Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 20:1 मत्ती 20:2 मत्ती 20:3 मत्ती 20:4 मत्ती 20:5 मत्ती 20:6 मत्ती 20:7 मत्ती 20:8 मत्ती 20:9 मत्ती 20:10 मत्ती 20:11 मत्ती 20:12 मत्ती 20:13 मत्ती 20:14 मत्ती 20:15 मत्ती 20:16 मत्ती 20:17 मत्ती 20:18 मत्ती 20:19 मत्ती 20:20 मत्ती 20:21 मत्ती 20:22 मत्ती 20:23 मत्ती 20:24 मत्ती 20:25 मत्ती 20:26 मत्ती 20:27 मत्ती 20:28 मत्ती 20:29 मत्ती 20:30 मत्ती 20:31 मत्ती 20:32 मत्ती 20:33 मत्ती 20:34



मत्ती 20:3 का सीधे अर्थ
इस व verse में खरब-खेती में एक दिन पहर की दोपहर के पहले, येसु द्वारा उन मजदूरों के चयन और बुलावे के क्रम की शुरुआत होती है: “फिर पहर एक दिन चढ़े, निकलकर, अन्य लोगों को बाजार में बेकार खड़े देखकर”। सरल शब्दों में यह बताती है कि प्रभु के काम पर बुलाने का क्रम देर तक चलता है और वह हर उस व्यक्ति को अवसर देता है जो तैयार है, भले ही उसकी परिस्थिति कैसी भी हो।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ मत्ती के गढ़े गए दृश्यों का हिस्सा है जहाँ यीशु खेत-कार्य की दृष्टि से प्रेरित उपदेश दे रहे हैं। मजदूरों को बाजार में खड़ा देखकर बुलावा देना यह दर्शाता है कि Kingdom of God का बुलावा किसी वस्तु-स्थित समय से बाधित नहीं है; ईश्वर हर समय प्रयत्नशील है और जो तैयार रहते हैं, उन्हें काम पर ले लेते हैं। इस संदर्भ में “बाजार” का चित्रण उस समाज के रोज़मर्रा जीवन से है जहाँ लोग भोजन और जीवनयापन के लिए अवसरों की तलाश में रहते थे।
व्याख्यात्मक बिंदु
महत्त्वपूर्ण cross-references (संक्षेप में)
1) लूका 10:2 — प्रभु के ईश्वर-कार्य के लिए दोहरी पुकार: अधिक से अधिक लोग सहायक बनें। यह दिखाता है कि बुलावा निरंतर है और भागीदारी का अवसर सभी तक पहुँचे।
2) मत्ती 22:9 — बुलावे के विस्तार का विचार: अब विविध लोगों तक पहुँचने की दिशा खुलती है ताकि राज्य-उत्सव में सभी भाग लें।
3) यूहन्ना 6:37 — जो आते हैं, उन्हें कभी निष्फल नहीं किया जाएगा: ईश्वर की इच्छा है कि कोई हाथ खींचकर पीछे न छूटे।
सूक्ष्म व्याख्या: पाठ का संदेश
इस verse के पीछे का उद्देश्य यह है कि ईश्वर का राज्य एक बहु-स्तरीय बुलावा है, जो सामाजिक-आर्थिक या उपलब्धता के मानक से नियंत्रित नहीं होता। यह प्रभु की उदारता और न्याय-पूर्ण बुलावे को दर्शाता है: बुलावा देना और स्वीकार करना—कर्म के प्रारम्भ से लेकर अंत तक—ईश्वर के प्रति एक नज़ीर-समझ है।
संक्षिप्त सीखा गया takeaway
निष्कर्ष
फिर पहर एक दिन चढ़े का संदेश बताता है कि Kingdom के काम में अवसर हर समय खुला रहता है, और दिव्य बुलावा हर वर्ग और परिस्थिति के लोगों के लिए है। इस से सीख मिलती है कि हम भी सदा तैयार रहें और एक दूसरे के लिए उदारता व स्वागत की भाषा बनें।
नीचे के उद्धरण केवल संदर्भ स्वरूप हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के वे छोटे अभिधारण जिन्हें पाठ के भाव-सार को समझाते समय संक्षेप में लिया गया है।