Old Testament
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मत्ती 20:10 का संदर्भ और सार तत्व
य eh वाक्य उन मजदूरों के समूह के संदर्भ में है जिन्हें सुबह से बुलाया गया था, और जो पहले काम शुरू कर चुके थे। स्वामी ने हर एक को एक दीनार दिन के बदले काम दिया। परन्तु शाम को आने वाले अन्य मजदूरों ने भी ऐसी ही एक दीनार की अपेक्षा की, पर उन्हें एक ही दीनार मिली—यह प्रश्न उत्पन्न करता है कि मेहँत और न्याय का मूल्य कैसे निर्धारित होता है, और क्यों एक समान दीनार सभी को मिला। यह दृश्य यीशु की शिक्षाओं में परमेश्वर की कृपा और मानव प्रवृत्ति के बीच ke संबंध पर केन्द्रित है।
मुख्य अर्थ
यह वचन परमेश्वर की उदार कृपा का चित्रण करता है: परमेश्वर जो कुछ भी देता है वह उसकी राज्य व्यवस्था के अनुसार समान नहीं, बल्कि कृपा के कारण दत्त होता है। यहां दीनार मजदूरों को एक मानक मानी जाती है—परन्तु जो देर से आकर काम करने लगे, उन्हें भी वही दिया गया जो अन्य को मिला। यह दर्शाता है कि पुरस्कार केवल कार्य के आधार पर नहीं, बल्कि प्रभु की ऐसे ही कृपा पर निर्भर है।
तीन प्रमुख विषय
अनुकरणीय Cross-रेफरेंसेस
कथन-योग्य व्यावहारिक चिंतन
हम कौन हैं: वे जो शुरू से ही प्रभु के पास बुलाए गए थे, या वे जो देर से शामिल हुए? दोनों के लिए उद्धार एक समान दया है। यह हमें अहंकार छोड़कर दूसरों के ऊपर दया और सहनशीलता सिखाता है। साथ ही संतुष्टि के साथ कार्य करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर के राज्य में पुरस्कार उसका हैं जो विश्वास और करुणा से जुड़ता है।
प्रयोजनात्मक परिष्करण
इस वचन से प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर की कृपा सर्वसम्मत है—जो बुलाए जाते हैं, वे अपने-अपने समय पर परमेश्वर के दया-दर्शन के साथ उद्धार पाते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा न्याय नहीं, बल्कि ईश्वर की उदारता प्रेरित करती है, और वह समय-समय पर अपने लोगों को पूर्णता के अनुसार पुरस्कृत करता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
मत्ती 20:10 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की कृपा मानव-आधारित वेतन नहीं, बल्कि उसकी विशाल दयालुता पर निर्भर है। शुरुआती बुलाहट चाहे जो भी हो, प्रत्येक विश्वासी के लिए दीनार समान नहीं, बल्कि प्रत्येक के लिए ईश्वर की कृपा का अनुपम उपहार है।
यद्यपि यह अंश सीधे किसी एक टिप्पणीकार का पूर्ण उद्धरण नहीं है, पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शिक्षण-तत्व संयुक्त रूप से बतलाते हैं कि परमेश्वर की कृपा न्याय से ऊपर है और मनुष्यों के बीच समान दायित्व-आदेश नहीं, बल्कि उदारता के अधीन है।