहीं, उसके अनुग्रह में भरोसा प्रमुख है।
संक्षेप
मत्ती 20:8 हमें सिखाता है कि स्वर्ग का लेखा-जोखा पृथ्वी की न्याय-मान्यताओं से अलग है: वहां कृपा और दया प्राथमिक हैं। इस वचन का संदेश सरल है पर गहरा — परमेश्वर की उदारता हमारे न्याय-बोध को चुनौती देती है और हमें भी दयालुता का जीवन अपनाने को कहती है।