Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 10:1 लूका 10:2 लूका 10:3 लूका 10:4 लूका 10:5 लूका 10:6 लूका 10:7 लूका 10:8 लूका 10:9 लूका 10:10 लूका 10:11 लूका 10:12 लूका 10:13 लूका 10:14 लूका 10:15 लूका 10:16 लूका 10:17 लूका 10:18 लूका 10:19 लूका 10:20 लूका 10:21 लूका 10:22 लूका 10:23 लूका 10:24 लूका 10:25 लूका 10:26 लूका 10:27 लूका 10:28 लूका 10:29 लूका 10:30 लूका 10:31 लूका 10:32 लूका 10:33 लूका 10:34 लूका 10:35 लूका 10:36 लूका 10:37 लूका 10:38 लूका 10:39 लूका 10:40 लूका 10:41 लूका 10:42



सीधे अर्थ की घोषणा
लूका 10:37 में यीशु यह सीख दे रहे हैं कि प्रेम का सार यह है कि दया बिना भेदभाव के दिखाई जाए। जिसने घायल पर दया दिखाई, वही वास्तविक धर्म का रास्ता दिखाता है; और यीशु ने उसे जवाब में कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
यह पाठ्योग यीशु के “आम दानी” बनाम “धर्मी” उसूलों के बीच के संघर्ष के क्रम में आता है। पहले एक न्यायी ने एक युवक को मुँह मोड़ कर कहा था कि प्रेम सिर्फ अपने समुदाय तक सीमित है; फिर प्रश्न पूछे जाते हैं: “कौन सा पड़ोसी है?” यीशु ने संदर्भ में एक दासी और एक संदिग्ध सड़क-यात्री की कहानी के माध्यम से भेदभाव मिटाने और दया के सार्वभौमिक दायरे को उजागर किया।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- पंक्ति में दर्शाया गया “वही जिसने उस पर तरस खाया” एक सक्रिय दयालुता का उदाहरण है, जो आवश्यकता पर तुरंत प्रतिक्रिया करती है।
- यीशु का आदेश “जा, तू भी ऐसा ही कर” दया को सिर्फ भावनात्मक उत्तेजना नहीं बनाता; इसे व्यवहार में उतारने की जिम्मेदारी देता है।
- यह कथा धार्मिकता के बाहरी दिखावे पर नहीं, बल्कि वास्तविक व्यवहार में प्रेम के प्रभाव पर जोर देती है।
मुख्य विचार
अनुशासनात्मक क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप व्याख्या)
- याकूब 2:14-17 से मिलता-जुलता संदेश: विश्वास बिना कर्म के नहीं प्रकट होता; दया को ठोस बनाना पड़ता है।
- मत्ती 7:12 के स्वांग से मिलता-जुलता सिद्धांत: जो चाहो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी वही करो; दया और न्याय का समन्वय।
- रोम 12:13 कहता है कि मौसीय-भीरु से बच कर वास्तविक सेवकत्व में बख्शा जाए: साहाय्यता हर प्रकार की दया को प्रशस्त करती है।
छोटी-सी उपयोगी सूची
संक्रमण-प्रकाश और संकल्प
यह पाठ हमें प्रेरित करता है कि धर्म केवल नैतिक सिद्धांत न रहे, बल्कि वह एक क्रियात्मक विवेक बने—जहाँ पड़ोसी के क्लेश को समझ कर वास्तविक सहायता दी जाए। जब हम अपनी ओर से प्रेम दिखाते हैं और जरूरतमंद की मदद करते हैं, तब परमेश्वर का शाश्वत प्रेम भी हमारे बीच जीवित होता है।
शीघ्र निष्कर्ष
सीख: दया को अपने व्यवहार का स्थिर नियम बनायें। किसी भी दूरी या भेदभाव के बिना, जो भी सहायता मांग करे, उसे संपूर्णता से दें।
उद्धृत विद्वान् स्रोत का उल्लेख: मांगने पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के प्रकाशनों से उत्पन्न सामान्य टिप्स को संकलित किया गया है। उल्लेखित निश्चित उद्धरण ने ऊपर के प्रवचनों में संलग्न विचारों को सुदृढ़ किया है, परन्तु यहाँ प्रमुख सारिणी में स्वरूपित किया गया है, पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।