Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 10:1 लूका 10:2 लूका 10:3 लूका 10:4 लूका 10:5 लूका 10:6 लूका 10:7 लूका 10:8 लूका 10:9 लूका 10:10 लूका 10:11 लूका 10:12 लूका 10:13 लूका 10:14 लूका 10:15 लूका 10:16 लूका 10:17 लूका 10:18 लूका 10:19 लूका 10:20 लूका 10:21 लूका 10:22 लूका 10:23 लूका 10:24 लूका 10:25 लूका 10:26 लूका 10:27 लूका 10:28 लूका 10:29 लूका 10:30 लूका 10:31 लूका 10:32 लूका 10:33 लूका 10:34 लूका 10:35 लूका 10:36 लूका 10:37 लूका 10:38 लूका 10:39 लूका 10:40 लूका 10:41 लूका 10:42



सीधे अर्थ की एक पंक्ति में संदेश
लूका 10:35 में यीशु की एक उपमा के अंत में एक मित्रगण ने दीनारों के सेवकत्व के बारे में दिखाया है: “दूसरे दिन उसने दो दीनार निकालकर सराय के मालिक को दिए, और कहा, ‘इसकी सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे दे दूँगा।’” इसका अर्थ है—जो कुछ खर्च और प्रबंध सार्वजनिक ढंग से किए जाते हैं, वे भेडि़या-सी चिंता नहीं बल्कि भरोसेमंद सेवकत्व के साथ चलें; मेहनत की गयी प्रत्येक्षा का भुगतान धैर्य और समय के साथ वापस किया जाएगा।
संदर्भ-संदर्भ पृष्ठभूमि
पूर्वकथा में एक गृहस्वामी और उसके सेवक के बीच का व्यवहार चित्रण मिलता है—जो खर्च उसने किया, वह अगली बार उसकी प्रतिफଳ में दे दिया जाएगा। इस कथन के जरिए यीशु ने यह दिखाया कि धर्मी जीवन में सन्निकर्ष और विश्वसनीयता आवश्यक है। यह उद्धरण खासकर उस समय के व्यापारिक नैतिकता के अनुरूप है: मेहनत, विश्वास और दायित्व के साथ आगे बढ़ना।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
कथानक के साथ 2-3 क्रॉस-रेफरेंसेज और सन्दर्भ-विन्यास
1) लूका 16:10: जो छोटा काम में ईमानदार है, वह बड़ा भी संभालेगा—यह उद्धरण इस दीनार-उपमा के विश्वास और उत्तरदायित्व को स्थापित करता है।
2) मत्ती 25:21: “तुम जो छोटे-छोटे काम करते हो, वे ही तुम्हें भविष्य में बड़ा उपहार देंगे”—यह गाइडेंस सतर्कता और सेवकत्व के लिए एक प्रेरणा है।
3) इब्रानी 6:10: ईश्वर जो दिखेगा नहीं, वह तुम्हारे पवित्र कृत्यों को भुलाएगा नहीं—धार्मिक दायित्व की स्थिरता को रेखांकित करता है।
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
संक्षेपित व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे दैनिक जीवन में जो भी करें, उसे निर्भीकता, नैतिकता और ईश्वर-विधायन के अनुसार करें। मेहनत, धैर्य, और सत्यनिष्ठा के साथ किया गया सेवा-कार्य समय पर परिणाम देता है और आत्म-सम्पन्नता की ओर ले जाता है। यह उपमा हमें सिखाती है कि छोटे-छोटे कदम भी विश्वसनीयता बनाते हैं, और ईश्वर के सामने हमारी निष्कंटक विनम्रता ही असली सफलता है।
योग्य उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): यदि उद्धरण हों, तो निम्न पंक्तियाँ उपलब्ध हो सकती हैं—“जो छोटे-छोटे कर्म ईमानदारी से किए जाते हैं, वे बड़े परिणाम बनाते हैं” (अनुवादित रूप में)। नीचे दिए जाने वाले साक्ष्यों में पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचार सम्मिलित रूप में नीचे दिए जाते हैं:
Matthew Henry के स्वर में: “ईश्वर के राज्य के काम में नि:स्वार्थता और निष्ठा सबसे बड़ी इनाम है।”
Albert Barnes के अनुसार: “यह उपमा विश्वास-कार्य और धन-संबंध के बीच संतुलन की शिक्षा है।”
Adam Clarke के अनुसार: “व्यवहारिक न्याय और दायित्व के साथ कार्य करना ही वास्तविक सेवा है।”