लूका 10:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु जिस नगर में जाओ, और वहाँ के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, तो उसके बाजारों में जाकर कहो,

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लूका 10:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

लूका 10:10 का संदर्भ और उसका अर्थ

पत्र भेजने वाले प्रयुक्त मिशनरी संदेश में Jesus ने कहा, कि जो नगर नहीं स्वागत दे वहाँ के बाजारों में जाओ और अपना संदेश फैलाओ। यह पाठातिथ्य-स्वागत की उम्मीद पर नहीं टिकता, बल्कि यह दिखाता है कि ईश्वर का राज सदा सम्मान नहीं पाता—परन्तु साक्ष्य और प्रतिउत्तर के बीच धर्मयात्रा जारी रहती है। यदि ग्रहण न मिले, तब भी प्रचार अपने उद्देश्य को पूरा करता है: प्रभु के राज का प्रकाश हर तबके तक पहुँचे।

मूलभूत अर्थ

यह वाक्य शिष्य-प्रेषण के चरणों के बीच की वास्तविकता को प्रस्तुत करता है: उपलब्ध अवसर मिलते-न मिलते, संदेशवाहक को निर्बाध रूप से मार्गक्रमण करना है। ग्राम-स्तर पर अस्वीकार मिलने पर भी, कपड़े-समझौते नहीं होते; शास्त्र कहते हैं कि विवेक और समर्पण के साथ स्थान-स्थान पर पहुँचना चाहिए।

तीन प्रमुख थीम

  • उद्धार का संदेश और अस्वीकृति: जहाँ स्वागत नहीं मिलता, वहाँ भी सत्य की प्रस्तुति जारी रहती है, ताकि लोग अपने विचारों और जीवन-यात्रा को पुनः परख सकें।
  • अपमान के बावजूद ईश्वर की योजना: अस्वीकृति परिस्थितियाँ बन सकती हैं, परन्तु प्रभु का कार्य रुकता नहीं।
  • निष्कर्षित योजना बनाम स्थानीय प्रतिक्रियाएं: प्रेषक को परिणाम की परवाह कम—आखिरकार परिणाम ईश्वर के हाथ में है, और उनका वचन् प्रभाव डालते हैं।

संदर्भित विचार-प्रबन्ध (Cross-references)

1) मत्ती 10:14-14: शिष्यों के नगर के प्रति निर्गमन और अस्वीकृति के समय की व्यवहारिकता; प्रयोगिक मार्गदर्शन देता है कि कैसे लोक-परिवर्तन के बीच शांति और विनम्रता बनाए रखें।

2) सीटिका 9:35-38; ईश्वर के राज्य के लिये मसीह के संदेश की व्यापकता और उद्धार की अपील का सामंजस्य।

3) मार्क 6:11; यदि नगर-जन अस्वीकार करें, तो उसे छोड़कर अन्य गाँव की ओर जाना चाहिए—निर्णय-आचरण का स्पष्ट मार्ग।

व्यावहारिक विचार

हम भी अपने जीवन में कभी-कभी उसी परिस्थिति का सामना करते हैं—जहाँ हमारी बुनियादी बात स्वीकार नहीं पाई जाती। इस पाठ से प्रेरणा मिलती है कि भले निष्कर्ष-स्वीकृति कम हो, परन्तु सत्य को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने की प्रेरणा बनी रहे। साथ ही, नम्रता और विनम्रता बनाये रखना महत्त्वपूर्ण है, ताकि संदेश वही रहे जो जीवन परिवर्तन का कारण बन सके।

संयुक्त सार

लूका 10:10 यह याद दिलाता है कि मिशन-यात्रा के प्रत्येक कदम में न केवल अवसर प्राप्त होते हैं बल्कि अस्वीकृति भी आती है। परन्तु प्रभु के निर्देश के अनुसार, जहाँ भी संभव हो वहाँ पहुँचना चाहिए—ताकि ईश्वर का संदेश सभी तक पहुँचे। यह पाठ हमें साक्ष्य-प्रेषण में धैर्य, विनम्रता और दृढ़ता की शिक्षा देता है, और याद दिलाता है कि परिणाम परमेश्वर के हाथ में हैं।

पीछे के संदर्भों से उद्धरण नहीं दिए गए, परन्तु Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के समेकित विचारों के अनुसार, यदि आवश्यक हो तो उन्होंने सहज मार्गदर्शन दिए हैं: “यात्रा में विनम्रता बनाए रखें; अस्वीकृति में भी आत्म-समर्पण न छोड़े,” आदि व्युत्पन्न पंक्ति-भाव।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

लूका 10:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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प्रेरितों के काम 18:6 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 18:6 (HINIRV) »
परन्तु जब वे विरोध और निन्दा करने लगे, तो उसने अपने कपड़े झाड़कर उनसे कहा, “तुम्हारा लहू तुम्हारी सिर पर रहे! मैं निर्दोष हूँ। अब से मैं अन्यजातियों के पास जाऊँगा।”

लूका 9:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लूका 9:5 (HINIRV) »
जो कोई तुम्हें ग्रहण न करेगा उस नगर से निकलते हुए अपने पाँवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो।”

मत्ती 10:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 10:14 (HINIRV) »
और जो कोई तुम्हें ग्रहण न करे, और तुम्हारी बातें न सुने, उस घर या उस नगर से निकलते हुए अपने पाँवों की धूल झाड़ डालो।

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