Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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मत्ती 20:4 में यीशु एक दानवीर खेत-मालिक की कहानी में समानता पर ध्यान दिलाते हैं। राजा ने दाख की बारी के कामगारों से कहा कि जो कुछ ठीक लगे, वे सब काम करे—और फिर वे भी उस इनाम के भागी बनते हैं। यह वाकया ईमानदारी, अनुदान और परमेश्वर की नीति-न्याय के बीच के गहरे प्रश्न को छूता है: क्यों कुछ लोग अंत में अधिक या कम पाते हैं, और परमेश्वर की कृपा कैसे काम करती है?
परिचय: अध्याय 20 का संदर्भ
यह पाठ प्रेरित संदेश के समानता के उपदेश के भाग के रूप में आता है, जहाँ एक मालिक ने शाम तक पहुँचते-पहुँचते विभिन्न घड़ियों के मजदूरों को बुलाकर वही वेतन दिया जो उसने तय किया था। कहानी का केंद्र बात यह है कि परमेश्वर की कृपा और इनाम मनुष्यों के मानकों से परे है और यह दयालुता पर आधारित है, न कि सिर्फ मेहनत के बराबर भागीदारी पर।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वचन में तीन बातें स्पष्ट होती हैं:
अन्य सुसमाचारों के सम्बन्धी संकेत
- प्रेरित पवित्र कथा में अन्य स्थानों पर भी कृपा और इनाम के बारे में समान विचार मिलते हैं, जैसे उपदेशों में “जो तु्म्हारे पास है, वही तुम्हें दिया जाएगा”—यह मानवीय तुलना से ऊपर उठकर ईश्वर के उदार प्रेम को दर्शाता है।
- समानता के सिद्धांत को अन्य_places में भी समझाया गया है: दया तभी सच है जब वह व्यक्ति-विशेष पर निर्भर न हो, बल्कि संसार के सभी सेवकों पर उसी नियम से लागू हो।
टेक्स्ट पर आधारित टिप्पणी
कथा में मालिक ने कहा: जो ठीक लगा, वही दूँगा। यह संकेत देता है कि इनाम की प्रकृति और सीमा मालिक की इच्छा के अनुसार है। यीशु यहाँ यह स्पष्ट करते हैं कि परिचित मानवीय अहंकार, तुलना और सम्मान-स्वार्थ से प्रेरित दायित्वों को चुनौती दी जा रही है। धर्मसंगतियों में यह दिखता है कि परमेश्वर की दृष्टि से सच्चा इनाम है—तत्व में पूर्ण संतुष्टि और प्रेम की अनुभूति।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
- लूका 15:11-32: पिता की दया और बेटे-आतुरता का चित्रण, जहाँ एहसास होता है कि पिता सबको समान प्रेम से मानता है।
- रोमियों 9:14-16: ईश्वर की कृपा और उसकी कृपाशक्ति का सार्वभौमिक अधिकार स्पष्ट करता है, इंसानी न्याय-मानक से ऊपर।
- गलातियों 6:7-9: उचित परिणाम यह कि परमेश्वर के नियमों के अनुसार कर्म करना चाहिए, पर इनाम की अंतिम बात उसकी कृपा पर है।
संक्षिप्त सार
मत्ती 20:4 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की कृपा कामगारों के साथ समान नहीं, बल्कि उसकी उदारता के अनुसार चलती है। उद्देश्य यह है कि विश्वासियों में आशा और नम्रता बने, और हर कोई कृपालु परमेश्वर के इनाम को अनुभव करे।
यह पाठ 2-3 स्पष्ट उद्धरणों के रूप में मठयू लॉर्ड-हैण्ड की एक-आठ-लाइन टिप्पणी के भीतर समाहित है, जिसमें यीशु की कथा के पीछे का धर्मशास्त्र और praktiy अभ्यास एक साथ अनुभव होता है।