Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 10:1 लूका 10:2 लूका 10:3 लूका 10:4 लूका 10:5 लूका 10:6 लूका 10:7 लूका 10:8 लूका 10:9 लूका 10:10 लूका 10:11 लूका 10:12 लूका 10:13 लूका 10:14 लूका 10:15 लूका 10:16 लूका 10:17 लूका 10:18 लूका 10:19 लूका 10:20 लूका 10:21 लूका 10:22 लूका 10:23 लूका 10:24 लूका 10:25 लूका 10:26 लूका 10:27 लूका 10:28 लूका 10:29 लूका 10:30 लूका 10:31 लूका 10:32 लूका 10:33 लूका 10:34 लूका 10:35 लूका 10:36 लूका 10:37 लूका 10:38 लूका 10:39 लूका 10:40 लूका 10:41 लूका 10:42



लूका 10:41 — संदर्भ-सार और प्रवचन
परिचय: इस पद में प्रभु यीशु मार्था और मर्थीयों के परिवार के बारे में बात कर रहे हैं। मरदमस में मार्था चिंता के साथ दरबार में उलझी रहती है, जबकि उनके बीच बैठी मरियम के साथ शांति का तात्पर्य स्पष्ट होता है। प्रभु स्पष्ट करते हैं कि सतत चिंता जीवन में अस्थिरता लाती है, और एक आस्था-केन्द्रित दृष्टि अधिक शांति देती है।
केंद्रीय अर्थ
यूहन्नी नहीं, यह पद संतोष के बारे में है—कैसे जीवन के दैनिक कार्यों में व्यस्तता और चिन्ता हमारे आध्यात्मिक अवसरों को दबा देती है। यीशु मार्था से कहते हैं कि उसके भीतर सतत “बहुत बातों के लिये चिन्ता” उसे प्रगट करती है और यह घबराहट में बदल जाती है। असली आशीर्वाद और कभी-कभी के लिए भी, हमारे बीच रुकना और प्रभु के पास बैठना अधिक आवश्यक है।
मुख्य विषय
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंस और सम्बन्ध
1) फर्मान 12:25 — “जो कुछ तुम करोगे, उसके लिए प्रभु में आस्था और धैर्य आवश्यक है; अन्यथा तुम चिंताओं से घिर जाओगे।” (संकेत-तत्व: चिंता बनाम विश्वास की चयनात्मकता)
2) मत्ती 11:28–30 — प्रभु यीशु कहते हैं, आओ सभी बोझों वाले और मैं तुम्हें विश्राम दूँगा; मेरे योग एक सरल और हल्का अनुभव देते हैं।
3) लूका 8:14 — धरती के हित के साथ चित्त की गहराई, जो चिंता के कारण रोग बनती है, परिणामस्वरूप फलों में कमी आती है।
व्यावहारिक मार्गदर्शन
- एक क्षण के लिए सांस रोककर प्रभु के सामने बैठना सीखें—उसके दयालु आवाज़ को सुनना अधिक महत्त्वपूर्ण है।
– दैनिक सेवाओं में भी आस्था-प्रधानता रखें: छोटी-छोटी चीज़ों को भी उसे समर्पित करें, ताकि चिंता प्रभु के कार्य में बाधित न हो।
संक्षिप्त निष्कर्ष
प्रभु का संदेश है कि हमारे जीवन में बहुत-सी बातों से अधिक एक सरल विश्वास और प्रभु के साथ नज़दीकी है—जो समय-समय पर शांति बनाये रखती है। मार्था-स्थिति हमें प्रेरित करती है कि सेवाओं के बावजूद भी आत्म-स्थिति और आस्थात्मक बैठाव का सम्मान करें, ताकि हम प्रभु का आनंद और उसकी शांति प्राप्त करें।
याद रखने योग्य बिंदु: चिंता से घबराहट बढ़ती है; विश्वास और शांति प्रभु के पास बैठने से मिलती है।
उद्धरण-नोट: नीचे उद्धृत छोटे कथन एकदम पाठ के समान नहीं हैं, परन्तु मना गया है कि Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षेप उद्धरण मूल रूप से उनके टिप्पणियों में मिलते हैं; यहाँ हमने उन विचारों को समान अर्थ के साथ बुना है।