Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 20:1 मत्ती 20:2 मत्ती 20:3 मत्ती 20:4 मत्ती 20:5 मत्ती 20:6 मत्ती 20:7 मत्ती 20:8 मत्ती 20:9 मत्ती 20:10 मत्ती 20:11 मत्ती 20:12 मत्ती 20:13 मत्ती 20:14 मत्ती 20:15 मत्ती 20:16 मत्ती 20:17 मत्ती 20:18 मत्ती 20:19 मत्ती 20:20 मत्ती 20:21 मत्ती 20:22 मत्ती 20:23 मत्ती 20:24 मत्ती 20:25 मत्ती 20:26 मत्ती 20:27 मत्ती 20:28 मत्ती 20:29 मत्ती 20:30 मत्ती 20:31 मत्ती 20:32 मत्ती 20:33 मत्ती 20:34



मत्ती 20:19 — संबोधन और उद्देश्य का स्पष्ट सार
यह verse बारीकी से बताती है कि यीशु अपने प्रेमपूर्ण मिशन की कठिनाईयों के बारे में अपने शिष्यों को सचेत कर रहे हैं। वह बताता है कि वे उसे गैर-यहूदियों के हाथों सौंपेंगे, उसे अपमानित करेंगे, शारीरिक यातनाएँ देंगे, क्रूस पर चढ़ाएंगे और तीसरे दिन वह जिलाया जाएगा। इसका मतलब है कि उद्धारकर्ता की योजना ईश्वर की योजना के अनुरोध के अनुसार पूरी होगी, दुख-सहयोग के माध्यम से उद्धार संभव बनेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह घटना मत्ती के Gospel के पूर्वकथन में तब आती है जब यीशु अपने मिशन की तीव्रता स्पष्ट कर रहे हैं और शिष्य उनसे महानता की जगह सेवा के लिए तैयार रहने की मांग कर रहे हैं। वह पदचिह्नों के बारे में बताता है कि उसकी मृत्यु एक पूर्व निर्धारित divine योजना का हिस्सा है, ताकि लोग पाप से छुड़ाए जा सकें। यह एक धैर्यपूर्ण चेतावनी है कि प्रेम का रास्ता पीड़ा से होकर गुजर सकता है परन्तु मृत्यु के बाद जिलाया जाना उसका चिरस्थायी विजय है।
व्याख्या के बिंदु (Interpretive Observations)
थीमेटिक सारांश
अनुसंधान योग्य क्रॉस-रेफरेंसेज (Cross-References)
1) लूका 18:31-33 — यीशु यह एक ही संदेश दोहराते हैं कि उनकी मृत्यु और फिर जिलामि प्रवेश होगा; यह योजना की सुसंगतता को पुष्ट करता है।
2) मरकुस 10:34 — पवित्र-पथ पर चलना और यातना, परन्तु तीसरे दिन जिलाने की पुनः पुष्टि होती है।
3) योहन्ना 19:17-18 — क्रूस पर उनकी मृत्यु का स्पष्ट दृश्य और उद्धार का पूरा क्रम दिखता है।
संरचित व्यावहारिक निष्कर्ष
हम तब भी आशा बनाए रखें जब जीवन में कठिनाइयाँ आयें, क्योंकि यीशु ने दिखाया कि वे पीड़ा के बीच भी पिता की योजना के साथ चलना उचित मानते हैं। विश्वासियों को यह याद रखना चाहिए कि क्रूस पर दी गई बलिदान से चिरायु जीवन की गारंटी जुड़ी है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain समर्थक टिप्पणीकारों से)
यदि उपलब्ध हो तो नीचे के संक्षिप्त विचारों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शब्द सीधे उद्धृत किए जा सकते हैं:
– Matthew Henry: “The Son of man must be delivered” पर निर्भरता दर्शाता है कि उद्धारकर्ता सत्ता के विरुद्ध नहीं, बल्कि तपस्या की योजना के अनुसार चला।
– Albert Barnes: “he shall be mocked, scourged, and crucified” से यह स्पष्ट होता है कि दर्द उद्धार के मार्ग का भाग है और परमेश्वर की व्यवस्था इसे रोक नहीं सकती।
– Adam Clarke: यह पंक्ति उद्धार के लिए एक परमेश्वर-निर्धारित कार्यक्रम की पुष्टि करती है कि मौत के बाद जिलाया जाना परमेश्वर की शक्ति का चिह्न है।
नोट: उपरोक्त में जिन भी स्पष्ट उद्धरणों के बारे में उल्लेख किया गया है, वे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के सामान्य विवेचनाओं के संदर्भ हैं।